सोमनाथ/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ मंदिर के इतिहास और उसके पुनर्निर्माण को लेकर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के तुरंत बाद जिन लोगों ने “गुलाम मानसिकता” के कारण सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था, वे आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि हमें ऐसी विभाजनकारी शक्तियों से सतर्क रहने और एकजुट होकर उनके मंसूबों को नाकाम करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन 1026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर के विध्वंस के 1,000 वर्ष और 1951 में इसके ऐतिहासिक पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
‘कालचक्र ने अपना काम किया’
पीएम मोदी ने इतिहास की करवटों का जिक्र करते हुए कहा, “यह समय का पहिया है जो अपना काम कर रहा है। जो धार्मिक कट्टरपंथी मंदिरों को नष्ट करने आए थे, वे अब इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गए हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज भी उसी स्थान पर पूरी शान से खड़ा है और उसका ध्वज गर्व से लहरा रहा है।”
उन्होंने भारत की प्राचीन विरासत पर जोर देते हुए कहा कि जहां अन्य देश अपनी 100 साल पुरानी धरोहर को ही अपनी पहचान बना लेते हैं, वहीं भारत के पास सोमनाथ जैसे 1,000 साल पुराने स्थान मौजूद हैं। ये हमारे सामर्थ्य और परंपराओं के जीवंत उदाहरण हैं।
इतिहास को भुलाने की साजिश और गुमनाम नायक
प्रधानमंत्री ने अफसोस जताते हुए कहा कि आजादी के बाद कुछ लोगों ने गुलाम मानसिकता के चलते इस गौरवशाली इतिहास को भुलाने की कोशिश की। इस प्रक्रिया में उन वीरों को भी भुला दिया गया जिन्होंने सोमनाथ की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था। पीएम मोदी ने विशेष रूप से रावल कान्हड़, वीर हमीरजी गोहिल और वेगड़ा भील का नाम लिया और कहा कि दुर्भाग्य से इन महानायकों को वह महत्व नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
‘तुष्टीकरण के ठेकेदारों’ पर निशाना
इतिहासकारों और राजनेताओं के एक वर्ग पर तीखा हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कुछ लोगों ने हमलावरों के कृत्यों पर पर्दा डालने की कोशिश की। किताबों में इन हमलों को केवल सामान्य “लूट” बताकर खारिज कर दिया गया।
पीएम ने कहा, “सोमनाथ पर एक बार नहीं, बल्कि बार-बार हमले हुए। अगर मकसद सिर्फ धन लूटना होता, तो वे एक बार लूटकर रुक जाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मंदिर के स्वरूप को बदलने के लगातार प्रयास किए गए। नफरत, अत्याचार और आतंक के उस असली इतिहास को हमसे छिपाया गया।”
उन्होंने आगे कहा, “कोई भी धार्मिक व्यक्ति इस तरह की कट्टरता का समर्थन नहीं कर सकता। लेकिन ‘तुष्टीकरण के ठेकेदारों’ ने घुटने टेक दिए।”
पटेल और राजेंद्र बाबू का विरोध
पीएम मोदी ने उस दौर को याद किया जब देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल को रोकने के प्रयास किए गए थे। यहां तक कि जब 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद यहां आना चाहते थे, तो उनकी यात्रा पर भी सवाल उठाए गए।
उस कठिन समय में जामनगर के जाम साहब, महाराजा दिग्विजयसिंहजी आगे आए। उन्होंने राष्ट्रीय गौरव को सर्वोपरि रखा और 1 लाख रुपये का दान दिया। सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बड़ी जिम्मेदारी निभाई।
नए हथियारों से रची जा रही साजिशें
अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान दिए अपने भाषण को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से आज भी देश में ऐसे लोग हैं जो सोमनाथ के पुनर्निर्माण के खिलाफ थे। बस फर्क इतना है कि आज उनकी साजिशों में तलवारों की जगह दूसरे हथियारों ने ले ली है।
उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया, “हमें और अधिक सावधान रहने की जरूरत है। हमें एकजुट होकर खुद को मजबूत बनाना होगा। जब हम अपनी विरासत के साथ खड़े होते हैं, तो हमारी जड़ें मजबूत होती हैं। पिछले 1,000 वर्षों का स्मरण हमें अगले 1,000 वर्षों के लिए तैयार होने की प्रेरणा देता है।”
विकसित भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हर देशवासी को ‘विकसित भारत’ पर भरोसा है। हम गरीबी को हराकर नई ऊंचाइयों को छुएंगे और जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे।
अपने संबोधन की शुरुआत में ही पीएम ने स्पष्ट कर दिया था कि यह आयोजन केवल विध्वंस की याद नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति के लचीलेपन (resilience) और देश के स्वाभिमान का उत्सव है।
अमर है सोमनाथ
पीएम मोदी ने कहा कि गजनवी से लेकर औरंगजेब तक, हमलावरों ने सोचा कि उन्होंने तलवार के दम पर सनातन सोमनाथ को हरा दिया है। लेकिन वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ शब्द का अर्थ ही अमृत है। विष पीने के बाद भी यह शाश्वत रहता है।
अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने गिर में शेरों के संरक्षण, केशोद और राजकोट में हवाई अड्डों के विकास, अहमदाबाद-वेरावल वंदे भारत ट्रेन और यात्रा धाम विकास पहलों के तहत किए गए बुनियादी ढांचे के कार्यों का भी उल्लेख किया।
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