भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बार फिर इतिहास रचते हुए पूरी दुनिया में देश का मान बढ़ाया है। इस साल अब तक शांत रहे इसरो ने शानदार वापसी करते हुए अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट) EOS-05 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।
गुरुवार, 4 सितंबर 2026 को रात 2:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से यह ऐतिहासिक उड़ान भरी गई। जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की यह 19वीं उड़ान थी।
उड़ान भरने के ठीक 18 मिनट बाद रॉकेट ने EOS-05 को उसकी निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया। यह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है जो पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर जियोसिंक्रोनस कक्षा से लगातार निगरानी करेगा।
इस शानदार सफलता पर इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने गहरी खुशी जाहिर की। उन्होंने बताया कि GSLV-F17 वाहन ने इस उन्नत उपग्रह को बिल्कुल सटीक रूप से उसकी आवश्यक कक्षा में स्थापित किया है। यह श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट से 107वां और GSLV का 19वां मिशन था।
डॉ. नारायणन ने जानकारी देते हुए कहा कि GSLV-D1 के पहले लॉन्च में 1536 किलोग्राम का पेलोड भेजा गया था। तब से इसरो ने इसके स्ट्रक्चरल मास और प्रोपल्शन सिस्टम में लगातार सुधार किया है। इसी का नतीजा है कि आज 2367 किलोग्राम वाले सबसे भारी उपग्रह को इस लॉन्च व्हीकल के जरिए सफलतापूर्वक भेजा जा सका है।
इसरो प्रमुख ने पुष्टि की है कि सैटेलाइट के सभी वाल्व ठीक से काम कर रहे हैं और सोलर पैनल पूरी तरह से खुल चुके हैं। उपग्रह की स्थिति बिल्कुल सामान्य है। आने वाले दिनों में इसकी कक्षा को बढ़ाकर इसे राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए जियो प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया जाएगा। इसके बाद यह सामरिक डेटा प्रदान करने वाला भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट बन जाएगा।
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि पर इसरो को बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि यह देश के लिए एक बेहद गर्व का क्षण है। उन्होंने इसे इसरो की उत्कृष्टता, नवाचार और भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती क्षमताओं का बेहतरीन उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि इसरो और भारतीय उद्योगों के बीच बढ़ती साझेदारी हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक नई ताकत दे रही है। इस शानदार तालमेल से पूरे स्पेस इकोसिस्टम में भारत की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं।
अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी एक्स पर इसरो टीम की जमकर सराहना की। उन्होंने बताया कि EOS-05 विजिबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत इमेजिंग करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
EOS-05 सैटेलाइट को ‘आई इन द स्काई’ (आसमान में आंख) का नाम दिया गया है। यह सैटेलाइट रियल-टाइम तस्वीरें भेजने के साथ-साथ कृषि, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में देश के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।
यह सफल लॉन्च इसरो के लिए एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। इससे पहले 12 जनवरी 2026 को अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 को ले जाने वाला PSLV-C62 मिशन विफल हो गया था, जिसके बाद से कोई लॉन्चिंग नहीं हुई थी।
मई 18, 2025 को PSLV-C61 और फिर जनवरी 2026 में PSLV-C62 की लगातार विफलताओं के बाद अंतरिक्ष एजेंसी ने बेहद सतर्क रुख अपना लिया था। हालांकि 2026 की पहली तिमाही में GSLV-F17 सहित सात मिशन निर्धारित थे, लेकिन इसरो ने कोई भी उपग्रह लॉन्च करने से परहेज किया था।
2367 किलोग्राम वजनी EOS-05 सैटेलाइट की सफलता ने अगस्त 2021 में GSLV-F10 / EOS-03 मिशन की विफलता की कड़वी यादों को भी पीछे छोड़ दिया है। उस समय क्रायोजेनिक अपर-स्टेज इग्निशन में आई तकनीकी खराबी के कारण मिशन असफल हो गया था। अब EOS-05 ने आधिकारिक तौर पर उसी असफल EOS-03 मिशन की जगह ले ली है।
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