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बंगाल में ‘मछली’ से प्रचार, बिहार में ‘मीट’ पर बैन: सत्ता की खातिर बीजेपी के ‘मांसाहारी’ दावों की दोहरी सियासत बेनकाब!

| Updated: April 1, 2026 12:24

ममता बनर्जी के 'मछली और मांस बैन' वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का करारा जवाब; अफवाहों को रोकने के लिए हाथ में मछली लेकर वोट मांग रहे बीजेपी उम्मीदवार।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में खान-पान को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने मंगलवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर राज्य में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनती है, तो अगला मुख्यमंत्री खाने-पीने की आदतों के मामले में पूरी तरह से ‘मांसाहारी’ होगा।

उनका यह बयान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस तीखे हमले के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधा था। ममता ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आई, तो राज्य में मछली, मांस और यहां तक कि अंडों पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

मजूमदार ने ममता बनर्जी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वह आगामी चुनावों में अपनी हार के डर और हताशा की वजह से ऐसी हल्की बातें कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल के ज्यादातर लोग मांसाहारी हैं और खुद भारतीय जनता पार्टी का प्रांतीय नेतृत्व भी मांसाहारी भोजन करता है।

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि भविष्य में बीजेपी से जो भी व्यक्ति पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालेगा, वह मांसाहारी भोजन करने वाला ही होगा। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि जब राज्य का मुख्यमंत्री खुद मांसाहारी होगा, तो वह भला दूसरों के खान-पान पर प्रतिबंध कैसे लगा सकता है।

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपने पूरे चुनाव प्रचार में इस बात पर जोर दे रही है कि बीजेपी के सत्ता में आने से बंगालियों के मांसाहार खाने की आदतों पर पाबंदियां लगनी शुरू हो जाएंगी। टीएमसी के इन आरोपों को उत्तर भारत के कई राज्यों में, खासकर त्योहारों के दौरान, मांसाहारी भोजन पर की जाने वाली सख्ती से काफी बल मिला है।

इस संदर्भ में पिछले महीने का एक वाकया भी अहम है जब बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक बड़ा आदेश जारी किया था। उन्होंने स्कूल-कॉलेजों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक इलाकों के पास खुले में मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगाने का ऐलान किया था। इसका कारण उन्होंने सामाजिक सौहार्द बढ़ाना, साफ-सफाई रखना और बच्चों में हिंसक प्रवृत्तियों को रोकना बताया था, जिसके बाद काफी विवाद और आलोचना भी हुई थी।

पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल से दो चरणों में चुनाव शुरू होने जा रहे हैं और खान-पान का यह मुद्दा अब सड़कों पर आ गया है। टीएमसी के इन आरोपों का जवाब देने के लिए राज्य में बीजेपी के कई उम्मीदवार और नेता एक अनोखा तरीका अपना रहे हैं। वे अपने हाथों में मछली पकड़कर घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं ताकि जनता के बीच यह संदेश जाए कि उनके खान-पान पर कोई खतरा नहीं है।

हाल ही में विधाननगर से बीजेपी उम्मीदवार डॉ. शारद्वत मुखोपाध्याय का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ है। इस वीडियो में वह अपने चुनाव प्रचार के दौरान हाथ में मछली पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं।

ममता बनर्जी के इस दावे का कि बीजेपी शासित राज्यों में मछली नहीं खाई जाती, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने भी कड़ा विरोध किया है। उन्होंने ममता बनर्जी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे देश में सबसे ज्यादा मछली खाने वाले लोग त्रिपुरा में ही रहते हैं।

ध्यान रहे कि रविवार को पुरुलिया जिले के मानवबाजार में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने इस विवाद को जन्म दिया था। मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर लोगों की भोजन की आदतों में दखल देने का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर वे सत्ता में आए तो लोगों के मछली, अंडे या मांस खाने पर कड़ी पाबंदियां लगा दी जाएंगी।

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