गुजरात के एक कारोबारी को अमेरिका में चार साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई गई है। यह शख्स अपनी सूरत स्थित कंपनी के जरिए फेंटेनाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की तस्करी करता था। फेंटेनाइल एक बेहद खतरनाक सिंथेटिक ओपिओइड है जिसका इस्तेमाल अवैध नशे के लिए भारी मात्रा में किया जाता है।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश पामेला के. चेन ने 37 वर्षीय भावेश लाठिया को 54 महीने कैद की सजा सुनाई है। सूरत की ‘रेक्सूटर केमिकल्स’ के संस्थापक भावेश ने इसी साल अप्रैल में अपना जुर्म कबूल कर लिया था। उसे यह भली-भांति पता था कि जिन रसायनों की वह तस्करी कर रहा है, उनका उपयोग फेंटेनाइल ड्रग बनाने में किया जाएगा।
जेल की सजा के अलावा अदालत ने लाठिया पर 24,560 डॉलर का जुर्माना भी लगाया है। इसके साथ ही, उसकी जेल की सजा पूरी होने के बाद उसे अमेरिका से डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया जाएगा।
न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला जूनियर के कार्यालय द्वारा पेश किए गए अदालती दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है। रेक्सूटर केमिकल्स ने 50 पाउंड से अधिक उन रसायनों की तस्करी की, जो सीधे तौर पर फेंटेनाइल बनाने के काम आते हैं। ये रसायन अमेरिका और मैक्सिको में बैठे खरीदारों को सप्लाई किए गए थे।
अटॉर्नी नोसेला ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे समय में जब फेंटेनाइल ओवरडोज से हर दिन सैकड़ों अमेरिकियों की जान जा रही थी, लाठिया ने इस जानलेवा ड्रग का कच्चा माल बेखौफ होकर सप्लाई किया। उसे इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि उसके इस कृत्य से समाज को कितना भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह सजा ऐसे तस्करों के लिए एक कड़ा संदेश है।
सूरत की यह कंपनी अंतरराष्ट्रीय डाक और पैकेज कैरियर्स के जरिए अपना माल विदेशी ग्राहकों तक पहुंचाती थी। अभियोजकों के अनुसार, फेंटेनाइल बनाने के लिए जरूरी लगभग सभी सामग्रियां इस कंपनी ने वितरित कीं। सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए पैकेजों पर जानबूझकर गलत लेबल लगाए जाते थे और कस्टम डिक्लेरेशन में फर्जीवाड़ा किया जाता था।
इस धोखाधड़ी का एक बड़ा उदाहरण इसी साल 29 जून 2024 को सामने आया। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में भेजे गए एक कंसाइनमेंट के मेनिफेस्ट पर इसे ‘विटामिन सी’ बताया गया था। लेकिन जब जांच हुई, तो अदालती दस्तावेजों के मुताबिक उस पैकेज में असल में ‘1-बॉक-4-पिपेरिडोन’ (1-Boc-4-piperidone) मिला। यह फेंटेनाइल बनाने में काम आने वाला एक प्रतिबंधित रसायन है।
इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश न्यूयॉर्क होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस (HSI) की एक टास्क फोर्स ने किया। अंडरकवर अधिकारियों ने 2 अक्टूबर और 15 अक्टूबर 2024 को वीडियो कॉल के जरिए लाठिया से संपर्क साधा। इस दौरान अधिकारियों ने रसायनों की बिक्री को लेकर उसके साथ पूरी सौदेबाजी रिकॉर्ड कर ली।
बातचीत के दौरान एक अंडरकवर अधिकारी ने लाठिया को झांसे में लेते हुए कहा कि मैक्सिको के उनके क्लाइंट भेजे गए माल की गुणवत्ता से बेहद खुश हैं। इस तारीफ और भरोसे के बाद लाठिया 20 किलो 1-बॉक-4-पिपेरिडोन बेचने को तैयार हो गया। जांच एजेंसियों से बचने के लिए उसने इस खेप को एंटासिड (एसिडिटी की दवा) का लेबल लगाकर भेजने का शातिर सुझाव भी दिया।
अंडरकवर अधिकारी ने उसे चेताते हुए यह भी कहा था कि यह एक बेहद विवादित और प्रतिबंधित उत्पाद है। अधिकारी ने कहा कि फेंटेनाइल को लेकर अधिकारियों के भारी दबाव के कारण इसे मैक्सिको भेजना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है। इसके बाद, 23 नवंबर 2024 को लाठिया और उसकी कंपनी ने एंटासिड का फर्जी लेबल लगाकर 20 किलो रसायन न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में भेज दिया, जहां वह रंगे हाथों पकड़ा गया।
होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन के कार्यवाहक स्पेशल एजेंट इन चार्ज पीट गिजास ने इस सफलता पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि लाठिया की करतूतों ने उसे फेंटेनाइल सप्लाई चेन के मुख्य स्रोत पर ला खड़ा किया था, जहां से वह धोखे और फर्जी लेबलिंग के जरिए अमेरिका में मौत का सामान भेज रहा था।
गिजास ने कहा कि यह कार्रवाई दर्शाती है कि एजेंसियां इस जहर के बाजार में बिकने से पहले ही उसकी सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
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