अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब पश्चिमी एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले चुका है। इस तनाव का सीधा असर उत्तरी गुजरात के लोगों पर भी पड़ रहा है। राज्य के मेहसाणा और पाटन क्षेत्र के 200 से अधिक मूल निवासी इस समय खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं। वहां व्यापारिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं, उड़ानें रोक दी गई हैं और यात्रा का खर्च अचानक आसमान छूने लगा है।
इस मुश्किल हालात में फंसे लोगों में अल्पेश कुमार पटेल और उनके दो भतीजे, योगेश और पार्थ कुमार पटेल भी शामिल हैं। अल्पेश और योगेश मेहसाणा जिले के रहने वाले हैं, जबकि पार्थ पड़ोसी जिले पाटन से ताल्लुक रखते हैं। ये तीनों तेल, गैस और कबाड़ (स्क्रैप मेटल) से जुड़े एक व्यापारिक दौरे के सिलसिले में 25 फरवरी को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंचे थे।
लेकिन 28 फरवरी को जब युद्ध के हालात बिगड़े, तो उनकी सारी योजनाएं धरी की धरी रह गईं। फिलहाल वे बर दुबई के एक होटल में रुकने को मजबूर हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान अल्पेश ने बताया कि भले ही बाहर का माहौल सामान्य दिख रहा हो, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि भोजन करने के अलावा किसी और काम के लिए होटल से बाहर न निकलें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दुबई के ही एक पास वाले होटल में गुजरात के करीब 50 अन्य लोग भी फंसे हुए हैं।
उनका व्यापारिक दौरा भी पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। वे काम जल्दी खत्म करके वापस लौटने की सोच रहे थे, लेकिन मौजूदा हालात के कारण वे शारजाह, रास अल-खैमाह या अबू धाबी की यात्रा नहीं कर सके, जहां उन्हें अपने व्यापार के सिलसिले में जाना था।
हवाई क्षेत्र बंद होने की वजह से इन लोगों के लिए घर वापसी अब एक बड़ी आर्थिक और लॉजिस्टिक चुनौती बन गई है। अल्पेश और उनके एक भतीजे की वापसी की फ्लाइट 10 मार्च की है, जबकि उनके दूसरे भतीजे को 5 मार्च को लौटना था। उन्होंने शुरुआत में आने-जाने का टिकट 28,000 रुपये में बुक किया था। लेकिन अब आपातकालीन स्थिति में वन-वे (एक तरफा) टिकट का किराया बढ़कर 1 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक पहुंच गया है।
अल्पेश ने अपनी परेशानी जाहिर करते हुए कहा कि दुबई का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण वहां से कोई उड़ान नहीं मिल रही है। ऐसे में उन्हें वापसी के लिए पहले ओमान जाना होगा और फिर मस्कट से फ्लाइट लेनी होगी। इसके लिए ओमान का वीजा भी लेना पड़ेगा, जो इस पूरी प्रक्रिया को और भी जटिल बना देता है। भविष्य की चिंताओं को देखते हुए उन्होंने 10 मार्च तक अपने होटल का एडवांस पेमेंट कर दिया है।
इसके साथ ही, एहतियात के तौर पर उन्होंने 2-3 दिन का राशन भी जमा कर लिया है ताकि हालात बिगड़ने पर उन्हें भूखा न रहना पड़े। जब उन्होंने दुबई स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि सभी ताज़ा अपडेट दूतावास के सोशल मीडिया हैंडल के जरिए दिए जाएंगे।
खाड़ी क्षेत्र में फंसे मेहसाणा के लोगों की मदद के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास तेज हो गए हैं। गुजरात से राज्यसभा सांसद और मेहसाणा के मूल निवासी मयंक नायक ने एक विशेष हेल्पलाइन शुरू की है। पटेल समुदाय के कई लोगों ने मदद के लिए उनसे संपर्क किया है।
अल्पेश ने बताया कि सांसद नायक ने खुद उन्हें वीडियो कॉल करके हालात का जायजा लिया और उनकी पूरी जानकारी दर्ज की। सांसद नायक के अनुसार, खाड़ी देशों में फंसे लगभग 250 लोगों ने उनकी हेल्पलाइन पर संपर्क किया है। इन सभी का विवरण विदेश मंत्रालय के ‘मदद पोर्टल’ (Madad portal) पर जमा कर दिया गया है।
इसके अलावा, वडोदरा के सांसद हेमांग जोशी और गुजरात भाजपा ने भी इस संकट के कारण फंसे हुए राज्य के लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
यह भी पढ़ें-











