विदेश में शानदार नौकरी और उच्च वेतन का सपना कई बार लोगों को भारी मुसीबत में डाल देता है। गुजरात में सामने आए दो अलग-अलग मामलों में ऐसा ही देखने को मिला है, जहां वीजा और वर्क परमिट के नाम पर कई लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
अहमदाबाद के एक 44 वर्षीय व्यक्ति और उनके साले ने फेसबुक पर न्यूजीलैंड में वर्क परमिट का एक विज्ञापन देखा था। कलोल निवासी यह व्यक्ति पेशे से एक प्रोडक्शन मैनेजर है। विज्ञापन में प्रतिमाह 2.5 लाख रुपये सैलरी और मुफ्त आवास का प्रलोभन दिया गया था, जिसके झांसे में आकर इन दोनों ने 20.8 लाख रुपये का नुकसान उठाया।
इस पीड़ित ने अक्टूबर 2023 में विज्ञापन देखकर एजेंसी से संपर्क किया था। बुधवार को दर्ज की गई पुलिस शिकायत के अनुसार, एजेंसी के एक प्रतिनिधि ने न्यूजीलैंड का वर्क वीजा लगवाने के लिए कुल 11 लाख रुपये की मांग की। ठगों ने शुरुआत में केवल एक लाख रुपये मांगे और बाकी की रकम विदेश में नौकरी शुरू होने के बाद वेतन से काटने का भरोसा दिया।
इसके बाद दोनों पीड़ितों ने अपने पहचान पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन फीस जमा कर दी। उन्हें जूम ऐप के जरिए ऑनलाइन इंटरव्यू देने के लिए कहा गया। जब शिकायतकर्ता को एक इंटरव्यू में ‘फेल’ घोषित कर दिया गया, तो प्रतिनिधि ने पिछले दरवाजे से नौकरी दिलाने का नया झांसा दिया।
जनवरी 2024 में इन दोनों को एक अन्य सहयोगी से मिलवाया गया, जिसने ‘अनौपचारिक व्यवस्था’ के नाम पर नकद भुगतान करने की जिद की। पीड़ितों को व्हाट्सएप पर जॉब ऑफर लेटर भेजे गए, जिसके बाद उन्होंने 10 लाख रुपये नकद सौंप दिए। लेकिन असल में उन्हें वर्क परमिट कभी नहीं मिला।
वादे के विपरीत ठगों ने उन्हें केवल विजिटर वीजा पकड़ा दिया। उन्हें यह कहकर न्यूजीलैंड जाने के लिए कहा गया कि वहां पहुंचने के बाद उनका विजिटर वीजा वर्क परमिट में बदल दिया जाएगा। इन दोनों ने नकद और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए कुल 21.21 लाख रुपये का भुगतान किया था, जिसमें से उन्हें केवल 40,000 रुपये ही रिफंड के तौर पर वापस मिले।
मकरपुरा स्थित इस फर्जी एजेंसी से जुड़े चार लोगों के खिलाफ सीआईडी (क्राइम) ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इसी एजेंसी ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर तीन अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है।
इन तीन अन्य पीड़ितों ने कुल 60.8 लाख रुपये गंवाए, जिनमें से उन्हें मात्र 11 लाख रुपये ही वापस किए गए। इस तरह न्यूजीलैंड वीजा घोटाले के इस मामले में कुल 5 गुजरातियों को 70.5 लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
वहीं दूसरी ओर, एक 57 वर्षीय सिविल ठेकेदार ने सूरत के एक वीजा एजेंट के खिलाफ डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच (डीसीबी) में धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। इस ठेकेदार से उसकी बेटी के यूके स्टूडेंट वीजा के रिन्यूअल के नाम पर 23.5 लाख रुपये की ठगी की गई है।
पीड़ित पिता ने अपनी जीवन भर की जमापूंजी, बीमा पॉलिसियों और यहां तक कि गहने गिरवी रखकर यह रकम जुटाई थी। उन्होंने साल 2025 के अंत में एजेंट को यह सारा पैसा ट्रांसफर किया था।
जब एजेंट वीजा रिन्यू कराने में पूरी तरह नाकाम रहा, तो दोनों पक्षों के बीच एक नोटरीकृत समझौता हुआ। इस समझौते के तहत एजेंट ने किस्तों में पैसे लौटाने का वादा किया था।
हालांकि, पीड़ित ने आरोप लगाया है कि वादे के मुताबिक उसे कोई रिफंड नहीं मिला। इसके बाद वह एजेंट रहस्यमय तरीके से लापता हो गया, जिसके चलते पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। ये दोनों घटनाएं स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि विदेशी रोजगार और वीजा सहायता के झूठे वादे किस तरह लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं।
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