जामनगर: विश्व स्तरीय पशु कल्याण और संरक्षण संस्था ‘वंतारा’ ने आज अपनी नवनियुक्त स्वतंत्र गवर्निंग काउंसिल (शासी परिषद) के पूर्ण सदस्यों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह विशेष परिषद वंतारा के संरक्षण, रेस्क्यू और अनुपालन कार्यों की निगरानी करेगी। साथ ही, भविष्य में जंगली जानवरों के आयात से जुड़े किसी भी आवेदन पर अंतिम निर्णय लेने और अगले पांच वर्षों व उसके बाद के लिए संस्था का विजन तय करने का अहम जिम्मा इसी परिषद के पास होगा।
पांच सदस्यों और एक पदेन (ex officio) सदस्य वाली इस ऐतिहासिक परिषद में वन्यजीव नीति, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कानून, पशु चिकित्सा, मानव-वन्यजीव संघर्ष और संस्थागत निगरानी के शीर्ष भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। साइट्स (CITES) के पूर्व महासचिव और प्रख्यात पर्यावरणविद् जॉन ई. स्कैनलॉन एओ इस परिषद के स्वतंत्र अध्यक्ष होंगे।
उनकी नियुक्ति की घोषणा अगस्त 2026 में की गई थी। सभी सदस्य अपनी व्यक्तिगत और स्वतंत्र क्षमता में कार्य करेंगे और वंतारा का कोई भी कर्मचारी इसमें वोटिंग सदस्य नहीं हो सकता।
अध्यक्ष जॉन ई. स्कैनलॉन के नेतृत्व वाली इस परिषद में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी शामिल हैं, जिनके पास कानून और संस्थागत निगरानी का व्यापक अनुभव है।
इनके अलावा, एसोसिएशन ऑफ जू एंड एक्वेरियम (AZA) के कार्यकारी उपाध्यक्ष क्रेग हूवर (जो अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा कर जनवरी 2027 से जुड़ेंगे), भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और कर्नाटक के पूर्व मुख्य वन्यजीव वार्डन सुभाष के. मलखेड़े, तथा अफ़्रीका में काम कर चुकीं इथियोपियाई-इतालवी संरक्षण विशेषज्ञ ग्रेटा एफ. इओरी को परिषद का अहम हिस्सा बनाया गया है।
प्रख्यात भारतीय वन्यजीव पशुचिकित्सक और हाथी विशेषज्ञ डॉ. कुशल कोंवर सरमा एक पदेन (गैर-मतदान) सदस्य के रूप में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेंगे।
वंतारा के सीईओ विवान करानी ने परिषद के सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि विज्ञान आधारित संरक्षण को आगे बढ़ाने और संस्था में उच्चतम मानक सुनिश्चित करने में यह परिषद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
करानी ने स्पष्ट किया कि परिषद का स्वतंत्र अधिकार उनके प्रयासों के केंद्र में है और इससे संस्था के निर्णयों की सख्त और स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित होगी। वहीं, गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष जॉन स्कैनलॉन ने कहा कि यह एक असाधारण टीम है जो भारत और दुनिया भर की गहरी विशेषज्ञता का बेजोड़ संगम है।
गवर्निंग काउंसिल अब वंतारा की सर्वोच्च शासी इकाई बन गई है। वंतारा के हालिया सुधारों के तहत यह कड़ा नियम लागू किया गया है कि 5 जून 2027 से पहले किसी भी जानवर को आयात करने का कोई आवेदन नहीं किया जाएगा। इस अवधि के बाद भी, कोई भी आवेदन परिषद की पूर्व लिखित मंजूरी और सख्त आंतरिक जांच के बिना आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा।
यह परिषद 19 अगस्त 2026 को भारतीय साइट्स (CITES) प्रबंधन प्राधिकरण को दिए गए वंतारा के वचनों के पूर्ण कार्यान्वयन की निरंतर समीक्षा करेगी। इस कार्य में परिषद को नई साइट्स ड्यू डिलिजेंस कमेटी, एडवाइजरी बोर्ड और ऑफिस ऑफ कंप्लायंस का पूरा समर्थन मिलेगा।
वंतारा ने संरक्षण समुदाय के साथ संवाद और जुड़ाव को और गहरा करने की दृढ़ प्रतिबद्धता भी जताई है। परिषद जमीनी स्तर पर काम कर रहे विशेषज्ञों के साथ विचारों और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक निरंतर संवाद तंत्र स्थापित करेगी।
गुजरात स्थित यह विश्व-प्रसिद्ध गैर-लाभकारी संस्था अपने उन्नत चिकित्सा तंत्र के जरिए वन्यजीवों के रेस्क्यू, पुनर्वास और लंबे समय तक देखभाल के लिए प्रतिबद्ध है। नई काउंसिल के गठन के साथ ही वंतारा का ध्यान अब पूरी तरह से भारत के भीतर रेस्क्यू और संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देने पर केंद्रित होगा।
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