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अमेरिका की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में 21 गुजराती: ‘वर्स्ट ऑफ द वर्स्ट’ अपराधियों पर कस रहा शिकंजा

| Updated: February 11, 2026 14:17

अहमदाबाद: अमेरिका जाने का सपना और वहां अवैध रूप से बसने की चाहत के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक पहलू सामने आया है। यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने हाल ही में आपराधिक गतिविधियों में शामिल विदेशी नागरिकों की एक सूची जारी की है, जिसे “वर्स्ट ऑफ द वर्स्ट” (बद से बदतर) की श्रेणी में रखा गया है। हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में 21 गुजरातियों के नाम शामिल हैं, जिससे अवैध प्रवासन (illegal migration) के साथ जुड़े अपराधों का काला सच उजागर हुआ है।

7 फरवरी को जारी हुए चौंकाने वाले आंकड़े

7 फरवरी को जारी किए गए इस देश-वार डेटाबेस में कुल 89 भारतीय नागरिकों के नाम हैं, जिन्हें इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) द्वारा गिरफ्तार किया गया है। चिंता का विषय यह है कि इन गिरफ्तार भारतीयों में से लगभग 25% अकेले गुजराती हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह सूची DHS और ICE द्वारा चलाए जा रहे उस विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए अवैध आप्रवासियों को अमेरिका से डिपोर्ट करना (वापस भेजना) है।

आर्थिक अपराधों का जाल: बुजुर्ग अमेरिकियों को बनाया निशाना

इस लिस्ट में शामिल 21 गुजरातियों में से अधिकांश उत्तर और मध्य गुजरात के जिलों से ताल्लुक रखते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में से करीब 15 व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी, पहचान की चोरी (identity theft) और अन्य वित्तीय अपराधों में लिप्त पाए गए हैं।

इनमें से कई मामलों में कथित तौर पर बुजुर्ग अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया गया था।

जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई मामूली या अचानक किए गए अपराध नहीं थे, बल्कि यह एक संगठित वित्तीय अपराध का हिस्सा लगते हैं। एवी पटेल (Avi Patel), बृजेशकुमार पटेल (Brijeshkumar Patel) और सागरकुमार पटेल (Sagarkumar Patel) सहित कई व्यक्तियों को पेंसिल्वेनिया, न्यू जर्सी और केंटकी जैसे राज्यों में मनी लॉन्ड्रिंग या धोखाधड़ी के मामलों में दोषी ठहराया गया है।

जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के अपराध अक्सर एक नेटवर्क के जरिए अंजाम दिए जाते हैं, जो इमिग्रेशन की खामियों, फर्जी पहचान और अवैध फंड ट्रांसफर करने के लिए ‘म खच्चर खातों’ (mule accounts) का दुरुपयोग करते हैं।

यौन अपराध और ड्रग्स तस्करी के गंभीर मामले

वित्तीय धोखाधड़ी से भी ज्यादा विचलित करने वाले मामले यौन अपराधों से जुड़े हैं। DHS की इस लिस्ट में भावेशकुमार शुक्ला (Bhaveshkumar Shukla), हार्दिककुमार पटेल (Hardikkumar Patel), मयूरकुमार पटेल (Mayurkumar Patel) और चिंतन भोजक (Chintan Bhojak) जैसे नाम शामिल हैं।

इन लोगों को यौन उत्पीड़न या नाबालिगों के ऑनलाइन शोषण और उन्हें बहलाने-फुसलाने का दोषी पाया गया है। होमलैंड सिक्योरिटी ने सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए ऐसे मामलों को डिपोर्टेशन के लिए ‘हाई प्रायोरिटी’ (उच्च प्राथमिकता) पर रखा है।

इसके अलावा, नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध भी इस सूची का हिस्सा हैं। निलेशकुमार पटेल (Nileshkumar Patel) पर ड्रग तस्करी का आरोप लगाया गया है, जबकि दिलीप पटेल (Dilip Patel) को कोकीन रखने और उपद्रव करने (disorderly conduct) के लिए दोषी ठहराया गया है। वहीं, कुछ अन्य लोगों को अमेरिका के कई राज्यों में चोरी की संपत्ति को खरीदने या बेचने के लिए दोषी पाया गया है, जो यह दर्शाता है कि ये अपराधी अलग-अलग न्यायक्षेत्रों (jurisdictions) के बीच सक्रिय थे।

अमेरिका का सख्त रुख: ‘योजनाबद्ध अपराध’

कानून प्रवर्तन सूत्रों के अनुसार, धोखाधड़ी के मामलों में अक्सर बुजुर्ग नागरिकों को फोन स्कैम, झूठे बयानों, पहचान की चोरी और मेल फ्रॉड के जरिए फंसाया जाता है। DHS द्वारा जारी आपराधिक एलियंस की सूची के साथ एक अमेरिकी अधिकारी ने अपने बयान में स्पष्ट किया, “ये अपराध अवसरवादी नहीं हैं। इनमें पूरी प्लानिंग, समन्वय और बार-बार निशाना बनाने की प्रवृत्ति शामिल है।”

DHS डेटाबेस इस बात को रेखांकित करता है कि अपने वर्तमान नेतृत्व के तहत, ICE अमेरिकी प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति के अनुरूप “वर्स्ट ऑफ द वर्स्ट” अपराधियों से शुरुआत करते हुए बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन की कार्रवाई कर रहा है।

गुजरात के लिए खतरे की घंटी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सूची गुजरात के लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह है। यह साबित करता है कि अवैध प्रवास केवल आर्थिक मजबूरी या बॉर्डर पार करने के खतरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे बिना दस्तावेजों वाले प्रवासी संगठित आपराधिक गतिविधियों का हिस्सा बन सकते हैं या उनका शिकार हो सकते हैं।

केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद मानव तस्करी के मार्गों, फर्जी दस्तावेजों और अमेरिका व भारत के बीच जुड़े मनी ट्रेल्स (पैसों के लेन-देन) की बारीकी से जांच हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इसकी प्रतिष्ठा पर भारी कीमत चुकानी पड़ती है। ये मामले फिर से याद दिलाते हैं कि अवैध प्रवास और उससे जुड़े अपराधों को जड़ से ही खत्म करना क्यों जरूरी है।”

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