गुजरात में चांदीपुरा वायरस (CHPV) का प्रकोप लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। राज्य सरकार के हालिया बयान के अनुसार, इस खतरनाक वायरस से अब तक 28 बच्चों की मौत हो चुकी है। राज्य भर में और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से कुल 324 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से 42 बच्चों में चांदीपुरा वायरस के संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
इस मौजूदा प्रकोप का पहला मामला 30 जून को दर्ज किया गया था। तब से लेकर अब तक स्थिति गंभीर बनी हुई है। बीते तीन अगस्त तक आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 22 थी, जिसमें अब छह और मौतों का इजाफा हुआ है। यह आंकड़ा 2024 में आए एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) और चांदीपुरा के पिछले बड़े प्रकोप के दौरान हुई बच्चों की मौतों के बराबर पहुंच गया है।
आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण इस बीमारी की भयावहता को स्पष्ट करता है। प्रयोगशालाओं में जिन 42 मामलों की पुष्टि हुई है, उनमें से 28 बच्चों ने दम तोड़ दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि पुष्ट मामलों में मृत्यु दर 66.7 प्रतिशत है। यानी वर्तमान प्रकोप में हर तीन में से लगभग दो प्रयोगशाला-पुष्ट संक्रमित बच्चों की जान जा रही है।
हालांकि, अधिकारियों का यह भी कहना है कि ये आंकड़े केवल प्रशासन द्वारा दर्ज और पुष्ट मामलों पर आधारित हैं। ऐसे कई संक्रमण या मौतें भी हो सकती हैं जिनकी पहचान या जांच नहीं हो पाई है। राज्य सरकार ने बताया है कि कुल 324 संदिग्ध मामलों में से 314 नमूनों के टेस्ट परिणाम मिल चुके हैं, जबकि 10 सैंपल की रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
कच्छ जिले के अंजार में भी एक बच्चे की मौत के बाद स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है। कच्छ जिला प्रशासन ने गुरुवार को बताया कि जिले में अब तक आठ संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से सात मामलों की लैब रिपोर्ट नेगेटिव आई है, जबकि एक मरीज की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है। फिलहाल तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वे डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में हैं।
अंजार क्षेत्र में चांदीपुरा वायरस का मामला सामने आते ही जिला महामारी नियंत्रण तंत्र तुरंत हरकत में आ गया। प्रभावित बच्चे के घर के 500 मीटर के दायरे में सघन डस्टिंग और फॉगिंग अभियान चलाया गया है। इस वायरस के संभावित वाहक माने जाने वाली सैंडफ्लाई (रेत मक्खी) को पनपने से रोकने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव भी किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार प्रभावित और उसके आसपास के इलाकों में घर-घर जाकर निगरानी कर रही हैं। इस अभियान के तहत अब तक 883 घरों का दौरा किया जा चुका है, जिसमें कुल 3,480 लोगों की आबादी को कवर किया गया है। संदिग्ध लक्षणों वाले व्यक्तियों की बारीकी से जांच की जा रही है और उन्हें जरूरी स्वास्थ्य मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) द्वारा गुजरात और राजस्थान में तैनात नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम (NJORT) भी लगातार जांच में जुटी है। राज्य और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के शोधकर्ता अभी तक उस पशु स्रोत या आर्थ्रोपोड वाहक की सटीक पहचान नहीं कर पाए हैं, जिससे 2024 या 2026 के प्रकोप में इंसानों तक यह संक्रमण पहुंचा हो।
इस बीच, कच्छ प्रशासन ने राजकोट से एक विशेष कीट-विज्ञान (एंटोमोलॉजिकल) टीम को बुलाया है। इस टीम ने चांदीपुरा वायरस के संभावित वाहकों का पता लगाने के लिए प्रभावित क्षेत्र का गहन सर्वेक्षण किया है।
टीम द्वारा सैंडफ्लाई और अन्य वाहकों के नमूने एकत्र किए गए हैं, जिन्हें आगे की विस्तृत जांच के लिए गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) भेज दिया गया है।
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