मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल अब और गहरे हो गए हैं। शनिवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक बड़ा संयुक्त सैन्य हमला किया, जिसके जवाब में तेहरान ने भी इजरायल पर 30 रॉकेट दागे हैं। इस अप्रत्याशित सैन्य तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस इलाके पर टिक गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी कर दिए हैं और उड़ानों पर रोक लगा दी है।
यहाँ इस बड़े घटनाक्रम से जुड़ी सभी प्रमुख जानकारियाँ दी गई हैं:
भारतीय नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी
इस गंभीर होते संकट के बीच, भारत सरकार ने ईरान और इजरायल में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए तुरंत एडवाइजरी जारी की है।
ईरान में भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद सभी भारतीयों से अपील की है कि वे ‘अत्यधिक सावधानी’ बरतें, गैर-जरूरी यात्राओं से बचें और जहां तक संभव हो, घरों के अंदर ही रहें। दूतावास ने किसी भी आपातकालीन स्थिति में संपर्क करने के लिए ये हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं: +989128109115, +989128109109, +989128109102 और +989932179359।
इजरायल में मौजूद भारतीयों को भी हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। दूतावास ने नागरिकों से इजरायली अधिकारियों और ‘होम फ्रंट कमांड’ के सभी सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने और सुरक्षित स्थानों (शेल्टर) के करीब ही रहने का आग्रह किया है। तनाव के चलते दिल्ली से तेल अवीव जाने वाली एयर इंडिया की उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं।
ईरान में 30 से अधिक ठिकानों पर हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने ‘ऑपरेशन शील्ड ऑफ जुडाह’ (Operation Shield of Judah) के तहत ईरान के भीतर 30 से अधिक प्रमुख ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इस साझा अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान के सुरक्षा ढांचे को नष्ट करना था।
जिन प्रमुख जगहों पर हमले हुए उनमें शामिल हैं:
- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का आवास
- खुफिया मुख्यालय और सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का कार्यालय
- ईरान का रक्षा मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा कार्यालय
- पारचिन (Parchin) का प्रमुख सैन्य परिसर
- दक्षिणी तेहरान स्थित कई अहम मंत्रालय
डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सैन्य अभियान की पुष्टि करते हुए इसे एक “बड़ा कॉम्बैट ऑपरेशन” बताया। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य अमेरिकी लोगों की रक्षा करना और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है, क्योंकि ईरान फिर से अपना परमाणु कार्यक्रम और मिसाइलें विकसित करने की कोशिश कर रहा था।
ट्रम्प ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को जमींदोज कर देगा और उसकी नौसेना का नामोनिशान मिटा देगा। उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सदस्यों से हथियार डालने को कहा, अन्यथा उन्हें ‘निश्चित मौत’ का सामना करने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस हमले में अमेरिकी बलों के जोखिम को कम करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
ईरान का पलटवार और घरेलू हालात
हमले के तुरंत बाद, ईरान ने इजरायल पर 30 रॉकेट दागकर अपनी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इजरायल रक्षा बलों (IDF) ने ईरान की ओर से मिसाइलें दागे जाने की पुष्टि की है। ईरान के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस हमले का ‘करारा जवाब’ देंगे।
इस बीच, तेहरान में आम जनता के बीच खौफ का माहौल है। किसी भी बड़े हमले की आशंका के चलते लोग राजधानी छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं और पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने के लिए लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं।

वैश्विक प्रभाव और उड़ानों पर रोक
इस तनाव का सीधा असर एविएशन और कूटनीतिक क्षेत्रों पर पड़ा है:
एयरस्पेस बंद: ईरान, इराक और इजरायल ने अपने हवाई क्षेत्र (airspace) नागरिक उड़ानों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए हैं।
उड़ानें रद्द: रूस और कुवैत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ईरान और इजरायल के लिए अपनी सभी उड़ानें अगली सूचना तक निलंबित कर दी हैं। फ्लाईदुबई (flydubai) की भी कई उड़ानें प्रभावित हुई हैं।
अन्य देशों की एडवाइजरी: कतर स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों और नागरिकों को सुरक्षित इमारतों में रहने (shelter in place) और जरूरी राशन-पानी का स्टॉक रखने का निर्देश दिया है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी अपने नागरिकों को ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
यह भी पढ़ें-
अमेरिका-कनाडा का मोहभंग: यूरोप का रुख कर रहे गुजराती छात्र, एजुकेशन लोन में भारी गिरावट
ओडिशा: एक ही दिन में दो बार रेप, फिर चौथी मंजिल से फेंककर 23 वर्षीय युवती की हत्या











