अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद स्थित एक कंपनी पर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि इस कंपनी ने न केवल भारतीय कस्टम विभाग को चकमा देकर टैक्स चोरी की, बल्कि दक्षिण कोरियाई सरकार को भी करीब 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8 करोड़ रुपये से अधिक) का चूना लगाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोरिया ट्रेड-इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी (KOTRA) ने इसकी विस्तृत शिकायत भारतीय जांच एजेंसियों—कस्टम विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI)—से की है।
कोत्रा (KOTRA) ने अपनी रिपोर्ट में इसे “अंतर्राष्ट्रीय व्यापार धोखाधड़ी, सीमा शुल्क चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का एक सुनियोजित नेटवर्क” बताया है। इस घोटाले के तार भारत में पंजीकृत कई फर्मों और चीन, दक्षिण कोरिया व हांगकांग में स्थित उनके विदेशी सहयोगियों से जुड़े हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि विदेशों से तैयार माल (Finished Goods) मंगाकर उसे भारत में निर्मित बताकर बेचा जा रहा था।
चीन का माल, कोरिया का ठप्पा: कैसे रची गई साजिश?
अधिकारियों के मुताबिक, अहमदाबाद के एक व्यापारी ने साल 2020-21 में खुद को कोरियाई सामानों के वैध आयातक (Importer) के रूप में एजेंसी के साथ पंजीकृत कराया था। इसके बाद, उसने अपने चीनी साझेदारों के साथ मिलकर दक्षिण कोरिया में कथित तौर पर एक ‘शेल कंपनी’ (फर्जी कंपनी) खड़ी कर दी। इस कंपनी ने दावा किया कि वह दो उत्पादों का निर्माण करती है।
हालांकि, जांच में पर्दाफाश हुआ कि कोरिया में उस कंपनी की कोई भी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट या फैक्ट्री थी ही नहीं। वे वास्तव में चीन से माल आयात कर रहे थे और उसे कोरियाई उत्पाद बताकर आगे भेज रहे थे।
दोहरी धोखाधड़ी: सब्सिडी और टैक्स छूट का खेल
अहमदाबाद की फर्म पर आरोप है कि उसने इस कोरियाई शेल कंपनी को आयात के ऑर्डर दिए। इसका मकसद ‘भारत-कोरिया व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) के तहत ड्यूटी-फ्री (कर मुक्त) लाभ उठाना था।
वहीं दूसरी ओर, छोटे व्यवसायों के लिए दक्षिण कोरियाई सरकार द्वारा दी जाने वाली निर्यात सब्सिडी (Export Subsidy) का भी गलत फायदा उठाया गया। इसके लिए चीनी सामान को कोरिया के रास्ते भारत भेजा गया और कागजों पर इसे ‘कोरियाई मूल का निर्यात’ दर्शाया गया।
यह पूरा खेल मध्य-2024 से मध्य-2025 के बीच बेरोकटोक चलता रहा। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब कोरियाई अधिकारियों ने नोटिस किया कि एक नई बनी कंपनी, जिसके पास कोई दिखाई देने वाली उत्पादन क्षमता नहीं है, उसे हर महीने हजारों डॉलर के निर्यात ऑर्डर मिल रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया, “निर्यात ऑर्डरों की असामान्य रूप से अधिक मात्रा ने संदेह पैदा किया। हमारी जांच में पुष्टि हुई कि वहां कोई विनिर्माण इकाई नहीं थी, जिसके बाद कंपनी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए।”
मनी लॉन्ड्रिंग और सोलर इनवर्टर के नाम पर फर्जीवाड़ा
जांचकर्ताओं का आरोप है कि फंड को चीन और हांगकांग भेजने के लिए इनवॉइस (बिल) की रकम को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। टर्नओवर को कृत्रिम रूप से बढ़ाने और बैंक लोन की पात्रता हासिल करने के लिए गुजरात में कई अन्य संस्थाएं बनाकर ‘सर्कुलर ट्रेडिंग’ की गई। साथ ही, भारत में कस्टम ड्यूटी से बचने के लिए आयातित सामानों का गलत वर्गीकरण (Misclassification) भी किया गया।
हैरान करने वाली बात यह है कि गुजरात में जिस कंपनी के पास सोलर इनवर्टर बनाने का लाइसेंस था, निरीक्षण के दौरान वहां केवल एक ऑफिस मिला। मौके पर कोई भी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी मौजूद नहीं थी। आरोप है कि सहयोगी फर्मों के जरिए तैयार माल आयात किया जाता था और यहां उस पर स्थानीय लेबल लगाकर भारतीय उत्पाद के रूप में बेचा जाता था।
कोत्रा ने भारतीय एजेंसियों को सौंपे सबूत
KOTRA के अधिकारियों ने इस घटना पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि 2019 में राज्य में परिचालन शुरू करने के बाद से गुजरात की कंपनियों के साथ उनका अनुभव सकारात्मक रहा था, लेकिन इस वाकये ने उन्हें झटका दिया है। एक अधिकारी ने स्पष्ट किया, “हमने मामले की गहन जांच की है और उचित कार्रवाई के लिए सभी प्रासंगिक निष्कर्ष भारतीय अधिकारियों के साथ साझा कर दिए हैं।”
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