भुवनेश्वर के प्रसिद्ध नंदनकानन प्राणी उद्यान में घूमने आने वाले तमाम दर्शक इस बात से पूरी तरह अनजान हैं कि यहां के बंद दरवाजों के पीछे एक बेहद अद्भुत कहानी आकार ले रही है। आम लोगों की नजरों से दूर, हाल ही में रेस्क्यू किए गए पांच नन्हें ओरांगुटान एक खास तरह से डिजाइन की गई वातानुकूलित नर्सरी में धीरे-धीरे अपनी सेहत में सुधार ला रहे हैं। यहां समर्पित देखभाल करने वालों की टीम उनकी सेहत और आत्मविश्वास को वापस लाने के लिए दिन-रात अथक मेहनत कर रही है।
बेहद नाटकीय परिस्थितियों में बचाए गए इन छोटे प्राइमेट्स को मंगलवार रात नंदनकानन चिड़ियाघर लाया गया था। फिलहाल इन्हें चिड़ियाघर के हैंड रियरिंग सेंटर (एचआरसी) में रखा गया है, जो अंदरूनी गेट से बाईं ओर लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित एक प्रतिबंधित इलाका है।
यह पूरा क्षेत्र आम दर्शकों के लिए पूरी तरह से वर्जित है और सुरक्षाकर्मी यहां लगातार कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। प्रशिक्षित कर्मचारी तीन शिफ्टों में इन जीवों की बारीकी से देखभाल कर रहे हैं।
इस वातानुकूलित बाड़े के अंदर का माहौल उस खौफ और अनिश्चितता से बिल्कुल अलग है, जिसका सामना इन नन्हें जीवों ने कुछ ही समय पहले किया था।
अब ये ओरांगुटान अपना पूरा दिन झूलों पर लटकने, एक-दूसरे के साथ खेलने और रखवालों की चौकस निगाहों के बीच फॉर्मूला दूध पीने में बिताते हैं। इस नर्सरी को इस तरह से तैयार किया गया है ताकि सदमे से गुजरे इन जानवरों को पूरा आराम मिले और वे अपने नए माहौल में आसानी से ढल सकें।
एचआरसी चिड़ियाघर के अस्पताल के ठीक बगल में मौजूद है, जिससे पशु चिकित्सकों को इनकी सेहत की नियमित जांच करने में काफी आसानी होती है। नंदनकानन के उप निदेशक प्रदीप मिरासे के मुताबिक, इन जीवों की डाइट और मेडिकल केयर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मिरासे ने बताया कि इन्हें हर तीन घंटे में उबला और मैश किया हुआ आलू, केला, सेब और फॉर्मूला दूध दिया जा रहा है। इस डाइट प्लान के लिए मैसूर चिड़ियाघर के विशेषज्ञों से भी जरूरी मदद ली जा रही है।
इन जीवों को एक आरामदायक प्राकृतिक माहौल देने के लिए बाड़े का तापमान दिन भर 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच सेट रखा जाता है। कमरे में ताजी हवा आने देने के लिए समय-समय पर थोड़ी देर के लिए खिड़कियां भी खोली जाती हैं।
अधिकारियों के अनुसार, यहां लाए जाने के तुरंत बाद दो ओरांगुटान को बुखार हो गया था, लेकिन अब उनकी हालत में काफी सुधार है। इसके अलावा, बेहतर पशु चिकित्सा मार्गदर्शन और स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र के विशेषज्ञों से भी लगातार सलाह ली जा रही है।
राहत की बात यह है कि इन जीवों की रिकवरी के सकारात्मक संकेत अब साफ नजर आने लगे हैं। उप निदेशक ने बताया कि जब ये ओरांगुटान पहली बार यहां पहुंचे थे, तो अत्यधिक तनाव और घबराहट की वजह से वे लगातार एक-दूसरे से चिपके रहते थे।
हालांकि, लगभग 72 घंटों के भीतर ही उन्होंने सामान्य व्यवहार करना शुरू कर दिया। अब वे कुछ समय के लिए अकेले छोड़े जाने पर भी पूरी तरह सहज रहते हैं, जो उनके कम होते तनाव का सीधा संकेत है।
इनकी सटीक प्रजाति का वैज्ञानिक रूप से पता लगाने के लिए 10 दिनों के बाद मॉलिक्यूलर टेस्टिंग (आणविक परीक्षण) के वास्ते उनके खून के नमूने लिए जाएंगे। इस बीच, चिड़ियाघर में आने वाले दर्शकों की उत्सुकता भी लगातार बढ़ती जा रही है।
कई दर्शक कर्मचारियों से इन नए मेहमानों के बारे में सवाल पूछ रहे हैं और इंसान जैसे दिखने वाले इन जीवों की एक झलक पाने को बेताब हैं। अपने माता-पिता के साथ चिड़ियाघर घूमने आईं एक छात्रा सुमित्रा राउत ने कहा कि उन्होंने बेबी ओरांगुटान के आने की खबर सुनी थी और वे उन्हें देखने के लिए बेहद उत्सुक थीं, लेकिन वहां सभी के लिए पाबंदी होने की वजह से उन्हें बिना देखे ही लौटना पड़ा।
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