अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) पाने की चाह रखने वाले करीब दस लाख भारतीय एक बेहद लंबी और थका देने वाली कतार में फंस गए हैं। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के नए विश्लेषण के अनुसार, रोजगार आधारित इमिग्रेशन श्रेणियों में कुल बैकलॉग का 79 प्रतिशत हिस्सा केवल भारतीयों का है।
हालात इतने गंभीर हैं कि जनवरी 2026 या उसके बाद आवेदन करने वाले भारतीय पेशेवरों को EB-2 श्रेणी में 179 साल और EB-3 श्रेणी में 38 साल तक का इंतजार करना पड़ सकता है। यह संकट मुख्य रूप से सालाना वीजा सीमा और प्रति-देश कोटे के कारण पैदा हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
आंकड़ों में बैकलॉग की असली तस्वीर
दिसंबर 2025 तक, अमेरिका में EB-1, EB-2 और EB-3 श्रेणियों को मिलाकर कुल रोजगार आधारित बैकलॉग 12 लाख 64 हजार 495 तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा अप्रैल 2020 के 10,48,342 से 20.6 प्रतिशत अधिक है। सबसे ज्यादा भीड़ उन्नत डिग्री वाले पेशेवरों की EB-2 श्रेणी में है, जहां 7 लाख 31 हजार 566 भारतीय कतार में हैं।
इसके बाद, कुशल श्रमिकों की EB-3 श्रेणी में 2 लाख 13 हजार 414 भारतीय अपनी बारी का रास्ता देख रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि बेहद प्रतिभाशाली लोगों के लिए बनी EB-1 श्रेणी में भारतीयों का बैकलॉग विपरीत दिशा में गया है; यह अप्रैल 2020 के 71,988 से घटकर दिसंबर 2025 में 51,619 रह गया है। NFAP की चेतावनी है कि यदि कानून नहीं बदला गया, तो 2040 तक कुल बैकलॉग 20 लाख को पार कर सकता है।
भारतीय आवेदकों को ही सबसे बड़ा नुकसान क्यों?
अमेरिकी आव्रजन कानून में मौजूद दो प्रमुख बाधाएं भारतीयों के लिए यह विकट स्थिति पैदा करती हैं। पहली बाधा रोजगार आधारित वीजा की सालाना सीमा है, जिसे 1990 में 1,40,000 तय किया गया था, और इसमें मुख्य आवेदक के साथ-साथ उनके आश्रित भी गिने जाते हैं।
दूसरी बाधा यह है कि किसी भी देश के नागरिकों को कुल कोटे का अधिकतम 7 प्रतिशत ही मिल सकता है। इस नियम के चलते भारत और चीन जैसे बड़ी आबादी वाले देशों को आइसलैंड और लक्ज़मबर्ग जैसे छोटे देशों के बराबर ही हिस्सा मिलता है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो वित्तीय वर्ष 2016 में 47,601 EB-2 भारतीय आवेदन स्वीकृत हुए थे, जिसका मतलब था कि आश्रितों सहित 98,594 लोग कतार में आए, लेकिन उस साल केवल 4,407 भारतीयों को स्थायी निवास मिला।
वित्तीय वर्ष 2020 से 2024 के बीच अप्रयुक्त पारिवारिक वीजा के कारण 2,80,000 अतिरिक्त रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड जारी हुए (कुल 9,80,460), फिर भी यह बैकलॉग खत्म करने के लिए नाकाफी साबित हुआ।
प्रतीक्षा का लंबा दौर और सुधार की सख्त जरूरत
ग्रीन कार्ड की लाइन में लगने से पहले ही ‘लेबर सर्टिफिकेशन’ (PERM) प्रक्रिया में दो से तीन साल लग जाते हैं। अगस्त 2026 के वीजा बुलेटिन के अनुसार, स्थिति बेहद सुस्त है। एक भारतीय आवेदक को आगे बढ़ने के लिए EB-1 में 15 अक्टूबर 2022 और EB-3 में 1 जनवरी 2014 से पहले की प्राथमिकता तिथि (Priority Date) चाहिए, जबकि EB-2 श्रेणी अगस्त में पूरी तरह से अनुपलब्ध है।
NFAP के कार्यकारी निदेशक स्टुअर्ट एंडरसन के शब्दों में, यह लंबा इंतजार पेशेवरों और उनके परिवारों के लिए भारी मुश्किलें खड़ी कर रहा है और अमेरिकी कंपनियों की टैलेंट बनाए रखने की क्षमता को कमजोर कर रहा है।
साल 2022 में ‘चिप्स एंड साइंस एक्ट’ के तहत विज्ञान और तकनीक में पीएचडी और क्रिटिकल इंडस्ट्रीज में मास्टर्स करने वालों को इस कोटे से बाहर रखने का प्रस्ताव रखा गया था, जो पारित नहीं हो सका। बिना किसी बड़े विधायी बदलाव के, कानूनी रास्ता अपनाने वाले इन उच्च कुशल कामगारों का भविष्य दशकों तक अनिश्चितता के भंवर में फंसा रहेगा।
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