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अमेरिका ने 75 देशों के लिए वीज़ा प्रोसेसिंग पर लगाई रोक, क्या भारतीयों की भी बढ़ेंगी मुश्किलें?

| Updated: January 15, 2026 12:49

अमेरिका ने 'पब्लिक चार्ज' नियम के तहत 75 देशों के वीजा पर रोक लगाई; भारत लिस्ट से बाहर, लेकिन 12 लाख भारतीयों पर लटकी तलवार— जानिए पूरी डिटेल।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीज़ा (immigrant visa) की प्रोसेसिंग पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन आवेदकों पर नकेल कसना है, जिनके भविष्य में अमेरिकी सरकार पर ‘सार्वजनिक बोझ’ (public liability) बनने की संभावना है।

विदेश विभाग (State Department) के एक प्रवक्ता ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा, “75 देशों से इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग को तब तक के लिए रोक दिया गया है, जब तक कि विदेश विभाग अपनी आव्रजन प्रक्रियाओं का पुनर्मूल्यांकन (reassess) नहीं कर लेता। इसका मकसद उन विदेशी नागरिकों के प्रवेश को रोकना है जो यहाँ आकर कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी लाभों (welfare and public benefits) का फायदा उठा सकते हैं।”

क्या है नया आदेश?

फॉक्स न्यूज द्वारा देखी गई विदेश विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक मेमो के जरिए कांसुलर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे मौजूदा कानूनों के तहत वीज़ा देने से इनकार करें, जब तक कि विभाग स्क्रीनिंग और वेटिंग (vetting) प्रक्रियाओं की पूरी तरह से समीक्षा नहीं कर लेता।

यह रोक 21 जनवरी से शुरू होगी और अनिश्चित काल तक जारी रहेगी, जब तक कि विभाग इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग का पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं कर लेता। गौरतलब है कि नवंबर में, व्हाइट हाउस के पास एक अफगान नागरिक द्वारा की गई गोलीबारी में एक नेशनल गार्ड सदस्य की मौत के बाद, डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी “तीसरी दुनिया के देशों” (Third World Countries) से प्रवासन (migration) को रोकने का वादा किया था।

इन 75 देशों पर लगी है रोक

अमेरिका द्वारा जारी की गई इस सूची में भारत के कई पड़ोसी देशों सहित कुल 75 देश शामिल हैं। इन देशों के नाम हैं:

भूटान, अफगानिस्तान, अल्बानिया, अल्जीरिया, एंटीगुआ और बारबुडा, आर्मेनिया, अजरबैजान, बहामास, बांग्लादेश, बारबाडोस, बेलारूस, बेलीज, बोस्निया, ब्राजील, बर्मा (म्यांमार), कंबोडिया, कैमरून, केप वर्डे, कोलंबिया, कोटे डी आइवर, क्यूबा, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, डोमिनिका, मिस्र, इरिट्रिया, इथियोपिया, फिजी, गाम्बिया, जॉर्जिया, घाना, ग्रेनाडा, ग्वाटेमाला, गिनी, हैती, ईरान, इराक, जमैका, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, कुवैत, किर्गिस्तान, लाओस, लेबनान, लाइबेरिया, लीबिया, मैसेडोनिया, मोल्दोवा, मंगोलिया, मोंटेनेग्रो, मोरक्को, नेपाल, निकारागुआ, नाइजीरिया, पाकिस्तान, रिपब्लिक ऑफ कांगो, रूस, रवांडा, सेंट किट्स और नेविस, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, सेनेगल, सिएरा लियोन, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया, तंजानिया, थाईलैंड, टोगो, ट्यूनीशिया, युगांडा, उरुग्वे, उज्बेकिस्तान और यमन।

भारत पर इसका क्या असर होगा?

राहत की बात यह है कि इस “फ्रीज लिस्ट” में भारत का नाम विशेष रूप से शामिल नहीं है, लेकिन भारतीय नागरिकों के लिए इसके अप्रत्यक्ष परिणामों से इंकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका का अचानक “आत्मनिर्भरता” (self-sufficiency) के मानकों पर जोर देना हजारों भारतीय परिवारों के लिए एक अघोषित बाधा बन सकता है।

खासकर उन भारतीय परिवारों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, जो अपने बुजुर्ग माता-पिता या पुरानी बीमारियों से ग्रसित रिश्तेदारों को अमेरिका बुलाना चाहते हैं। अब ऐसे लोगों को संभावित ‘वित्तीय दायित्व’ (financial liability) के नजरिए से देखा जा रहा है।

इसके अलावा, जैसे-जैसे विदेश विभाग अपने वैश्विक कांसुलर कर्मचारियों को इन 75 प्रतिबंधित देशों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया में लगाएगा, भारत का पहले से ही तनावपूर्ण वीज़ा ढांचा पूरी तरह से प्रशासनिक अड़चनों में फंस सकता है।

बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां पहले ही गैर-जरूरी यात्राओं पर रोक लगा रही हैं और आउटसोर्सिंग कंपनियां साल भर की देरी से बचने के लिए अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अमेरिका में शिफ्ट कर रही हैं। ऐसे में भारतीय पेशेवर वर्ग एक तरह से फंस कर रह गया है।

लाखों भारतीयों के लिए “दोहरी मार”

वीज़ा बैकलॉग की भारी संख्या स्थिति को और जटिल बना रही है। वर्तमान में, 12 लाख से अधिक भारतीय नागरिक रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड (employment-based green cards) के लिए कानूनी और प्रशासनिक अधर में लटके हुए हैं। फरवरी 2026 के वीज़ा बुलेटिन में भी इन आवेदकों और परिवार-प्रायोजित श्रेणियों के लाखों लोगों के लिए ‘प्रायोरिटी डेट्स’ में कोई खास हलचल नहीं दिखी है।

भारतीय समुदाय के लिए निकट भविष्य एक “दोहरी मार” (double squeeze) जैसा है: एक तरफ पुराना भारी बैकलॉग और दूसरी तरफ एक नई और सख्त जांच व्यवस्था, जो बढ़ती उम्र या बीमारी को वीज़ा खारिज करने का आधार मानती है।

सोमालिया और फ्रॉड स्कैंडल का कनेक्शन

मिनेसोटा में एक बड़े फ्रॉड स्कैंडल के सामने आने के बाद संघीय अधिकारियों ने सोमालिया पर विशेष जांच बढ़ा दी है। इस घोटाले में अभियोजकों ने करदाताओं द्वारा वित्तपोषित लाभ कार्यक्रमों (taxpayer-funded benefit programs) के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का पर्दाफाश किया था। इसमें शामिल कई लोग सोमाली नागरिक या सोमाली-अमेरिकी थे।

वीज़ा के लिए नए और सख्त नियम

नवंबर 2025 में, विदेश विभाग ने दुनिया भर में अपने दूतावासों को एक केबल संदेश भेजकर आव्रजन कानून के तथाकथित “पब्लिक चार्ज” (public charge) प्रावधान के तहत नए स्क्रीनिंग नियमों को लागू करने का निर्देश दिया था।

इस निर्देश के अनुसार, कांसुलर अधिकारियों को उन आवेदकों को वीज़ा देने से मना करना होगा जिनके सरकारी लाभों पर निर्भर रहने की संभावना है। इसके लिए कई कारकों को तौला जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

  • स्वास्थ्य और उम्र
  • अंग्रेजी भाषा में दक्षता
  • वित्तीय स्थिति
  • लंबे समय तक चिकित्सा देखभाल की संभावित आवश्यकता

हैरानी की बात यह है कि अब अधिक उम्र या अधिक वजन (overweight) वाले आवेदकों का वीज़ा भी खारिज किया जा सकता है। साथ ही, जिन्होंने अतीत में कभी सरकारी नकद सहायता ली हो या किसी संस्थागत मदद का उपयोग किया हो, उन्हें भी अयोग्य माना जा सकता है।

विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट (Tommy Piggott) ने एक बयान में कहा, “विदेश विभाग अपने लंबे समय से चले आ रहे अधिकार का उपयोग उन संभावित प्रवासियों को अयोग्य घोषित करने के लिए करेगा जो संयुक्त राज्य अमेरिका पर सार्वजनिक बोझ बन सकते हैं और अमेरिकी लोगों की उदारता का फायदा उठा सकते हैं।”

फिलहाल, इन 75 देशों से अप्रवासन तब तक रुका रहेगा जब तक कि अमेरिका अपनी प्रक्रियाओं को पूरी तरह से सख्त और सुरक्षित नहीं बना लेता।

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