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अहमदाबाद: सड़क हादसे और इलाज में लापरवाही से गई जान, अब पुलिस ने मरने वाले पर ही दर्ज किया केस

| Updated: February 4, 2026 14:13

आवारा कुत्ते से एक्सीडेंट और अस्पताल की लापरवाही ने ली जान, अब पुलिस ने हितेश मिस्त्री को ही बनाया अपनी मौत का मुजरिम - सिस्टम की बेरुखी की पूरी कहानी।

अहमदाबाद: एक आवारा कुत्ते की वजह से हुए सड़क हादसे से शुरू हुआ घटनाओं का सिलसिला, अस्पतालों में कथित लापरवाही से गुजरते हुए एक अजीबोगरीब कानूनी मोड़ पर आकर खत्म हुआ है। इस पूरे मामले ने एक परिवार को तोड़कर रख दिया है। सिस्टम की संवेदनहीनता देखिए कि जिस व्यक्ति की जान हादसे और इलाज में कमी के कारण गई, अंत में पुलिस ने उसी मृतक के खिलाफ खुद की मौत का मामला दर्ज कर लिया है।

यह दुखद मामला वासो तालुका के पीज गांव के रहने वाले 32 वर्षीय हितेश मिस्त्री से जुड़ा है, जिनकी 30 जनवरी को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उनके छोटे भाई, रवि ने वासो पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है और उन परिस्थितियों की कानूनी जांच की मांग की है जिनके कारण उनके भाई की जान गई।

कैसे हुआ हादसा?

पुलिस शिकायत के अनुसार, यह घटना 26 जनवरी की शाम को घटी। हितेश मिस्त्री अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर नडियाद से पीज गांव की ओर जा रहे थे। जब वे टुंडेल गांव के पास श्रीजी विला सोसाइटी के करीब पहुंचे, तभी अचानक एक आवारा कुत्ता सड़क पर उनकी बाइक के सामने आ गया।

कुत्ते को बचाने के प्रयास में मोटरसाइकिल फिसल गई और सड़क से नीचे उतर गई। इस हादसे में हितेश के बाएं पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।

इलाज में लापरवाही और वेंटिलेटर का न मिलना

हादसे के तुरंत बाद, हितेश को नडियाद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें सीटी स्कैन सेंटर भेजा गया और फिर उसी अस्पताल में दोबारा भर्ती कराया गया। 29 जनवरी को उनके बाएं पैर की सर्जरी की गई। परिजनों का आरोप है कि सर्जरी के ठीक बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी और उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी।

शिकायत में कहा गया है कि जब हितेश की हालत नाजुक हुई, तो अस्पताल में तुरंत वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं था। इस देरी ने उनकी सेहत को और ज्यादा खराब कर दिया। स्थिति को संभालते न देख, डॉक्टरों ने उन्हें अहमदाबाद सिविल अस्पताल रेफर कर दिया।

परिवार वाले 30 जनवरी की सुबह तड़के उन्हें लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे हितेश ने दम तोड़ दिया।

परिवार के जले पर नमक: मृतक पर ही दर्ज हुआ केस

इस हादसे और मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, लेकिन कानूनी कार्रवाई ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया है। चूँकि इस दुर्घटना में केवल पीड़ित की मोटरसाइकिल शामिल थी और किसी अन्य वाहन से कोई टक्कर नहीं हुई थी, इसलिए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत हितेश मिस्त्री को ही लापरवाही से गाड़ी चलाने और अपनी मौत का कारण बनने का आरोपी बनाया है।

वासो पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस फिलहाल अस्पतालों से उपचार के रिकॉर्ड मांग रही है और घटनाओं के सही क्रम का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है।

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