गुजरात में भारी बारिश और बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है। राज्य में पानी का स्तर कम होने के साथ ही विनाश का खौफनाक मंजर सामने आने लगा है। शुक्रवार को विशेष रूप से वलसाड और नवसारी जैसे दक्षिणी जिलों में बाढ़ के पानी में तैरते शवों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 31 लोगों की जान जा चुकी है।
राहत आयुक्त कार्यालय ने पुष्टि की है कि ज्यादातर मौतें डूबने की वजह से हुई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नवसारी में 15, वलसाड में सात और खेड़ा में चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा अमरेली और सूरत में दो-दो तथा आनंद जिले में एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
दक्षिण गुजरात और अहमदाबाद में जमकर तबाही मचाने के बाद शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून का रुख उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र के कुछ हिस्सों की ओर मुड़ गया। हालांकि दक्षिण गुजरात में अब मूसलाधार बारिश थम गई है, लेकिन बाढ़ के हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। जलमग्न इलाकों में फंसे निवासियों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ान भर रहे हैं और बचाव दल दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
बारिश के आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ा दी है। खेड़ा जिले के महेमदाबाद में शुक्रवार सुबह 6 बजे तक बीते 24 घंटों के दौरान 507 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक है। वहीं, पाटन के सांतलपुर में शुक्रवार सुबह 6 बजे से रात 8 बजे के बीच 335 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
राज्य के राहत आयुक्त गौरांग मकवाना ने जानकारी दी कि नवसारी और वलसाड जिलों से मुख्य रूप से अब तक 38,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें से अधिकांश लोग अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं, जबकि लगभग 2,000 लोगों को प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में रखा गया है। इसके साथ ही विभिन्न अभियानों में अब तक कुल 352 लोगों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है।
नवसारी के मेंढर गांव में बाढ़ के पानी में फंसे 60 झींगा फार्म मजदूरों को भारतीय तटरक्षक बल के हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया। बचाव कार्यों में तेजी लाने और स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों के साथ-साथ भारतीय सेना की एक टुकड़ी को भी मोर्चे पर तैनात किया गया है। बाढ़ का व्यापक असर रेल यातायात पर भी पड़ा है, जिसके चलते 50 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं और 25 ट्रेनों को बीच रास्ते में ही समाप्त (शॉर्ट-टर्मिनेट) कर दिया गया है।
सबसे ज्यादा प्रभावित वलसाड जिले में बाढ़ का पानी उतरने के बाद तबाही की असली तस्वीर खुलकर सामने आई है। यहां घरों, दुकानों और अनाज व तेल के गोदामों में करीब 7 फीट तक पानी भर गया था। जलस्तर घटने के बाद हर तरफ कीचड़ का साम्राज्य और बर्बादी का मंजर है।
प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए राहत, सफाई और बहाली के कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिए हैं। नगर पालिका की टीमें ट्रैक्टर और अर्थमूवर की मदद से मलबा और खराब हुआ अनाज हटा रही हैं। वहीं, जलजनित बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर पीने के पानी का क्लोरीनेशन कर रहे हैं।
धीरे-धीरे कम होते पानी ने बर्बादी के निशान पीछे छोड़ दिए हैं। सड़कें, पुल और रिहायशी इलाके कीचड़, प्लास्टिक कचरे, उखड़े हुए पेड़ों और मलबे की मोटी परतों के नीचे दब गए हैं।
इस आपात स्थिति से निपटने के लिए ओडिशा से एयरलिफ्ट की गई एनडीआरएफ की चार टीमें सूरत पहुंची हैं। इनमें से टीमों को वलसाड और नवसारी भेज दिया गया है, जबकि एक टीम को सूरत में स्टैंडबाय पर रखा गया है। इसके अलावा सेना की दो टुकड़ियां वलसाड और नवसारी पहुंच चुकी हैं तथा हालात को काबू में करने के लिए प्रभावित जिलों में दो अतिरिक्त टीमें भी रवाना की गई हैं।
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