जब कैप्टन धाराव गोसालिया को अपने पुराने दोस्त स्मित मच्छड़ के साथ हुई घटना के बारे में पहली बार पता चला, तो वह सन्न रह गए। उनका कहना है कि यह खौफनाक खबर सुनकर उनके रोंगटे खड़े हो गए थे।
इन दोनों की दोस्ती तब से है, जब वे लगभग 20 साल के थे। वे मुंबई के उपनगर घाटकोपर में पड़ोसी हुआ करते थे और उन्होंने न्यूजीलैंड में एक साथ अपनी विमान उड़ान की ट्रेनिंग शुरू की थी।
स्मित, गोसालिया से सीनियर थे। इसके बाद उन्होंने स्पाइसजेट (SpiceJet) में छह साल तक सहकर्मी के रूप में एक साथ काम किया, जहां वे बोइंग 737 विमान उड़ाते थे। फिर दोनों के करियर की राहें अलग-अलग दिशाओं में मुड़ गईं।
स्मित साल 2022 में दुबई चले गए और वहां फ्लाईदुबई (Flydubai) एयरलाइंस में शामिल हो गए। वहीं, गोसालिया एयर इंडिया के लिए बोइंग 777 विमान उड़ाने लगे।
गोसालिया बताते हैं कि वे दोनों अक्सर फोन और व्हाट्सएप के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। वे अपने रूट्स, डेस्टिनेशन और परिवारों के बारे में खूब बातें किया करते थे।
कभी-कभी आसमान में भी उनका आमना-सामना हो जाता था। साल 2024 में जब गोसालिया दुबई के एयरस्पेस से होते हुए लंदन जा रहे थे, तब उन्होंने रेडियो पर स्मित की आवाज पहचान ली थी। उस वक्त स्मित मुंबई के लिए उड़ान भर रहे थे और दोनों ने हवा में ही एक-दूसरे का हालचाल लिया था।
बुधवार को स्मित फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट के कैप्टन थे। इसी दौरान कॉकपिट में मौजूद एक अन्य पायलट ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें चाकू मार दिया।
इस भयंकर आपातकालीन स्थिति में बोइंग 737 मैक्स विमान को उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के ताबुक (Tabuk) शहर की ओर डायवर्ट किया गया। लैंडिंग के बाद स्मित को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
रियाद स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, फिलहाल उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।
इस अदम्य साहस के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्मित को एक “सच्चा हीरो” बताया है। नेतन्याहू ने कहा कि स्मित ने 174 लोगों की जान बचाई है और हवा में होने वाली एक बहुत बड़ी विनाशकारी त्रासदी को टाल दिया है।
लेकिन गोसालिया के लिए इस पूरी असाधारण घटना के केंद्र में रहने वाला वह दिलेर शख्स आज भी उनका दोस्त ‘स्मित मैक’ ही है। उनके दोस्त और सहकर्मी उन्हें इसी उपनाम से बुलाते हैं।
गोसालिया के मुताबिक, स्मित एक बेहद प्रतिभाशाली, मिलनसार और खुशमिजाज इंसान हैं। वे अक्सर मिलान और बैंकॉक जैसी जगहों पर लेओवर के दौरान मिलते थे और जब वे वापस मुंबई आते, तो साथ में टेनिस बॉल से क्रिकेट भी खेलते थे।
स्मित ने हमेशा जूनियर पायलटों की मदद की है और अपने अनुभव उनसे साझा किए हैं। गोसालिया उन्हें एक बेहद अनुशासित फ्लायर (पायलट) मानते हैं।
यह अनुशासन उन भारतीय वायु सेना के पूर्व पायलटों से मिली ट्रेनिंग का भी नतीजा है, जो कमर्शियल एविएशन में आए थे। गोसालिया बताते हैं कि इस तरह की ट्रेनिंग से फोकस, अनुशासन और मोटर स्किल्स में गजब का सुधार होता है।
इस ट्रेनिंग का एक अहम हिस्सा “चेयर फ्लाइंग” कहलाता है। इसमें एक कुर्सी पर बैठकर आपातकालीन स्थितियों का मानसिक अभ्यास किया जाता है। इस दौरान पायलट यह सोचता है कि कॉकपिट में जरूरी स्विच और कंट्रोल कहां होंगे।
इसका मकसद यह होता है कि जब असल में कोई खराबी आए और सोचने का समय बिल्कुल न हो, तब हाथ अपने आप सही स्विच की तरफ चले जाएं।
स्मित के पास अनुभव की कोई कमी नहीं थी। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उनके पास 9,750 घंटे से ज्यादा का उड़ान अनुभव है, जिसमें 6,400 घंटे से ज्यादा का समय पायलट-इन-कमांड के तौर पर बिताया गया है।
गोसालिया का कहना है कि बुधवार को फ्लाइट में असल में क्या हुआ, इसकी सटीक जानकारी एयरक्राफ्ट के फ्लाइट डेटा और कॉकपिट रिकॉर्डिंग से ही साफ हो पाएगी।
लेकिन कॉकपिट के अंदर चाहे जो भी हुआ हो, स्मित को एक भयानक और जानलेवा दबाव के बीच सही फैसले लेने पड़े। गोसालिया कहते हैं कि वह उस फ्लाइट के कमांडर थे और उन्होंने एक कमांडर की तरह ही काम किया।
विमान में इंजन फेल होने, आग लगने या केबिन का दबाव कम होने जैसी स्थितियों के लिए पायलटों के पास तय नियम और चेकलिस्ट होती है। लेकिन कॉकपिट में अगर कोई दूसरा व्यक्ति आप पर हावी होने की कोशिश करे या हमला कर दे, तो इसके लिए कोई पारंपरिक मैनुअल नहीं होता।
गोसालिया के मुताबिक, ऐसी स्थिति में सिर्फ साहस ही काम आता है। वे कहते हैं कि इसमें हिम्मत की बहुत बड़ी भूमिका होती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर जान का खतरा था।
इस घटना ने गोसालिया को गहराई तक प्रभावित किया है। वे बेहद गर्व के साथ कहते हैं कि स्मित ने उन्हें असली साहस सिखाया है और अब अगर कभी उनके साथ भी ऐसा कुछ होता है, तो वे भी बिल्कुल ऐसा ही करेंगे।
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