comScore 20 फीट नीचे उफनती नदी और अधूरी पुलिया, लोहे की संकरी सीढ़ी के सहारे मौत से खेलते छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चे - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

20 फीट नीचे उफनती नदी और अधूरी पुलिया, लोहे की संकरी सीढ़ी के सहारे मौत से खेलते छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चे

| Updated: September 3, 2026 16:09

गरियाबंद में 6 साल से लटके पुल निर्माण ने बढ़ाई मुश्किलें, उफनती पैरी नदी के ऊपर लोहे की संकरी सीढ़ी से स्कूल जाने को मजबूर हैं दर्जनों मासूम बच्चे।

पीठ पर स्कूल बैग और 20 फीट नीचे उफनती नदी का खौफ। यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 190 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के स्कूली बच्चों की रोजमर्रा की हकीकत है। मानसून के आते ही आम तौर पर शांत रहने वाली पैरी नदी एक खतरनाक रूप ले लेती है, जिससे खंभाठा और आसपास की बस्तियों के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूल तक पहुंचने के लिए इन मासूमों को एक अधूरे पुल के खंभे से लगी संकरी और फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी पर चढ़ना पड़ता है। खुले हुए लोहे के सरियों के बीच से गुजरते हुए इस सफर में एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।

गरियाबंद की भाटीगढ़ पहाड़ियों से निकलने वाली यह मौसमी नदी सर्दियों में एक छोटी सी धारा में तब्दील हो जाती है और गर्मियों में इसका रेतीला तल पूरी तरह सूख जाता है, जिससे लोग आसानी से पैदल या साइकिल से इसे पार कर लेते हैं।

हालात मध्य जून से सितंबर के बीच बिगड़ते हैं, जब भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर डराने वाला हो जाता है और सामान्य रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। मैनपुर तहसील मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर, देहरगुड़ा और खंभाठा के बीच इस 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण पिछले 6 सालों से चल रहा है।

लगातार शिकायतों और आधिकारिक निरीक्षणों के बावजूद काम की रफ्तार रेंगने जैसी है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के बाहर निकले लोहे के सरियों से कई लोग घायल हो चुके हैं और बारिश के दिनों में फिसलन भरी सीढ़ी इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती है।

यह खौफनाक मंजर तब दुनिया के सामने आया जब बच्चों के इस खतरनाक सफर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। लगभग एक साल पहले, जनप्रतिनिधियों और पूर्व कलेक्टर ने इस साइट का दौरा किया था और ठेकेदार व अधिकारियों को काम में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। उस वक्त ग्रामीणों को छह महीने के भीतर पुल तैयार होने का आश्वासन मिला था, लेकिन वह समय सीमा अब बहुत पीछे छूट चुकी है।

प्रशासन की इस घोर लापरवाही से आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द कोई कदम नहीं उठाता है, तो वे राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम करेंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए गरियाबंद के कलेक्टर रणबीर शर्मा ने जल्द ही साइट का दौरा करने की बात कही है।

उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वह तुरंत समाधान निकालने के लिए अधिकारियों और ग्रामीणों के संपर्क में हैं। उन्होंने परियोजना की समीक्षा कर देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने और बच्चों के लिए सुरक्षित अस्थायी मार्ग बनाने के साथ-साथ पुल को पूरा करने की समयबद्ध योजना बनाने का भी वादा किया है।

पुल निर्माण में यह देरी इसलिए भी बेहद निराशाजनक है क्योंकि ओडिशा की सीमा से लगा मैनपुर इलाका दशकों तक माओवादियों का एक बेहद मजबूत गढ़ रहा है। पिछले साल ही सुरक्षा बलों ने इन घने जंगलों में लगातार अभियान चलाकर उनके वर्चस्व को खत्म किया था।

इन ऑपरेशनों में जनवरी से सितंबर के बीच 24 नक्सलियों को मार गिराया गया था, जिनमें मोडेम बालकृष्ण और चलपति जैसे शीर्ष माओवादी कमांडर भी शामिल थे। अब जब यह इलाका आतंक से मुक्त होकर शांति की ओर लौट रहा है, तब जीवन को आसान बनाने के लिए बन रहा यह पुल बच्चों के लिए नदी के ऊपर एक मौत का फंदा बन गया है।

यह भी पढ़ें-

पति-पत्नी को साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकती पुलिस: गुजरात हाईकोर्ट

न्यूजीलैंड में मोटी सैलरी और यूके वीजा का लालच पड़ा भारी: वर्क परमिट के नाम पर गुजरातियों से लाखों की ठगी

Your email address will not be published. Required fields are marked *