अहमदाबाद के एक स्कूल में खाने की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायत ने अचानक एक बड़ा धार्मिक रूप ले लिया। यह विवाद पाकिस्तानी कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई की किताबों से शुरू होकर शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे एक रीडिंग सेशन (किताब पढ़ने के कार्यक्रम) पर हिंसक हमले तक पहुंच गया।
अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और थिएटर आर्टिस्ट सावन ज़ालरिया ने 27 अगस्त को हुई इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने उन पर लोहे और लकड़ी की रॉड से वार किया। शांति से बात करने की कोशिश करने के बावजूद उनके सिर, पीठ और कोहनी पर गंभीर चोटें पहुंचाई गईं।
यह ‘साइलेंट रीडिंग सेशन’ स्टूडेंट्स एंड यूथ कलेक्टिव, अहमदाबाद (SYCA) द्वारा वस्त्रापुर के औडा गार्डन में आयोजित किया गया था। आरोप है कि बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े कुछ लोग वहां पहुंचे। उन्होंने नारेबाजी की, सांप्रदायिक टिप्पणियां कीं और प्रतिभागियों पर हमला कर दिया।
आयोजकों के अनुसार, हमलावरों ने मलाला यूसुफजई की ‘आई एम मलाला’ और ऐनी फ्रैंक की ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ की प्रतियां फाड़ दीं। SYCA सदस्यों ने आरोप लगाया कि स्थिति हिंसक हो गई और कई प्रतिभागियों को लाठियों और रॉड से बुरी तरह पीटा गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन उस स्कूल के समर्थन में किया गया था, जिसे अपने रीडिंग प्रोग्राम में इन दोनों किताबों को शामिल करने के कारण भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में लगभग 40-50 लोग मौजूद थे, जबकि विरोध करने आए 30-40 लोगों के हाथों में बल्ले और लाठियां थीं और उन्होंने भगवा स्कार्फ पहने हुए थे।
पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसमें हिरेन रबारी और जिमित रबारी को नामजद किया गया है। SYCA सदस्यों का दावा है कि ये दोनों बजरंग दल के सदस्य हैं और भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। मौके पर मौजूद स्वतंत्र सलाहकार स्वाति गोस्वामी ने पुलिस को बुलाया था। उन्होंने बताया कि हिरेन रबारी सबसे ज्यादा बोल रहा था और उसने खुद सबके सामने अपनी पहचान उजागर की थी।
खुद को बजरंग दल का बताने वाले हिरेन रबारी ने इंस्टाग्राम पर घटना का एक वीडियो भी पोस्ट किया। उसने दावा किया कि जब बजरंग दल के कार्यकर्ता वहां पहुंचे, तो दूसरी तरफ के लोग उनके सवालों का जवाब नहीं दे सके। उसने आरोप लगाया कि उन लोगों ने बचने के लिए राष्ट्रगान का ढाल के रूप में इस्तेमाल किया और हिल-डुलकर उसका घोर अपमान किया। उसने यह भी कहा कि राष्ट्रगान के बाद वामपंथी या इस्लामी विचारधारा वाले किसी भी व्यक्ति ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे नहीं लगाए।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक धमकी, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, गैरकानूनी रूप से जमा होने और घातक हथियारों के साथ दंगा करने की धाराओं में मामला दर्ज किया है। वस्त्रापुर थाने के एसएचओ जी.एम. चौधरी ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें अब जमानत मिल गई है। पुलिस शिकायत में नामजद दोनों मुख्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
रीडिंग सेशन क्यों आयोजित किया गया था?
11 अगस्त को शिलाज स्थित आनंद निकेतन स्कूल के बाहर कई अभिभावक जमा हुए थे। यह हंगामा तब शुरू हुआ जब 8वीं कक्षा के एक छात्र के दोपहर के भोजन में कथित तौर पर एक कठोर वस्तु निकली। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्र भिंडी, दाल, रोटी और चावल खा रहा था, तभी उसने कुछ निगल लिया और बचा हुआ टुकड़ा अपने शिक्षक को दे दिया।
इसके बाद अहमदाबाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उन्होंने भोजन आपूर्ति करने वाली एजेंसी, स्कूल की फूड-सेफ्टी जांच, कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी। शिक्षा अधिकारी ने निरीक्षण का आदेश देते हुए सीसीटीवी फुटेज, बयानों और भोजन के नमूनों के आधार पर रिपोर्ट भी तलब की।
स्कूल प्रशासन ने तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने और अपनी फूड-सेफ्टी को मजबूत करने की बात कही। लेकिन यह विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल एक विशेष धर्म के साथ भेदभाव कर रहा है। उनका तर्क था कि छात्रों को मलाला यूसुफजई और होलोकॉस्ट पीड़िता ऐनी फ्रैंक की किताबें पढ़ने के लिए दी जा रही हैं।
मलाला की किताब को शामिल किए जाने पर कथित तौर पर बजरंग दल और विहिप से जुड़े लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि एक पाकिस्तानी कार्यकर्ता की किताब स्कूल में क्यों रखी गई है। खबरों के अनुसार, उन्होंने गेट फांदकर स्कूल परिसर में प्रवेश किया, ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए और स्कूल प्रबंधन को धमकाया।
स्कूल ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि ये किताबें उनके ‘बुक क्लब’ का हिस्सा थीं और इसका उद्देश्य छात्रों में वैश्विक जागरूकता और समानुभूति को बढ़ावा देना था। स्कूल ने यह भी बताया कि नाश्ते और दोपहर के भोजन के दौरान नियमित रूप से श्लोक पढ़े जाते हैं, और सुबह योग भी कराया जाता है।
14 अगस्त को स्कूल ने अपने इंस्टाग्राम पर अभिभावकों के समर्थन वाले कई ईमेल भी साझा किए। कई माता-पिता ने इन किताबों को बच्चों के मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। वहीं सूत्रों के अनुसार, एक अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले दो शिक्षकों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया और उन पर इस्तीफा देने का भारी दबाव डाला गया।
‘किताब पढ़ना कोई अपराध नहीं’
इस विवाद के बीच 22 अगस्त को SYCA ने स्कूल के समर्थन में एक बयान जारी किया। संगठन ने कहा कि किताब पढ़ना कोई अपराध नहीं है और इस घटना को भारत की शिक्षा प्रणाली के लिए एक बेहद चिंताजनक संकेत बताया। उनका मानना था कि स्कूलों में बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के स्वस्थ बहस और चर्चा के लिए जगह होनी चाहिए।
25 अगस्त को इस संगठन ने शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पास औडा गार्डन में 27 अगस्त को दो घंटे का ‘साइलेंट रीडिंग सेशन’ आयोजित करने की घोषणा की। समन्वय के लिए ‘गुजरात रीड्स’ नाम का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया, जिसे अब डिलीट कर दिया गया है। उद्यमी स्नेह भावसार ने बताया कि यह ग्रुप केवल स्कूल के साथ एकजुटता दिखाने के लिए बनाया गया था।
ज़ालरिया ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम केवल मलाला या ऐनी फ्रैंक पर केंद्रित नहीं था। लोग वहां महात्मा गांधी, सरदार पटेल, भगत सिंह और बी.आर. अंबेडकर की किताबें भी पढ़ रहे थे। इस समूह की शुरुआत दलित इतिहास माह के दौरान हुई थी और यह पूरी तरह से एक विकेंद्रीकृत मंच है जिसका कोई औपचारिक नेता नहीं है।
‘वे बातचीत के इरादे से नहीं आए थे’
स्नेह भावसार के अनुसार, 27 अगस्त की शाम 4 बजे रीडिंग सेशन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ। लगभग 30-40 लोग चुपचाप अपनी किताबें पढ़ रहे थे। लेकिन सत्र के अंत में चार-पांच लोग आए, भीड़ का जायजा लिया और फिर लाठी-डंडों के साथ अधिक लोगों को लेकर वापस लौटे। स्वाति गोस्वामी ने बताया कि उनके गले में भगवा स्कार्फ थे और वे ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे।
आयोजकों ने शुरुआत में उनसे शांति से बात करने और उनकी आपत्तियां सुनने की कोशिश की। करीब 15 मिनट तक सब शांत रहा, लेकिन हमलावर उकसाने का कोई न कोई बहाना ढूंढ रहे थे। भावसार ने बताया कि जब भीड़ ने हमला करने की कोशिश की, तो बचाव के लिए प्रतिभागियों ने राष्ट्रगान गाना शुरू कर दिया।
इस पर हमलावरों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रगान गाते समय किसी के कंधे हिल रहे थे और इसे अपमान बताते हुए उन्होंने मारपीट शुरू कर दी। प्रतिभागियों का आरोप है कि हमलावरों ने घटना का वीडियो बना रही महिलाओं को धमकाया और उनके फोन छीनने की कोशिश की। उन्हें कल तक ‘गायब’ कर देने की धमकियां भी दी गईं।
ज़ालरिया के मुताबिक, हिरेन रबारी ने मलाला की किताब और कश्मीर पर उनके विचारों को लेकर बार-बार सवाल उठाए। भीड़ ने सांप्रदायिक टिप्पणियां भी कीं और कुछ लोगों का धर्म जांचने के लिए उनके कपड़े उतारने तक की बात कही। इस हिंसक हमले में भावसार के सिर और पीठ पर गहरी चोटें आईं।
पुलिस के सामने भी नहीं रुकी हिंसा
SYCA सदस्यों ने आरोप लगाया कि पुलिस के आने के बाद भी हिंसा नहीं रुकी और लगभग आधा दर्जन लोग घायल हो गए। हमलावरों ने पुलिस के सामने ही मारपीट की और कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की वर्दी भी पकड़ ली। पुलिसकर्मियों ने प्रतिभागियों को तुरंत अपनी वैन में बैठने को कहा ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
ज़ालरिया ने बताया कि सात-आठ लोगों को पुलिस वाहन में वस्त्रापुर थाने ले जाया गया, जहां एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। पुलिस के साथ सदस्य मेडिकल जांच के लिए सिविल अस्पताल भी गए। गोस्वामी ने बताया कि पुलिस ने शुरुआत में मौखिक बयानों से कुछ बातों को हटा दिया था, लेकिन बाद में लिखित बयान देने पर रात 2 बजे के करीब एफआईआर दर्ज की गई।
बजरंग दल और स्कूल प्रशासन का पक्ष
बजरंग दल के गुजरात उपाध्यक्ष ज्वलित मेहता ने कहा कि हाथापाई तभी शुरू हुई जब दूसरे गुट ने राष्ट्रगान का भारी अपमान किया। स्कूल की घटना पर उन्होंने कहा कि उन्हें शिकायत मिली थी कि मलाला की किताब जबरन पढ़ाई जा रही है। मेहता ने माना कि उनके कार्यकर्ता स्कूल की बाउंड्री लांघकर अंदर गए थे, लेकिन किसी तरह की हिंसा से पूरी तरह इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि कैंटीन कर्मचारी स्कूल में अपने लिए अंडे पका रहे थे।
मेहता ने यह भी दावा किया कि रीडिंग सेशन में गोधरा दंगों और लव जिहाद के खिलाफ भी किताबें थीं। उनका मुख्य उद्देश्य यह था कि मलाला की किताब न पढ़ाई जाए क्योंकि कश्मीर पर उनके विचार हमारे देश के लिए हानिकारक हैं।
कुछ घंटों बाद स्कूल की प्रमुख गरिमा सिंह ने सभी विवादों पर जवाब दिया। खाने की घटना पर उन्होंने कहा कि बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया और वह पूरी तरह सुरक्षित है। एहतियात के तौर पर फूड फैसिलिटी रोक दी गई है और उचित सुरक्षा सुनिश्चित होने पर ही इसे दोबारा शुरू किया जाएगा।
किताबों के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अनिवार्य या निर्धारित पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि ‘बुक क्लब’ का एक अतिरिक्त विकल्प थीं, जो स्वतंत्र विचार और क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा देने के लिए हैं। इस्तीफे के दबाव के आरोप पर सिंह ने कहा कि कर्मचारियों से जुड़े मामले गोपनीय होते हैं, लेकिन स्कूल सभी को सुरक्षित माहौल देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अंत में उन्होंने कैंटीन में मांसाहारी भोजन पकने और स्कूल में नमाज अदा किए जाने के झूठे दावों का भी स्पष्ट रूप से खंडन किया। उन्होंने कहा कि आनंद निकेतन सख्ती से शाकाहारी और सात्विक भोजन के नियमों का पालन करता है।
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