राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे उग्र प्रदर्शनों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत डिपके को टाइफाइड हो गया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान पद नहीं छोड़ते, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।
शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास हालात तब बेकाबू हो गए जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच ताजा झड़प हुई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इस हिंसक टकराव में कई लोगों के घायल होने की खबर है। पुलिस की इस कार्रवाई के शिकार हुए लोगों के समर्थन में सीजेपी ने रविवार को कैंडल लाइट मार्च निकालने का ऐलान किया है।
पेपर लीक का यह विरोध केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। रविवार को बिहार के कम से कम तीन जिलों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। इसी कड़ी में विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे जेजेडी प्रमुख और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इससे पहले शनिवार को ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस वार्ता के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि कैबिनेट फेरबदल की आड़ में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश की जा रही है। इस रवैये को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सुलह की कोशिशें भी लगातार चल रही हैं। सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार को सरकार के साथ हुई बैठक काफी हद तक सकारात्मक रही। उन्होंने कहा कि मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांगों पर अच्छी प्रगति हुई है। हालांकि, रांका ने चेतावनी भी दी कि अगर शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सरकार को यह बात साफ तौर पर बता देनी चाहिए क्योंकि इसके बिना आगे की बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
इन विरोध प्रदर्शनों के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर जनता का आभार जताया। दरअसल, प्रधानमंत्री ने पेपर लीक मामलों में शामिल दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए एक सख्त कानून लाने की घोषणा की थी, जिस पर लोगों ने अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दी थीं। पीएम मोदी ने बताया कि संसद के आगामी सत्र में ही अगले सप्ताह इस संबंध में एक नया और कड़ा बिल पेश किया जाएगा।
केंद्रीय कैबिनेट ने इस मसौदे को अपनी मंजूरी भी दे दी है। संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन को हरी झंडी दिखाई गई। इस नए ड्राफ्ट बिल के तहत पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की जेल के साथ-साथ 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।
फिलहाल, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश भर के साथ-साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लगातार जारी हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इसके मद्देनजर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे प्रभावित इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें और वैकल्पिक मार्गों का ही इस्तेमाल करें।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पत्र का पूरा मजमून कुछ इस प्रकार है:
मेरे युवा साथियों,
बीते चार दशकों से भी अधिक समय से मैं छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के प्रति पूरी तरह समर्पित रहा हूं। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि केवल एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही किसी सशक्त राष्ट्र की नींव रख सकती है।
मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी उचित अपेक्षाओं का गहराई से सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन का एक नैतिक संकल्प रहा है। मैं माननीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश की सेवा करने का अवसर प्राप्त होने के लिए उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं।
हालांकि, 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में एक अनियमितता सामने आई और उसका पता चला। भारत सरकार ने तुरंत इसका संज्ञान लेते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी, परीक्षा रद्द कर दी और पुन: परीक्षा की तारीख की घोषणा भी कर दी गई। इसके साथ ही यह अहम फैसला भी लिया गया कि अगले साल से यह परीक्षा सीबीटी (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) मोड में आयोजित की जाएगी।
इस पूरी अवधि के दौरान हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता यही थी कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से संपन्न हो। इसके लिए पूरे सरकारी तंत्र ने एक साथ मिलकर काम किया। इसमें भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों और विशेषकर जिला प्रशासनों ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्रों, उनके अभिभावकों और माता-पिता के सहयोग से अंततः 21 जून 2026 को यह परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई।
मैंने पहले ही दिन से इस स्थिति की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली और कभी भी हालात से मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह दृढ़ संकल्प था कि हम परीक्षा माफियाओं के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे और किसी भी विद्यार्थी के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
16 जुलाई को घोषित हुए नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिनमें गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले कई मेधावी छात्रों ने भी सफलता का परचम लहराया।
लेकिन इस दौरान भी, जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने बाधाएं उत्पन्न करने और कई छात्रों को गुमराह करने का निरंतर प्रयास किया, जिससे मेरे हृदय को गहरी ठेस पहुंची।
मैं उन लोगों में से हूं जिनका हमारे लोकतंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास है, और मैंने हमेशा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और उनकी उम्मीदों का दिल से सम्मान किया है। वे न केवल भारत का भविष्य हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के संवाहक, निर्माता और वास्तुकार भी हैं।
पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम को देखकर मेरा मन बेहद दुखी है। मेरे लिए यह किसी भी तरह से व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।
भारत की युवा शक्ति ही इस देश की असली ताकत है। हम देश की इस युवा शक्ति को भ्रम के किसी भी दुष्चक्र में नहीं फंसने देंगे, यही मेरा अटल संकल्प है।
जंतर-मंतर और देशभर में उत्पन्न हुई इस स्थिति का कोई भी राष्ट्रविरोधी ताकत फायदा न उठा सके, देश की एकता हर हाल में अखंड रहे, भारत के एक भी छात्र का भविष्य कानूनी पचड़ों में न उलझे, और हमारे बच्चे अपना पूरा समय अपनी पढ़ाई और अपना करियर बनाने में लगा सकें—इन्हीं सब बातों पर गहराई से विचार करते हुए मैंने अपना इस्तीफा माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।
मैं माननीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन, मुझ पर उनके विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इसके साथ ही, मैं मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों व कर्मचारियों और उन सभी व्यक्तियों का भी धन्यवाद करता हूं जिनके साथ मुझे काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्र की सेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मैं हमेशा इसके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहूंगा।
भगवान श्री जगन्नाथ जी के आशीर्वाद से, मैं भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव तरीके से खुद को समर्पित रखूंगा।
आपका, धर्मेंद्र प्रधान
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