परिवार के साथ रिश्तों के विवादों के बाद भारत छोड़ने वाले युवा गुजरातियों के लिए शादी एक अप्रत्याशित हथियार बन गई है। विदेशों में शरण मांगने के लिए ये युवा अब अपनी शादी और पारिवारिक झगड़ों की कहानियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ब्रिटेन, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देशों में आव्रजन अधिकारियों के सामने जबरन शादी, पारिवारिक हिंसा, अंतर-जातीय विवाह पर धमकियों और समलैंगिक रिश्तों के विरोध जैसे गंभीर दावे पेश किए जा रहे हैं।
नवंबर 2025 में एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया, जहां गांधीनगर की एक 30 वर्षीय महिला को ब्रिटेन में शरण मिल गई। इस महिला ने वहां के अधिकारियों को बताया कि अगर उसे भारत वापस भेजा गया, तो उस पर अपनी मर्जी के खिलाफ शादी करने का दबाव डाला जाएगा।
यह महिला मूल रूप से छात्र वीजा पर यूरोप गई थी और उसके बाद उसने ब्रिटेन में प्रवेश किया था। ब्रिटेन में रहने के दौरान वह एक ऐसे गुजराती व्यक्ति के साथ रिश्ते में थी, जो कथित तौर पर अपने वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से वहां रह रहा था। हालांकि, जब उनका रिश्ता टूट गया, तो महिला ने अपनी सुरक्षा का दावा करते हुए ब्रिटेन में शरण की मांग की।
एक अन्य मामले में अहमदाबाद की एक महिला को हाल ही में कनाडा में शरण दी गई है। इस महिला ने कनाडाई आव्रजन अधिकारियों को बताया कि वह महिलाओं के प्रति आकर्षित है और उसे डर है कि भारत लौटने पर उसे किसी पुरुष के साथ जबरन विषमलिंगी (हेटेरोसेक्सुअल) शादी के बंधन में बांध दिया जाएगा।
यह पूरा मुद्दा वास्तविक सुरक्षा जरूरतों और शरण प्रक्रियाओं के संभावित दुरुपयोग के बीच उलझा हुआ है। अवैध आव्रजन नेटवर्क से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ प्रवासियों को जानबूझकर अपने पारिवारिक विवादों को उत्पीड़न के सबूत के रूप में पेश करने की सलाह दी जा रही है।
कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां जोड़ों ने भारत में फर्जी झगड़े किए और अपने माता-पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। बाद में इसी एफआईआर का इस्तेमाल विदेशों में शरण मांगने के लिए मजबूत सबूत के तौर पर किया गया।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि सभी मामले फर्जी हैं। ऐसे वास्तविक मामले भी मौजूद हैं जहां माता-पिता सच में अपने बच्चों को उनकी मर्जी के खिलाफ शादी करने के लिए मजबूर करते हैं, खासकर अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक रिश्तों के मामलों में।
यह हथकंडा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। अमेरिका में भी कुछ लोग ‘यू-वीजा’ हासिल करने के लिए फर्जी झगड़ों और हाथापाई का नाटक करते हैं। हालांकि, ऐसा करने पर उन्हें खुद भी वहां गंभीर आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
ब्रिटेन के दिशा-निर्देश जबरन शादी और घरेलू हिंसा को उन मामलों के रूप में मान्यता देते हैं जिनमें सुरक्षा मूल्यांकन की आवश्यकता हो सकती है। वहां के अधिकारियों को यह तय करना होता है कि क्या दावेदार को वापस भेजने पर वास्तव में कोई गंभीर नुकसान हो सकता है और क्या उसे अपने देश में सरकार या पुलिस की सुरक्षा मिल सकती है। केवल एक नाखुश रिश्ता या पारिवारिक असहमति शरण पाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जाता।
ब्रिटेन के दिशा-निर्देशों में यह भी माना गया है कि जबरन शादी और सम्मान के नाम पर होने वाली हिंसा से जुड़े दावों को साबित करना बहुत मुश्किल होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह नुकसान आमतौर पर निजी दायरे में होता है और इसके दस्तावेजी सबूत बहुत सीमित होते हैं।
वहीं, कनाडाई नियमों के तहत दावेदारों को उत्पीड़न या गंभीर जोखिम को साबित करना अनिवार्य है। कनाडा स्पष्ट करता है कि शरण मांगना सामान्य आव्रजन का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है। वहां के अधिकारी भी सख्त चेतावनी देते हैं कि अगर कोई गलत जानकारी देता है, तो उसका आवेदन खारिज किया जा सकता है और उसे आव्रजन से जुड़े अन्य गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
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