दुनिया भर के शैक्षणिक परिसरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस स्मार्ट चश्मों के जरिए परीक्षाओं में नकल करने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। भारत में भी इस नई तकनीक का गलत इस्तेमाल शुरू हो चुका है। सूरत के वराछा इलाके में स्थित एक कॉलेज में बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) के प्रथम वर्ष के एक छात्र को एआई स्मार्ट चश्मे की मदद से नकल करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस गंभीर कृत्य के लिए उस छात्र पर एक साल तक उस विषय की परीक्षा देने से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
यह घटना इसी साल मार्च-अप्रैल में आयोजित परीक्षाओं के दौरान घटी थी। हालांकि, यह मामला लगभग एक सप्ताह पहले ही सार्वजनिक हुआ, जब उक्त छात्र कॉलेज प्रशासन के समक्ष सुनवाई के लिए पेश हुआ। वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय (VNSGU) से संबद्ध इस कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि छात्र ने एआई चश्मे से नकल के प्रयास की बात कबूल कर ली है और उस पर जुर्माना भी लगाया गया है।
वर्तमान में दक्षिण कोरिया, ताइवान, चीन, यूके और अमेरिका जैसे देशों में परीक्षाओं के दौरान इस तरह के स्मार्ट चश्मे का इस्तेमाल एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। दुनिया भर के विश्वविद्यालय और सरकारी शिक्षा प्राधिकरण इस क्रांतिकारी तकनीक से निपटने के तरीके खोजने में लगे हुए हैं।
पुणे में भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
सूरत में सामने आई स्मार्ट चश्मे से जुड़ी यह घटना पूरे गुजरात में अपनी तरह का पहला मामला है। लेकिन भारत में इससे पहले भी ऐसी घटना घट चुकी है। पुणे के सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में 19 मई को आयोजित एक परीक्षा के दौरान दो इंजीनियरिंग छात्र रे-बैन मेटा (Ray-Ban Meta) स्मार्ट चश्मे पहने पाए गए थे।
सिम्बायोसिस के एक अधिकारी ने तब स्पष्ट किया था कि ऐसे चश्मे पहनने की अनुमति बिल्कुल नहीं है क्योंकि इनका उपयोग चैटजीपीटी (ChatGPT) चलाने या तस्वीरें खींचने के लिए किया जा सकता है। हालांकि उस वक्त छात्रों को नकल करते हुए नहीं पकड़ा गया था, लेकिन उन्हें तुरंत उस परीक्षा से बाहर कर दिया गया था।
सूरत के मामले में, विश्वविद्यालय के एंटी-चीटिंग ‘फ्लाइंग स्क्वॉड’ ने छात्र को अपने पढ़ने वाले चश्मे को असामान्य तरीके से छूते हुए देखा। जांच करने पर अधिकारियों को तुरंत समझ आ गया कि वे सामान्य चश्मे नहीं, बल्कि एआई-सक्षम मेटा चश्मे थे। इसके बाद छात्र को कॉलेज के प्रिंसिपल और प्रोफेसरों की मौजूदगी में दूसरे कमरे में ले जाकर पूछताछ की गई।
वहां छात्र ने शिक्षकों और प्रशासकों को खुद दिखाया कि यह चश्मा कैसे काम करता है। चश्मे के कैमरे ने प्रश्न पत्र की तस्वीर खींची और फिर एआई ने उसका उत्तर तैयार कर दिया। इन उत्तरों को छात्र चश्मे में लगे ओपन-ईयर स्पीकर के जरिए आसानी से सुन सकता था। प्रिंसिपल ने तुरंत चश्मा जब्त कर लिया और छात्र से लिखित माफीनामा लिया गया।
कॉलेज के एक प्रोफेसर के अनुसार, छात्र के माता-पिता को बुलाकर उन पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। लगभग 35,000 रुपये की कीमत वाला यह स्मार्ट चश्मा जुर्माना चुकाने के बाद छात्र को वापस कर दिया गया। VNSGU के कुलपति डॉ. के. एन. चावड़ा ने भी पुष्टि की है कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है।
कैसे काम करते हैं ये स्मार्ट चश्मे?
रे-बैन मेटा, रोकिड, या इवेन रियलिटीज जी1 जैसे स्मार्ट चश्मे कई हाई-टेक पुर्जों को मिलाकर बनाए जाते हैं। ये देखने में एकदम साधारण चश्मे जैसे लगते हैं। मेटा के एआई-सक्षम चश्मे 2023 के अंत में बाजार में आए थे। कंपनी ने वर्ष 2025 में ऐसे चश्मों की लगभग 7 मिलियन जोड़ियां बेचीं।
ये चश्मे आम धूप के चश्मे या प्रिस्क्रिप्शन चश्मे जैसे दिखते हैं, लेकिन इनके फ्रेम के अंदर छोटे स्पीकर, माइक्रोफोन, एक बेहद हल्का कैमरा और कभी-कभी एक छोटा डिस्प्ले भी लगा होता है। फ्रेम में लगे कैमरे पहनने वाले की नजरों के सामने मौजूद किसी भी चीज की तस्वीर या वीडियो ले सकते हैं।
इनमें बोन-कंडक्शन तकनीक का उपयोग होता है, जिससे ध्वनि तरंगें सीधे खोपड़ी की हड्डियों के माध्यम से आंतरिक कान तक पहुंचती हैं। इसका फायदा यह होता है कि ऑडियो केवल चश्मा पहनने वाले को ही सुनाई देता है, बाहर किसी को नहीं। डिस्प्ले वाले मॉडल में एक छोटा प्रोजेक्टर लेंस पर टेक्स्ट और इमेज दिखाता है।
ये चश्मे ब्लूटूथ या वाईफाई के जरिए सीधे फोन या इंटरनेट से जुड़ जाते हैं। खींची गई तस्वीर या रिकॉर्ड किया गया ऑडियो तुरंत जीपीटी-4ओ (GPT-4o) या जेमिनी (Gemini) जैसे उन्नत एआई मॉडल को भेजा जाता है। यह मॉडल उसे प्रोसेस करके 30 सेकंड से भी कम समय में जवाब भेज देता है। चूंकि इसमें कोई फोन, स्क्रीन या बाहर सुनाई देने वाली आवाज नहीं होती, इसलिए निरीक्षकों के लिए इसे पकड़ना बहुत मुश्किल होता है।
भारत और दुनिया भर में कड़े हो रहे नियम
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल के मामले भारत में नए नहीं हैं। सितंबर 2021 में राजस्थान पात्रता परीक्षा (REET) के दौरान एक उम्मीदवार ने ब्लूटूथ डिवाइस छिपी हुई चप्पलें पहनी थीं। लेकिन इस साल पुणे और सूरत में स्मार्ट चश्मे का इस्तेमाल तकनीक के जरिए नकल के एक बिल्कुल नए और उन्नत स्तर को दर्शाता है।
इस साल फरवरी में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों को ‘जैमर गाइडलाइंस’ जारी की थीं, जो उन्हें दिसंबर 2025 में कैबिनेट सचिवालय से प्राप्त हुई थीं। इन गाइडलाइंस के तहत मान्यता प्राप्त परीक्षा निकायों को नकल रोकने के लिए कम शक्ति वाले जैमर तैनात करने की अनुमति दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति गंभीर है। जून 2026 की एक रिपोर्ट में बताया गया कि परीक्षाओं को लेकर जुनूनी माने जाने वाले एशियाई देशों में एआई चश्मे से नकल के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दक्षिण कोरिया में अंग्रेजी दक्षता परीक्षा और ताइवान में मेडिकल प्रवेश परीक्षा में भी छात्रों को इस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया है।
चीन ने जून में आयोजित होने वाली अपनी बेहद महत्वपूर्ण ‘गाओकाओ’ कॉलेज प्रवेश परीक्षा से पहले स्मार्ट चश्मों की जांच के लिए सख्त निर्देश जारी किए थे। अमेरिका में भी एसएटी (SAT) परीक्षा आयोजित करने वाले कॉलेज बोर्ड ने स्मार्ट चश्मे पर प्रतिबंध लगा दिया है। यूके में परीक्षा वॉचडॉग ऑफक्वाल (Ofqual) के प्रमुख सर इयान बॉकम ने चेतावनी दी है कि एआई चश्मे और इयरपीस जैसे स्मार्ट उपकरण परीक्षाओं में नकल की समस्या को और बदतर बना सकते हैं।
यह भी पढ़ें-
मौत के मुंह से निकाले गए 5 नन्हें ओरांगुटान को ऐसे मिल रही है नई जिंदगी
क्या ‘हनुमान अंश’ के सीक्वल में नजर आएंगे नीम करोली बाबा के भक्त अनुष्का, विराट और जूलिया रॉबर्ट्स?











