आज के इस डिजिटल और हमेशा व्यस्त रहने वाले दौर में, एक सफल जीवनशैली और शारीरिक क्षमता के टूटने के बीच का अंतर बेहद कम हो गया है। इंसान काम के दबाव में अपनी सेहत को लगातार नजरअंदाज कर रहा है।
ऐसे में कैलिफोर्निया के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजय भोजराज ने इस ‘व्यस्त’ पीढ़ी को एक गंभीर चेतावनी दी है। डॉ. भोजराज के पास क्लीनिकल क्षेत्र में दो दशकों से भी ज्यादा का अनुभव है।
डॉ. भोजराज के अनुसार, दिल की गंभीर बीमारियां अचानक लिए गए किसी एक गलत फैसले का नतीजा नहीं होती हैं। उन्होंने अपनी एक पोस्ट में बताया है कि कैसे एक खास और धीरे-धीरे पनपने वाली दिनचर्या इंसान को सफलता की ऊंचाइयों से सीधे अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा देती है। उनकी इस पोस्ट का शीर्षक है- ‘यह रूटीन मुझे हार्ट अटैक के लगभग हर मामले में देखने को मिलता है।’
अक्सर सोशल मीडिया पर दिल की सेहत को शराब या वेपिंग जैसी खराब आदतों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि डॉ. भोजराज का मानना है कि असलियत इससे कहीं ज्यादा आम है और यह हर किसी की जिंदगी से जुड़ी है।
12 मार्च को इंस्टाग्राम पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने हार्ट अटैक के पीछे छिपे मुख्य कारणों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रात-रात भर स्क्रीन की नीली रोशनी के सामने जगे रहना और अधूरे कामों में उलझे रहना इसके अहम कारण हैं।
इसके अलावा लगातार बना रहने वाला तनाव अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक आम हिस्सा बन चुका है। वहीं, हर साल हमारी नींद का चक्र भी पहले के मुकाबले छोटा और खराब होता जा रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि उनके अनुभव के अनुसार ज्यादातर हार्ट अटैक इसी तरह की दिनचर्या से शुरू होते हैं। ये कोई बड़े या अचानक लिए गए फैसले नहीं होते, बल्कि हमारी वो छोटी-छोटी आदतें होती हैं जिन्हें हम वक्त के साथ सामान्य मान लेते हैं। लंबे समय के बाद ये पैटर्न हमारी मेडिकल रिपोर्ट्स में भी साफ दिखने लगते हैं।
डॉ. भोजराज का कहना है कि इन आदतों का सबसे बड़ा खतरा यह है कि ये हमें दिखाई नहीं देती हैं। अचानक लगने वाली किसी चोट के विपरीत, आधुनिक जीवनशैली का दबाव धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला करता है।
जब तक कोई मरीज आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचता है, तब तक उसका शरीर सालों से इसके संकेत दे रहा होता है। इनमें ब्लड प्रेशर का धीरे-धीरे बढ़कर हाइपरटेंशन के स्तर तक पहुंच जाना सबसे आम बात है।
इसके अलावा अनियंत्रित ब्लड शुगर भी एक बड़ा संकेत है, जहां हमारा मेटाबॉलिज्म तनाव और ज्यादा चीनी वाले फास्ट फूड को पचाने में संघर्ष करता है। शारीरिक गतिविधियों की कमी और खराब खान-पान के कारण ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ने लगता है जो दिल के लिए एक और खतरे की घंटी है।
इस कार्डियोलॉजिस्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि शुरुआत में इनमें से कोई भी आंकड़ा आपातकालीन या खतरनाक नहीं लगता है। लेकिन जब ये सभी चीजें एक साथ मिलती हैं, तो लंबे समय में ये हमारे हृदय तंत्र पर भारी दबाव डालती हैं।
डॉ. भोजराज के संदेश की सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने माना कि ये आदतें आमतौर पर लापरवाही का नतीजा नहीं होती हैं। बल्कि ये उस समाज की देन हैं जो इंसान से लगातार काम करने और हमेशा उपलब्ध रहने की उम्मीद करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्यादातर लोग अपनी सेहत के प्रति लापरवाह नहीं होते हैं, वे बस बहुत ज्यादा व्यस्त होते हैं। एक पिता होने के नाते उन्होंने इस बात को स्वीकारा कि दिनचर्या कैसे धीरे-धीरे खराब हो जाती है। हालांकि, उनका कहना है कि हम ध्यान दें या न दें, हमारा शरीर इन सभी बदलावों का हिसाब जरूर रखता है।
डॉक्टर के मुताबिक, इसका समाधान किसी ‘चमत्कारी’ दवा में नहीं है, बल्कि अपनी रोजमर्रा की आदतों को परखने और सुधारने में है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मेडिकल रिपोर्ट में नुकसान दिखने से पहले ही अपनी खराब दिनचर्या को सुधार लेना ही असली बचाव है।
अपनी बात को खत्म करते हुए डॉ. भोजराज ने कहा कि यही कारण है कि कार्डियोलॉजी में बचाव कभी किसी एक दवा से शुरू नहीं होता। इसकी शुरुआत आपके नींद, तनाव और खान-पान के पैटर्न को सुधारने से होती है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई व्यक्ति उनके क्लिनिक तक पहुंचता है, तब तक ये खराब पैटर्न सालों से शरीर में अपनी जगह बना चुके होते हैं।
पाठकों के लिए नोट: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर मौजूद यूजर्स द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर बनाई गई है। समाचार वेबसाइट स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं करती है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के विकल्प के रूप में बिल्कुल नहीं लिया जाना चाहिए।
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