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ब्रिटेन की नई सरकार में भारतवंशियों का डंका: बर्नहैम कैबिनेट में 3 नए चेहरे शामिल, स्टार्मर के 2 करीबियों की छुट्टी

| Updated: July 25, 2026 11:14

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के मंत्रिमंडल में 3 युवा भारतवंशी सांसदों को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। कनिष्क नारायण को एआई मंत्री बनाया गया है, जबकि पूर्व पीएम कीर स्टार्मर की करीबी रहीं दो दिग्गज महिला सांसदों को बैकबेंच पर भेज दिया गया है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम की नई सरकार में भारतीय मूल के नेताओं का खासा दबदबा देखने को मिला है। जुलाई 2024 के आम चुनाव में जीत दर्ज करने वाले तीन युवा भारतवंशी सांसदों को सरकार के फ्रंट बेंच (मुख्य पदों) पर अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें 36 वर्षीय हिंदू सांसद कनिष्क नारायण को नवनिर्मित एआई (AI) मंत्री के तौर पर कैबिनेट में शामिल किया गया है। वहीं, दो सिख महिला सांसदों, 41 वर्षीय सतवीर कौर और 43 वर्षीय हरप्रीत उप्पल को भी फ्रंट बेंच में जगह मिली है।

इस बड़े फेरबदल के बाद अब फ्रंट बेंच पर दो हिंदू और दो सिख चेहरे हो गए हैं। कनिष्क नारायण के अलावा श्रीलंका मूल की हिंदू सांसद उमा कुमारन को भी अहम पद से नवाजा गया है। उन्हें विदेश कार्यालय में कनिष्ठ मंत्री (जूनियर मिनिस्टर) नियुक्त किया गया है।

एक तरफ जहां नए चेहरों को मौका मिला है, वहीं भारतीय मूल की दो दिग्गज महिला सांसदों को नई सरकार से बाहर का रास्ता देखना पड़ा है। पंजाब के जालंधर से ताल्लुक रखने वाली 53 वर्षीय सीमा मल्होत्रा और 53 वर्षीय प्रीत कौर गिल अब बैकबेंच पर लौट आई हैं। इससे पहले मल्होत्रा इंडो-पैसिफिक मंत्री थीं और गिल स्वास्थ्य विभाग में कनिष्ठ मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

इन दोनों ही नेताओं को पूर्व ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर का बेहद करीबी माना जाता था। इसी साल मई में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद जब स्टार्मर से इस्तीफे की मांग उठने लगी थी, तब गिल ने सार्वजनिक तौर पर उनका बचाव किया था और अपने सहयोगियों से भी समर्थन की अपील की थी।

सीमा मल्होत्रा ने भी पूर्व पीएम के पक्ष में ऐसे ही बयान दिए थे। माना जा रहा है कि बर्नहैम के मंत्रिमंडल फेरबदल में उन्हें इसी का खामियाजा भुगतना पड़ा है।

इन तमाम बदलावों के बीच आधी भारतीय मूल की 46 वर्षीय लिसा नंदी अपनी जगह और रुतबा बचाने में कामयाब रही हैं। उनके पिता दीपक का जन्म कोलकाता में हुआ था।

लिसा नंदी कैबिनेट में बनी रहेंगी और संस्कृति सचिव का अपना कार्यभार संभालती रहेंगी। बर्नहैम के साथ उनके अच्छे समीकरण का एक बड़ा कारण उनका मैनचेस्टर में पैदा होना भी है, जहां एंडी बर्नहैम ने पूरे नौ साल तक मेयर की कुर्सी संभाली थी।

हरप्रीत उप्पल को भी बर्नहैम के साथ अपने पुराने संबंधों का सीधा फायदा मिला है। उन्होंने साल 2017 में ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर चुनाव अभियान के दौरान बर्नहैम के साथ काम किया था। उप्पल हडर्सफील्ड से सांसद हैं, जो मैनचेस्टर से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर है। नई सरकार में उन्हें असिस्टेंट व्हिप की जिम्मेदारी दी गई है।

दूसरी ओर, साउथेम्प्टन टेस्ट सीट से सांसद सतवीर कौर को महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा रोकथाम, सुरक्षा और समानता मामलों का मंत्री नियुक्त किया गया है। कौर के माता-पिता पंजाब से ताल्लुक रखते हैं और वे साउथेम्प्टन में साड़ियों की एक दुकान चलाते थे।

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