कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर हम खुद को असहाय महसूस करने लगते हैं। यह बीमारी एक अनहोनी की तरह लगती है जिस पर हमारा कोई जोर नहीं। लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक नए अध्ययन ने उम्मीद की एक बड़ी किरण दिखाई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में कैंसर के एक तिहाई से अधिक मामले ऐसे हैं, जिन्हें रोका जा सकता है।
ताजा विश्लेषण बताता है कि अगर हम अपनी जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाएं और कुछ सावधानियां बरतें, तो इस जानलेवा बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इन तीन तरह के कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा
WHO के अनुसार, रोकथाम योग्य कैंसर के मामलों में लगभग आधे मामले फेफड़े (Lung), पेट (Stomach) और सर्वाइकल (Cervical) कैंसर के होते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर साल चिकित्सा हस्तक्षेप, आदतों में बदलाव, और पर्यावरण प्रदूषण से निपटकर लाखों लोगों को कैंसर का शिकार होने से बचाया जा सकता है।
WHO की मेडिकल एपिडेमियोलॉजिस्ट और इस विश्लेषण की वरिष्ठ लेखिका, इसाबेल सोएजोमाताराम (Isabelle Soerjomataram) का कहना है, “इन रोकथाम योग्य कारणों को संबोधित करना वैश्विक स्तर पर कैंसर के बोझ को कम करने के सबसे शक्तिशाली अवसरों में से एक है।”
आंकड़े क्या कहते हैं?
साल 2022 के आंकड़ों पर गौर करें तो उस वर्ष लगभग 1.9 करोड़ (19 मिलियन) कैंसर के नए मामले सामने आए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग 38 प्रतिशत मामले 30 ऐसे जोखिम कारकों से जुड़े थे जिन्हें बदला जा सकता था।
इन कारकों में तंबाकू का सेवन, शराब, मोटापा (हाई बीएमआई), शारीरिक गतिविधि की कमी, बिना धुएं वाला तंबाकू (जैसे गुटखा), सुपारी, स्तनपान में कमी, वायु प्रदूषण, अल्ट्रावायलेट रेडिएशन और विभिन्न प्रकार के संक्रमण शामिल हैं।
सिगरेट और शराब: दो सबसे बड़े दुश्मन
कैंसर का सबसे बड़ा कारण जिसे रोका जा सकता है, वह है तंबाकू (Smoking)। 2022 में सामने आए सभी कैंसर मामलों में से 15 प्रतिशत के लिए सिर्फ तंबाकू जिम्मेदार था। पुरुषों के लिए यह जोखिम और भी भयावह है। उस साल दुनिया भर में पुरुषों में हुए कैंसर के 23 प्रतिशत नए मामलों के पीछे धूम्रपान ही मुख्य वजह थी।
तंबाकू के बाद, जीवनशैली से जुड़ा दूसरा सबसे बड़ा कारण शराब (Alcohol) है। यह लगभग 3.2 प्रतिशत नए कैंसर मामलों (करीब 7 लाख मामले) के लिए जिम्मेदार पाया गया।
प्रदूषण और संक्रमण भी बड़ा खतरा
सिर्फ नशा ही नहीं, जिस हवा में हम सांस ले रहे हैं, वह भी हमें बीमार बना रही है। वायु प्रदूषण का असर हर क्षेत्र में अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, पूर्वी एशिया में महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के लगभग 15 प्रतिशत मामले वायु प्रदूषण के कारण थे। वहीं, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर के लगभग 20 प्रतिशत मामलों की वजह प्रदूषित हवा थी।
इसके अलावा, लगभग 10 प्रतिशत नए कैंसर मामले संक्रमण (Infections) से जुड़े थे। महिलाओं में, रोकथाम योग्य कैंसर का सबसे बड़ा हिस्सा ‘हाई-रिस्क ह्यूमन पैपिलोमावायरस’ (HPV) के कारण था, जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बनता है। राहत की बात यह है कि HPV का टीका (Vaccine) अब उपलब्ध है, लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में इसका उपयोग अभी भी बहुत कम हो रहा है।
वहीं पुरुषों में पेट के कैंसर के मामले अधिक देखे गए, जो अक्सर धूम्रपान के साथ-साथ भीड़भाड़, खराब स्वच्छता और साफ पानी की कमी के कारण होने वाले संक्रमणों से जुड़े होते हैं।
अब कदम उठाने का समय है
WHO के कैंसर कंट्रोल टीम लीड और इस रिपोर्ट के सह-लेखक, आंद्रे इल्बावी (André Ilbawi) कहते हैं, “देशों और जनसंख्या समूहों के पैटर्न की जांच करके, हम सरकारों और आम लोगों को सटीक जानकारी दे सकते हैं। इससे कई कैंसर के मामलों को शुरू होने से पहले ही रोकने में मदद मिलेगी।”
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि गेंद अब हमारे पाले में है। अपनी आदतों को सुधारकर और सही कदम उठाकर हम कैंसर जैसी बीमारी को अपने जीवन में आने से रोक सकते हैं।
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