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गुजरात राज्यसभा चुनाव: इतिहास रचने की दहलीज पर बीजेपी, 66 सालों में पहली बार ‘शून्य’ पर सिमट जाएगी कांग्रेस!

| Updated: June 8, 2026 09:11

18 जून को होने वाले गुजरात राज्यसभा चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी की एकतरफा जीत लगभग तय है। इस चुनाव के साथ ही राज्य के 66 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में पहली बार उच्च सदन से कांग्रेस का सूपड़ा साफ होने जा रहा है।

गुजरात में आगामी 18 जून को राज्यसभा की चार सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इन चारों सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज करने की तैयारी में है। इस चुनाव के बाद राज्य से उच्च सदन में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त होने की संभावना है।

गुजरात से कांग्रेस के एकमात्र राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही राज्य के इतिहास में पिछले 66 वर्षों में यह पहला मौका होगा, जब देश के इस पश्चिमी राज्य से संसद के उच्च सदन में कांग्रेस का एक भी सदस्य मौजूद नहीं रहेगा।

साल 1960 में पहली बार गुजरात से कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं को राज्यसभा के लिए नामित किया गया था, जिनमें खेमचंदभाई चावड़ा और सुरेश जे. देसाई के नाम प्रमुख थे। मई 1960 से पहले, पूर्ववर्ती बॉम्बे राज्य के गुजराती भाषी क्षेत्रों के नेताओं (जैसे नानाभाई शाह) को संयुक्त बॉम्बे राज्य के प्रतिनिधियों के रूप में उच्च सदन के लिए चुना जाता था।

वर्तमान में गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं, जिनमें से बीजेपी के पास 161 विधायकों का रिकॉर्ड बहुमत है। शक्तिसिंह गोहिल के अलावा बीजेपी के तीन अन्य सांसदों रंभाभाई मोकारिया, नरहरि अमीन और रमीलाबेन बारा का कार्यकाल भी 21 जून को खत्म हो रहा है। ये चारों नेता साल 2020 में राज्यसभा पहुंचे थे।

निर्वाचन आयोग ने 1 जून को इन चार सीटों के लिए अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है। गुजरात की कुल 11 राज्यसभा सीटों में से फिलहाल 10 पर बीजेपी का कब्जा है, जिनमें केंद्रीय मंत्री एस. जयशंकर और जे.पी. नड्डा भी शामिल हैं।

राज्यसभा चुनाव के नियमों के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 46 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी, बशर्ते सभी सदस्य उपस्थित होकर मतदान करें। इसके अलावा, नामांकन दाखिल करने के लिए भी प्रस्तावक के रूप में कम से कम 10 विधायकों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं।

संख्या बल के लिहाज से गुजरात विधानसभा में वर्तमान में कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक हैं, जो उसके इतिहास का सबसे निचला स्तर है। आम आदमी पार्टी (आप) के पास 5 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी का 1 सदस्य है। सदन में दो निर्दलीय विधायक भी हैं, जो सत्ताधारी बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं।

विधायकों की कम संख्या के कारण आम आदमी पार्टी के पास प्रस्तावक के रूप में भी जरूरी संख्या नहीं है। ऐसे में केवल बीजेपी ही स्पष्ट रूप से जीत दर्ज करने की स्थिति में है। बीजेपी ने इस चुनाव के लिए राजू शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेश राठवा और जितेंद्र कजारिया को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने स्वीकार किया है कि पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है और अभी तक उम्मीदवार उतारने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि कमजोर स्थिति को देखते हुए पार्टी चुनाव न लड़ने का मन बना सकती है।

सदन में प्रतिनिधित्व शून्य होने के सवाल पर कांग्रेस का कहना है कि सीटों की संख्या से ज्यादा जरूरी जनता के मुद्दों को उठाना है। मनीष दोषी के अनुसार, शक्तिसिंह गोहिल ने हमेशा गुजरात के हितों की पुरजोर वकालत की है, और यदि चुनकर जाने वाले प्रतिनिधि राज्य की बुनियादी समस्याओं को नहीं उठाएंगे, तो उनके होने का कोई लाभ नहीं होगा।

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