नई दिल्ली/अहमदाबाद: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर गुजरात में आयोजित होने वाली भव्य ‘एकता परेड’ (Ekta Parade) विवादों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर पटेल की विरासत का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाते हुए परेड के आयोजन में भारी अनियमितताओं का दावा किया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय और पीएमओ से जुड़े फैसलों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परेड की झांकियों के चयन और निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई है।
सिर्फ 5 फर्मों को ही क्यों मिला ठेका?
शक्तिसिंह गोहिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि अमित शाह के नेतृत्व वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर के अनुसार, एकता परेड के लिए झांकियां तैयार करने का काम केवल पांच चुनिंदा फर्मों को दिया गया है। ये पांच फर्म हैं:
- मेसर्स लाइव पिक्सेल टेक्नोलॉजी (M/S Live Pixel Technology)
- मेसर्स सिद्धेश्वर कनुगा (M/S Siddheshwar Kanuga)
- मेसर्स विशा कनुगा (M/S Visha Kanuga)
- मेसर्स सुशांत खेड़कर (M/S Sushant Khedkar)
- मेसर्स स्मार्ट ग्राफ आर्ट एडवर्टाइजिंग (M/S Smart Graph Art Advertising)
गोहिल ने इस चयन प्रक्रिया को रहस्यमय बताया। उन्होंने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि इन पांच में से दो फर्म, सिद्धेश्वर कनुगा और उनकी पत्नी विशा कनुगा द्वारा चलाई जा रही हैं। सवाल यह है कि एक ही परिवार की दो फर्मों को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई?
पंकज मोदी की भूमिका पर विवाद
विवाद का दूसरा और सबसे बड़ा पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई, पंकज मोदी की भूमिका है। कांग्रेस सांसद ने 29 अक्टूबर को जारी एक अन्य सर्कुलर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इन झांकियों को अंतिम रूप देने का अधिकार पूरी तरह से पंकज मोदी को सौंप दिया गया है।
गोहिल ने कहा, “न केवल पंकज मोदी को अंतिम निर्णायक (Final Authority) नियुक्त किया गया, बल्कि उन्हें झांकियों का जज भी बनाया गया है, जबकि उनके पास इस क्षेत्र का कोई पूर्व अनुभव या विशेषज्ञता नहीं है।”
गौरतलब है कि पंकज मोदी गुजरात सरकार के सूचना विभाग से क्लास-I अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उन्होंने 1981 में क्लास-III कर्मचारी के रूप में सेवा शुरू की थी। कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा, “भारत सरकार ने अचानक उन्हें ‘झांकी विशेषज्ञ’ (Tableau Expert) बना दिया है और अब उन्हें हर तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।”
क्या है एकता परेड?
‘एकता परेड’ या ‘राष्ट्रीय एकता दिवस परेड’ हर साल 31 अक्टूबर को गुजरात के केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर आयोजित की जाती है। यह आयोजन देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में होता है।
गृह मंत्रालय और गुजरात सरकार के सहयोग से होने वाले इस कार्यक्रम में अर्धसैनिक बल, पुलिस टुकड़ियां और देश भर के सांस्कृतिक समूह हिस्सा लेते हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस परेड को हरी झंडी दिखाई थी।
कांग्रेस ने पूछे 4 चुभते हुए सवाल
शक्तिसिंह गोहिल ने सरकार से सीधे जवाब मांगते हुए निम्नलिखित सवाल दागे हैं:
- चयन का आधार क्या था? इन पांच फर्मों को झांकियां तैयार करने के लिए किस आधार पर चुना गया?
- समय की कमी का बहाना क्यों? यदि तैयारियां एक साल से अधिक समय से चल रही थीं, तो सरकार ने समय की कमी का हवाला क्यों दिया?
- पति-पत्नी की फर्मों को लाभ क्यों? चुनी गई फर्मों में पति-पत्नी की जोड़ी को क्यों शामिल किया गया?
- विशेषज्ञता पर सवाल: जब देश भर में कई पेशेवर झांकी विशेषज्ञ मौजूद हैं, तो एक पूर्व क्लास-III कर्मचारी को अंतिम निर्णय लेने वाला अधिकारी (Final Authority) कैसे बना दिया गया?
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