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विजिनजम पोर्ट ने 9 माह से भी कम समय में संभाले 10 लाख टीईयू कंटेनर, बनाया नया रिकॉर्ड

| Updated: August 27, 2025 16:23

अडानी समूह का विजिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट 9 माह से भी कम समय में 10 लाख TEUs कंटेनर संभालकर बना दक्षिण भारत का सबसे बड़ा कंटेनर टर्मिनल

तिरुवनंतपुरम (केरल): अडानी समूह के विजिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट ने वाणिज्यिक संचालन शुरू करने के नौ माह से भी कम समय में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पोर्ट ने 10 लाख ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स (TEUs) कंटेनरों को संभालते हुए एक नया कीर्तिमान रच दिया है।

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) द्वारा संचालित इस पोर्ट की उपलब्धि ने न सिर्फ शुरुआती अनुमानों को पीछे छोड़ा है, बल्कि भारत के समुद्री मानचित्र को भी नई परिभाषा दी है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केरल के बंदरगाह मंत्री वी. एन. वासवन ने कहा कि विजिनजम पोर्ट ने वाणिज्यिक संचालन के सिर्फ नौ माह में ही 10 लाख TEUs संभाल लिए हैं। उन्होंने इसे “केरल और भारत के लिए गर्व का क्षण” बताया और कहा कि परियोजना का दूसरा चरण जल्द शुरू किया जाएगा। साथ ही रेलवे और सड़क संपर्क भी शीघ्र ही विकसित किए जाएंगे।

पहले साल की क्षमता से कई गुना प्रदर्शन

3 दिसंबर 2024 को शुरू हुए विजिनजम पोर्ट ने अब तक 460 से अधिक जहाज़ों का स्वागत किया है, जिनमें 26 अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स (ULCVs) शामिल हैं। समझौते के तहत पहले वर्ष में केवल 30% क्षमता के उपयोग का अनुमान था, लेकिन पोर्ट ने रिकॉर्ड समय में पूरी क्षमता का उपयोग कर दिखाया।

यह उपलब्धि सरकार, स्थानीय समुदायों और APSEZ के सहयोग से संभव हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत उन वैश्विक व्यापार मार्गों को फिर से आकार दे सकता है, जिन्हें लंबे समय से कोलंबो और सिंगापुर जैसे केंद्र संचालित करते रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन

पोर्ट का प्रदर्शन दुनिया के शीर्ष बंदरगाहों के बराबर माना जा रहा है। उदाहरण के लिए, एमएससी पालोमा जहाज़ से 10,576 TEUs का आदान-प्रदान हुआ, जो भारत में अब तक का रिकॉर्ड है।

अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि सुव्यवस्थित योजना, क्रेनों की कुशल तैनाती और उच्च बर्थ उपयोग का परिणाम है। इसके चलते विजिनजम दक्षिण भारत का सबसे बड़ा कंटेनर टर्मिनल बनता जा रहा है।

भौगोलिक और तकनीकी मजबूती

पूर्व-पश्चिम समुद्री मार्गों के करीब स्थित होने के कारण यह पोर्ट जहाज़ों के समय और लागत दोनों को कम करता है। 18.5 मीटर की प्राकृतिक गहराई की वजह से यहाँ सबसे बड़े जहाज़ भी बिना ड्रेजिंग के आ-जा सकते हैं।

तकनीक के मोर्चे पर भी पोर्ट आधुनिक है। यहाँ 8 एसटीसी (Ship-to-Shore) क्रेन और 24 ऑटोमेटेड सीआरएमजी (CRMG) क्रेन काम कर रहे हैं, जिन्हें एआई और आईओटी तकनीक से जोड़ा गया है। इससे वास्तविक समय में कार्गो ट्रैकिंग और तेज टर्नअराउंड समय संभव हो पाया है।

व्यापार और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

विजिनजम से यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और फार ईस्ट के लिए सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे भारतीय कार्गो को अब विदेशी बंदरगाहों के जरिए ट्रांसशिप करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। यह न सिर्फ निर्यातकों-आयातकों के लिए लागत और समय बचाएगा, बल्कि भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगा।

इस वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही से एक्सिम (निर्यात-आयात) संचालन शुरू होने के साथ ही पोर्ट नए व्यापार अवसरों के द्वार खोलेगा और दक्षिण भारत के लिए वैश्विक वाणिज्य का प्रमुख द्वार बनेगा।

ग्रीन शिपिंग की दिशा में पहल

विजिनजम पोर्ट को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बुनियादी ढांचे के साथ तैयार किया गया है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा समाधान शामिल किए गए हैं और पर्यावरण मंत्रालय के मानकों का सख्ती से पालन किया गया है। अधिकारी बताते हैं कि यह पहल भारत की ग्रीन शिपिंग क्रांति की दिशा में एक उदाहरण है।

ऊर्जा दक्षता, प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास पर जोर देकर पोर्ट यह साबित कर रहा है कि बड़े पैमाने पर व्यापार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकती है।

अधिकारियों ने कहा कि 10 लाख TEUs का रिकॉर्ड पार करना केवल शुरुआत है। एक्सिम संचालन और ग्रीन पहल के साथ विजिनजम आने वाले समय में दुनिया के गहरे समुद्री बंदरगाहों के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।

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