जापान के नागोया में चल रहे एशियाई खेलों के दौरान भारतीय हॉकी जगत से जुड़ी एक बेहद शर्मनाक और विवादित घटना सामने आई है। भारत के अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर गुरिंदर सिंह संघा को यौन दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के बाद टूर्नामेंट के बीच से ही वापस भारत भेज दिया गया है। हालांकि, संघा ने अपने ऊपर लगे इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए किसी भी गलत काम में शामिल होने से इनकार किया है।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार को संघा को तत्काल प्रभाव से नागोया छोड़ने का निर्देश दिया गया था। यह सख्त कदम मलेशिया की एक महिला अंपायर द्वारा उनके खिलाफ की गई शिकायत के बाद उठाया गया। महिला अंपायर का आरोप है कि संघा ने ‘मार्गदर्शन’ यानी मेंटरिंग करने के बहाने उन्हें अनुचित तरीके से छुआ और बिना सहमति के उनके साथ शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश की।
इस मामले में संघा पर केवल महिला अंपायर ही नहीं, बल्कि एशियाई खेलों के दौरान उनके होटल की एक महिला कर्मचारी ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि संघा पर उस महिला कर्मचारी को अपने कमरे में बुलाकर उसके साथ बदसलूकी करने का भी आरोप है।
इस पूरे विवाद पर नागोया में मौजूद हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं, एशियाई हॉकी महासंघ ने भी मामले को लेकर भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि, हॉकी इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि मलेशियाई अंपायर की शिकायत के तुरंत बाद संघा को दो दिन पहले ही वापस भेज दिया गया था। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि एशियाई हॉकी महासंघ से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी तरफ, गुरिंदर सिंह संघा ने इन सभी दावों को झूठा बताते हुए इसे अपना ‘चरित्र हनन’ करार दिया है। उनका कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी केवल मीडिया के माध्यम से मिली है। संघा ने दावा किया कि हॉकी की दुनिया में हर कोई उन्हें जानता है और वह केवल पुरुष अंपायरों के पैनल का काम देख रहे थे। उन्होंने कहा कि उनका किसी भी महिला अधिकारी या महिला अंपायर से कोई संपर्क नहीं था।
संघा ने इसे उच्च अधिकारियों के साथ चल रहे प्रशासनिक विवाद और अपने खिलाफ रची गई एक साजिश का हिस्सा बताया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि हॉकी का माहौल दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है। संघा के अनुसार, उन्होंने पहले ही मन बना लिया था कि वह इन एशियाई खेलों के बाद अंपायरिंग से संन्यास ले लेंगे।
अपनी अचानक वापसी के पीछे संघा ने पारिवारिक कारणों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उनकी मां का कुछ ही दिन पहले निधन हुआ है और उनकी पत्नी को भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं। संघा के मुताबिक, उनकी वापसी की फ्लाइट शनिवार को थी, लेकिन पारिवारिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपनी फ्लाइट एक दिन पहले करवा ली थी। उन्होंने कहा कि जालंधर लौटने के बाद वह इन झूठे आरोपों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर विचार करेंगे।
जालंधर के रहने वाले 54 वर्षीय गुरिंदर सिंह संघा पिछले एक दशक से अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंपायरिंग कर रहे हैं। वह साल 2003 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर बने थे और इसके बाद 2017 में उन्हें अंपायर मैनेजर्स पैनल में शामिल किया गया था।
यह पहली बार नहीं है जब संघा पर इस तरह के आरोप लगे हैं। पिछले साल 2024-2025 हॉकी इंडिया लीग (HIL) के दौरान भी एक भारतीय महिला अंपायर ने उनके खिलाफ ऐसी ही गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय हॉकी इंडिया को दी गई शिकायत में कहा गया था कि 20 जनवरी 2025 को शाम लगभग 4.20 से 4.25 बजे के बीच रांची के एक होटल की लॉबी में संघा का व्यवहार बेहद ‘गैर-पेशेवर और अपमानजनक’ था, जिससे वहां एक बहुत ही असहज माहौल पैदा हो गया था।
हॉकी इंडिया के अधिकारी के अनुसार, रांची में हुई उस शिकायत के बाद संघा को टूर्नामेंट में अंपायरिंग की जिम्मेदारियों से हटा दिया गया था। मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन भी किया गया था, लेकिन उसकी जांच के नतीजे कभी सार्वजनिक नहीं किए गए। हैरानी की बात यह रही कि उस विवाद के बावजूद संघा ने पिछले साल चेन्नई और मदुरै में आयोजित हुए पुरुषों के जूनियर विश्व कप में फिर से ऑफिशिएट किया था।
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