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वडोदरा हरणी झील हादसा: न्यू सनराइज स्कूल के खिलाफ अभिभावकों ने 16.61 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा ठोका

| Updated: January 19, 2026 15:58

12 बच्चों की मौत के मामले में अभिभावकों ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया, स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही और अवैध पिकनिक आयोजित करने का लगाया गंभीर आरोप। कुल ₹16.61 करोड़ के मुआवजे की मांग।

वडोदरा: दो साल पहले वडोदरा की हरणी झील में हुए दिल दहला देने वाले नाव हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। अब इस त्रासदी में जान गंवाने वाले 11 बच्चों के माता-पिता ने ‘न्यू सनराइज स्कूल’ के खिलाफ एक बड़ी कानूनी लड़ाई छेड़ दी है। अपने बच्चों को खोने वाले इन अभिभावकों ने 17 जनवरी को वडोदरा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Vadodara District Consumer Disputes Redressal Commission) का दरवाजा खटखटाया है।

इन परिवारों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कुल 16.61 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। हालांकि, इस हादसे में जान गंवाने वाले एक अन्य बच्चे के परिजन अभी इस कानूनी प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए हैं।

हर माता-पिता ने की 1.51 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

18 जनवरी, 2024 को स्कूल पिकनिक के दौरान हरणी झील में नाव पलटने से 12 स्कूली बच्चों और दो शिक्षकों की दुखद मृत्यु हो गई थी।

उपभोक्ता फोरम में अभिभावकों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील हितेश गुप्ता ने बताया, “प्रत्येक अभिभावक ने स्कूल से 1.51 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।”

मुआवजे की इस राशि का ब्यौरा देते हुए उन्होंने बताया कि:

  • 1 करोड़ रुपये: बच्चे को खोने के एवज में।
  • 50 लाख रुपये: मानसिक आघात (Mental Trauma) के लिए।
  • 1 लाख रुपये: कानूनी खर्च (Litigation Costs) के लिए।

इसके साथ ही, घटना की तारीख से लेकर भुगतान की तारीख तक 18% ब्याज की भी मांग की गई है।

‘स्कूल की आपराधिक लापरवाही से गई मासूमों की जान’

दुखी अभिभावकों ने स्कूल पर ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practices) का आरोप लगाया है। वकील हितेश गुप्ता ने बताया कि स्कूल ने पिकनिक का आयोजन किया था, इसलिए बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की थी।

बाद में यह भी खुलासा हुआ कि स्कूल प्रबंधन ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से पूर्व अनुमति लिए बिना ही अवैध रूप से इस पिकनिक का आयोजन किया था।

गुप्ता ने इसे ‘आपराधिक लापरवाही’ का मामला बताते हुए कहा, “सुरक्षा उपायों की कमी, नाव में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना, और मौके पर प्रशिक्षित पर्यवेक्षकों या जीवन रक्षक उपकरणों (Life-saving equipment) की अनुपस्थिति के कारण यह भयावह दुर्घटना हुई। इसके लिए सीधे तौर पर स्कूल जिम्मेदार है।”

शिकायत में यह भी उजागर किया गया है कि स्कूल ने पिकनिक के लिए प्रत्येक छात्र से 750 रुपये वसूले थे, लेकिन इसकी कोई रसीद नहीं दी गई। वकील ने तर्क दिया कि स्कूल सालाना फीस के साथ पिकनिक का शुल्क भी लेता है, लेकिन उचित सेवा देने में विफल रहा, जिसका परिणाम परिवारों को अपूरणीय क्षति के रूप में भुगतना पड़ा।

विडंबना यह है कि प्रशासन ने अपनी लापरवाही के लिए स्कूल पर केवल 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।

वडोदरा की कांग्रेस नेता अमी रावत ने वाइब्स ऑफ इंडिया को बताया कि, “सबसे पहले ठेकेदार ज़िम्मेदार है, उसके बाद वडोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन जिसने निगरानी नहीं की और आखिर में स्कूल जिसने कुछ गाइडलाइंस फॉलो नहीं कीं।”

कोटिया प्रोजेक्ट्स ने अभी तक दिया केवल 25% मुआवजा

गौरतलब है कि डूबने की घटना के बाद, अभिभावकों ने हरणी लेक ज़ोन का अनुबंध प्राप्त करने वाली फर्म ‘कोटिया प्रोजेक्ट्स’ के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई थी।

पुलिस ने फर्म के सभी भागीदारों, नाव चालक और हेल्पर को गिरफ्तार किया था। सरकारी जांच में यह पुष्टि हुई थी कि नाव में क्षमता से कहीं अधिक बच्चे सवार थे, जिसके कारण वह पलट गई।

वकील गुप्ता के अनुसार, गुजरात उच्च न्यायालय ने कोटिया प्रोजेक्ट्स को प्रति बच्चा 32 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था।

उन्होंने बताया, “हालांकि, फर्म ने अब तक अभिभावकों को तय राशि का केवल 25% हिस्सा ही भुगतान किया है।”

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