दिल्ली पुलिस ने स्वयंभू हिंदुत्व सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और मुख्य आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर किए गए जोरदार प्रदर्शन के करीब 24 घंटे बाद यह कड़ी कार्रवाई हुई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, भारद्वाज ने यूट्यूब पर मौजूद एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में खुलेआम यह दावा किया था कि उसने जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक छात्र प्रदर्शनकारी के पिता का “सिर फोड़” दिया था। इस विवादित वीडियो के वायरल होने के बाद उस पर कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारद्वाज शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को बुलंदशहर भाग गया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने पीछा करते हुए उसे बुलंदशहर से ही धर दबोचा। यह गिरफ्तारी पुलिस, सीजेपी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ-साथ छात्र प्रदर्शनकारी निशु आज़ाद के बीच कई घंटों तक चली लंबी बातचीत का नतीजा है। निशु के पिता संजय के साथ ही यह क्रूर मारपीट हुई थी।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और इस मामले में सख्त से सख्त धाराएं लगाई जाएं। इस घटना को लेकर पहले ही एक एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी, लेकिन सीजेपी का सीधा आरोप था कि पुलिस ने शुरुआत में काफी कमजोर धाराएं लगाई हैं।
इस तीखी बहस और प्रदर्शन के बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस ने एफआईआर में कई नई और सख्त धाराएं जोड़ दीं। इनमें आपराधिक धमकी से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ हत्या का प्रयास और गंभीर चोट पहुंचाने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
इसके अलावा, पुलिस ने एक नाबालिग पीड़िता की शिकायत पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत एक नई एफआईआर भी दर्ज की है। इस शिकायत में ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। इस नए मामले में बीएनएस की धारा 78 और 79 (पीछा करना और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के साथ ही अश्लील सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से संबंधित आईटी एक्ट की धारा 67 को भी जोड़ा गया है।
निशु आजाद के वकील ऋषभ रंजन ने अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए इसे बेहद अजीबोगरीब बताया। उन्होंने कहा कि दोपहर करीब 1:45 बजे स्वतंत्र भारद्वाज को जज के आवास पर पेश किया गया और इसके लिए एक विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) की व्यवस्था की गई थी।
रंजन ने हैरानी जताते हुए कहा कि जज कोर्ट में नहीं बैठे थे और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई कि पुलिस ने कितने दिन की रिमांड मांगी थी या कौन सी नई धाराएं लगाई गई हैं।
वकील ऋषभ रंजन ने आगे कहा कि इतने गंभीर अपराध में पुलिस द्वारा केवल एक दिन की हिरासत मांगना समझ से परे है। उन्होंने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि एफआईआर में जोड़ी गई धाराओं का कोई भी विवरण उन्हें नहीं दिया गया है और ऐसा लगता है जैसे मामले में बहुत कुछ छिपाया जा रहा है।
दूसरी ओर, स्वतंत्र भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि पुलिस को एक दिन की कस्टडी मिली है और उनकी रक्षा टीम कानूनी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
शर्मा ने बताया कि वकालतनामे पर हस्ताक्षर और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अचानक रात के समय हुई इस गिरफ्तारी के कारण काफी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी और आरोपी का परिवार लगातार उनके संपर्क में बना हुआ है।
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