कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा ने नई दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को अपनी कला प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ की शुरुआत से चंद घंटे पहले रेहान ने दावा किया कि प्रबंधन ने उन पर छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को दर्शाने वाली कई कलाकृतियों को हटाने का भारी दबाव डाला।
इंस्टाग्राम पर अपनी बात रखते हुए रेहान ने बताया कि प्रबंधन को उनकी तस्वीरों की विषय-वस्तु पर कड़ी आपत्ति थी। हद तो तब हो गई जब उन्हें भारतीय राष्ट्रीय ध्वज वाली दो तस्वीरों को भी हटाने का कड़ा निर्देश दिया गया। हालांकि, रेहान ने इस फरमान को साफ तौर पर ठुकरा दिया और दृढ़ता से कहा कि वह किसी भी कीमत पर तिरंगे की तस्वीर को नहीं हटाएंगे।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि शाम सात बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम से ठीक पांच घंटे पहले उनसे दिल्ली के युवा प्रदर्शनकारियों की ज्यादातर तस्वीरें जबरन हटवा दी गईं। इन सबके बावजूद रेहान ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रदर्शनी आंशिक रूप से अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही चलेगी और वो पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरों के अपने पूरे संग्रह को प्रदर्शित करने के लिए इस एग्जिबिशन को किसी अन्य स्थान पर ले जाने पर भी विचार करेंगे। रेहान के मुताबिक कला को इस तरह से दबाया नहीं जा सकता।
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने इस कथित कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनी की लगभग आधी यानी ठीक 74 कलाकृतियों को महज इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उन्हें राजनीतिक माना गया था।
खेड़ा ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि जब सेंसरशिप की कैंची से तिरंगा भी सुरक्षित नहीं है, तो शायद समस्या कला में नहीं, बल्कि सत्ता में है। उन्होंने बताया कि कोई भी तस्वीर अपमानजनक या भड़काऊ नहीं थी, फिर भी उन्हें हटा दिया गया।
पवन खेड़ा ने आगे कहा कि दीवारों पर अब सिर्फ खाली लोहे की कीलें बची हैं, जो स्पॉटलाइट के नीचे चमकते हुए सेंसरशिप का एक बेहद डरावना रूप पेश कर रही हैं। उनका कहना था कि एक सरकार जो विचारों और विरोध की तस्वीरों से इतना डरती है, उसका अंत अब करीब ही होना चाहिए। रेहान को राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर बचाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी बीकानेर हाउस प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बीकानेर हाउस को नियंत्रित करने वाले प्रतिष्ठान का यह व्यवहार पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण और बचकाना है।
इस बीच, भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के कानूनी प्रकोष्ठ ने भी कलाकृतियों को हटाए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि आप फ्रेम को सेंसर कर सकते हैं, लेकिन सच्चाई को नहीं। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि ‘साहब डरा हुआ है’।
प्रदर्शनी शुरू होने से ठीक पहले हुए इस पूरे विवाद ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। फिलहाल, बीकानेर हाउस प्रबंधन की ओर से इन तमाम गंभीर आरोपों पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
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