अहमदाबाद ने अक्टूबर 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के शताब्दी संस्करण की मेजबानी के लिए उल्टी गिनती शुरू कर दी है। इसके साथ ही शहर में विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। इसी दिशा में ‘सेप्ट यूनिवर्सिटी’ (Cept University) के छात्रों की एक हालिया स्टडी सामने आई है। इस स्टडी में गेम्स के लिए जरूरी सुविधाओं के विकास और आयोजन के बाद उनके बेहतरीन इस्तेमाल का पूरा रोडमैप तैयार किया गया है।
‘इनेबलिंग हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, एंड मोबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर सीडब्ल्यूजी इन अहमदाबाद’ नामक इस रिसर्च को ‘मास्टर्स इन अर्बन हाउसिंग’ (MUH) के छात्र प्रगति मंजूनाथ और हर्ष शाह ने तैयार किया है। इस अहम स्टडी में मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की गई है। इस पूरी रिसर्च को फैकल्टी मेंबर सेजल पटेल और अमृता पटेल के साथ-साथ टीचिंग असिस्टेंट विधि मेहता के मार्गदर्शन में पूरा किया गया है।
प्रोफेसर सेजल पटेल का मानना है कि शहर के बुनियादी ढांचे की योजना के साथ-साथ हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होटलों और आतिथ्य सुविधाओं के विकास को आसान व आकर्षक बनाने के लिए नई नीतियों की आवश्यकता होगी। इसे फाइनेंसिंग, टैक्स इंसेंटिव और बेहतर प्लानिंग के जरिए ही अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
इस रिसर्च के अनुसार, बड़े खेल आयोजनों को हमेशा शहरी विकास की एक व्यापक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए। विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्टडी में मुख्य रूप से पांच जोन्स का सुझाव दिया गया है। इनमें स्टेडियम-मोटेरा कॉरिडोर, एसजी हाईवे-प्रह्लादनगर, गिफ्ट सिटी का विस्तार, धोलेरा एसआईआर (Dholera SIR) फेज-2 और हेरिटेज वॉल्ड सिटी शामिल हैं। इन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके शहर के विकास को नई ऊंचाई दी जा सकती है।
फंडिंग और वित्तीय मॉडल तैयार करने के लिए प्रगति और हर्ष ने दुनिया भर के सफल उदाहरणों का अध्ययन किया है। उन्होंने सिंगापुर के हॉस्पिटैलिटी ट्रस्ट मॉडल को एक बेहतरीन विकल्प बताया है। इसके अलावा, वेन्यू कॉरिडोर के पास 30 प्रतिशत ‘लैंड अप्रिसिएशन टैक्स’ और खेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में राजस्व जमा करने के दुबई के टिकाऊ मॉडल की भी वकालत की गई है। इस स्टडी में 2020 टोक्यो ओलंपिक की तर्ज पर पीपीपी (PPP) फाइनेंसिंग का भी सुझाव दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि खेलों के बाद इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का क्या होगा। इस पर रिसर्च सुझाती है कि इन सुविधाओं का इस्तेमाल गांधीनगर के पास ‘नॉलेज कॉरिडोर’ में एजुकेशनल हाउसिंग के लिए किया जा सकता है, क्योंकि वहां कई प्रमुख शिक्षण संस्थान मौजूद हैं। इसके अलावा, प्राइवेट कंपनियों और एग्रीगेटर्स द्वारा इसे किराये के आवास के रूप में भी संचालित किया जा सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अहमदाबाद की ‘लिगेसी स्ट्रेटजी’ मुख्य रूप से चार स्तंभों पर टिकी होनी चाहिए। इनमें साल भर उपयोग में आने वाले मल्टी-फंक्शनल वेन्यू, खेलों के बाद की लागत घटाने के लिए मॉड्यूलर डिजाइन, शहर के सक्रिय हिस्सों के साथ मजबूत शहरी एकीकरण और संचालन का बोझ कम करने के लिए स्मार्ट एसेट मैनेजमेंट शामिल हैं।
लंबी अवधि की सफलता के लिए संस्थागत निगरानी और राजस्व उत्पन्न करने वाले ढांचों के बीच तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है, ताकि ये संपत्तियां खुद का खर्च उठा सकें और व्यापक शहरी समृद्धि का कारण बन सकें।
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