मुंबई में एक पूर्व ऑफिस बॉय को उस समय गहरा सदमा लगा जब उसे लगभग 1.5 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स (IT) नोटिस मिला। यह भारी-भरकम टैक्स डिमांड एक फार्मा कंपनी से जुड़े बेहिसाब नकद लेनदेन और खर्चों के आधार पर निकाली गई थी, जिसके बारे में उस युवक को कोई जानकारी ही नहीं थी।
हालांकि, एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने इस रीअसेसमेंट को रद्द कर दिया है, जिससे इस आम नागरिक को बड़ी राहत मिली है।
पीड़ित करदाता वाघेला ने अपनी शिकायत में बताया कि उसके पूर्व नियोक्ता मेहता ने उसके हस्ताक्षरों और केवाईसी (KYC) दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया था। वाघेला ने सितंबर 2009 से करीब 18 महीने तक मेहता के यहां ऑफिस बॉय के तौर पर काम किया था, जहां उसकी मासिक सैलरी मात्र 3,500 रुपये थी।
नौकरी की औपचारिकताओं और सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उससे ये निजी दस्तावेज लिए गए थे। आरोप है कि इन्हीं कागजातों के आधार पर वाघेला की जानकारी के बिना उसके नाम पर दूसरा पैन (PAN) कार्ड बनवाया गया और ‘किंग्सी फार्मा’ नाम की एक कंपनी खड़ी कर दी गई।
इस मामले में वाघेला की जीत आयकर नोटिस के ‘अवैध तामील’ (invalid service of the I-T notice) के कारण हुई, जिसके चलते न्यायाधिकरण ने पूरे रीअसेसमेंट को ही खारिज कर दिया। हालांकि, ITAT ने अपने फैसले में सीधे तौर पर केवाईसी दस्तावेजों के दुरुपयोग के मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नौकरी या बैंकिंग कार्यों के लिए सौंपे गए निजी दस्तावेजों का किस स्तर पर गलत इस्तेमाल हो सकता है और आम नागरिकों को इसकी वजह से कानूनी लड़ाइयों में उलझना पड़ सकता है।
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि ट्रिब्यूनल के पास समय-समय पर केवाईसी धोखाधड़ी के ऐसे मामले आते रहते हैं। अधिकारियों की सलाह है कि अगर किसी व्यक्ति को अपने दस्तावेजों के दुरुपयोग का पता चलता है, तो उसे बिना देरी किए तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
इस कदम से कर संबंधी विवादों में पीड़ित का कानूनी पक्ष मजबूत होता है। इसके अलावा, करदाताओं को नियमित रूप से टैक्स पोर्टल पर उपलब्ध अपना वार्षिक सूचना विवरण (Annual Information Statements) और रिटर्न चेक करते रहना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके पैन कार्ड का इस्तेमाल किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के लिए तो नहीं किया जा रहा है।
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