अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के तक्सिंग इलाके में हालिया तनाव की खबरों के बीच भारत और चीन ने रविवार को कोर कमांडर स्तर की वार्ता की। दोनों देशों के बीच यह उच्च स्तरीय सैन्य चर्चा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के मकसद से की गई है।
इस अहम बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व सेना की तीसरी कोर (जिसे स्पीयर कोर भी कहा जाता है) के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने किया। नागालैंड में दीमापुर के पास रंगापहाड़ में इस कोर का मुख्यालय स्थित है। उन्होंने अपने चीनी समकक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीमा विवाद सुलझाने पर विस्तार से मंथन किया।
दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच यह बातचीत भारतीय सीमा के वाचा-दामई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर आयोजित की गई। अरुणाचल प्रदेश के किबिथू सेक्टर में स्थित वाचा, भारत का सबसे पूर्वी सीमा कर्मी बैठक स्थल है। यहां एलएसी पर जारी मौजूदा मुद्दों को हल करने के लिए लंबी चर्चा हुई।
हाल के हफ्तों में स्थानीय कमांडरों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद कोर कमांडर स्तर की इस बड़ी बैठक का आयोजन किया गया है। सूत्रों के अनुसार, सीमा पर किसी भी तरह के तनाव या सैन्य वृद्धि को रोकने के लिए भारतीय सैनिक बड़ी संख्या में इस इलाके में तैनात हैं। सेना हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
अरुणाचल प्रदेश में एलएसी के पास तनावपूर्ण हालात के बीच बीते कुछ महीनों में यह दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की पहली वार्ता है, जो इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में 25 अगस्त को बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की चर्चा हुई थी।
इसके साथ ही, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है। इससे पहले शी जिनपिंग ने अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था, जब वे दूसरे अनौपचारिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए चेन्नई के पास मामल्लापुरम आए थे।
साल 2020 में पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर सैन्य गतिरोध शुरू होने के बाद से ही नई दिल्ली और बीजिंग अपने द्विपक्षीय रिश्तों को बहाल करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। पूर्वी लद्दाख से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए भारत और चीन चुशुल-मोल्दो सीमा बैठक बिंदु पर कोर कमांडर स्तर की 23 दौर की वार्ता कर चुके हैं।
बातचीत का 23वां दौर अक्टूबर 2025 में हुआ था। यह बैठक एलएसी पर दो प्रमुख विवादित बिंदुओं, डेपसांग मैदान और डेमचोक में गश्त की व्यवस्था पर दोनों पक्षों की औपचारिक सहमति के ठीक एक साल बाद आयोजित की गई थी।
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर मुलाकात की थी। दोनों शीर्ष नेताओं की उस वार्ता के परिणामस्वरूप ही विवादित क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी संभव हो सकी थी।
ऐतिहासिक रूप से भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर अलग-अलग धारणाएं रही हैं। यही वजह है कि जमीनी स्तर पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच अक्सर विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है।
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने भी शनिवार को कोर कमांडर स्तर की इस वार्ता और दो अतिरिक्त सैन्य हॉटलाइन स्थापित किए जाने पर टिप्पणी की। उन्होंने इन ताजा घटनाक्रमों को बेहद सकारात्मक और अहम कदम बताया।
पूर्व सीडीएस ने कहा कि सीमा विवाद अभी भी अनसुलझा है। सीमा की अलग-अलग समझ, बुनियादी ढांचे का निर्माण और सैन्य ताकत में बढ़ोतरी से घर्षण और तनाव की संभावना हमेशा बनी रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील स्थिति से निपटने के लिए निरंतर सतर्कता, विश्वसनीय सैन्य क्षमता, स्पष्ट समझौते और उनका लगातार पालन किया जाना बेहद जरूरी है।
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