अहमदाबाद: अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने बच्चों की तस्करी (Child Trafficking) के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए इसके मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। बनासकांठा पुलिस के साथ एक साझा अभियान में, क्राइम ब्रांच ने उस व्यक्ति को दबोचा है जो इस पूरे नेटवर्क की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। अधिकारियों ने बुधवार को इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए आरोपी की पहचान यूनुस के रूप में की है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, यूनुस इस पूरे गिरोह में ‘मेन सप्लायर’ की भूमिका निभा रहा था। यह गिरफ्तारी 29 जनवरी को बचाए गए 15 दिन के नवजात शिशु के मामले में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी से जाल में फंसा आरोपी
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि यूनुस की गिरफ्तारी आसान नहीं थी। पुलिस पिछले कई दिनों से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी। ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ (मुखबिरों की सूचना) और तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) के सटीक मेल से पुलिस उस तक पहुंचने में कामयाब रही।
आरोपी यूनुस बनासकांठा जिले के दांता तालुका का रहने वाला है। जांच एजेंसियों का मानना है कि नवजात शिशुओं को खोजने (Sourcing) और उन्हें अलग-अलग बिचौलियों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में यूनुस सबसे अहम भूमिका निभाता था।
जनवरी के अंत में सामने आया था मामला
बच्चों की तस्करी का यह घिनौना खेल तब सामने आया था जब जनवरी के अंत में गुजरात क्राइम ब्रांच और एटीएस (ATS) की एक संयुक्त टीम ने अहमदाबाद एयरपोर्ट इलाके के पास एक संदिग्ध वाहन को रोका था। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने एक नवजात को रेस्क्यू किया था, जिसे कथित तौर पर गुजरात से बाहर ले जाने की कोशिश की जा रही थी।
मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि एक अन्य संदिग्ध को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक, बचाए गए शिशु को तुरंत मेडिकल जांच के लिए भेजा गया और बाद में बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) की देखरेख में सुरक्षित रखा गया।
सड़क मार्ग से दूसरे राज्य भेजने की थी योजना
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को पता चला कि पकड़े जाने के डर से आरोपी हवाई मार्ग के बजाय सड़क के रास्ते बच्चे को दूसरे राज्य ले जाने की फिराक में थे। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के विश्लेषण से पुलिस को संकेत मिले कि यह नेटवर्क सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं।
इसी जांच के दौरान यूनुस का नाम सामने आया, जो स्थानीय एजेंटों और दूसरे राज्यों के संपर्कों के बीच ‘कनेक्टर’ का काम कर रहा था।
गरीबी का फायदा उठाता था गिरोह
पुलिस ने खुलासा किया है कि इस तरह के नेटवर्क अक्सर उन परिवारों को अपना शिकार बनाते हैं जो गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहे होते हैं। यूनुस की गिरफ्तारी से अब जांचकर्ताओं को यह समझने में मदद मिली है कि यह रैकेट कैसे काम करता था—कैसे बच्चों को हासिल किया जाता था और कैसे बिचौलियों की कई परतों (Layers) के जरिए उन्हें खरीदारों तक पहुंचाया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि पैसों का लेनदेन अनौपचारिक तरीकों (Informal Channels) से किया जाता था ताकि कोई वित्तीय सबूत (Financial Trail) पीछे न छूटे। साथ ही, पकड़े जाने के जोखिम को कम करने के लिए बच्चों को जन्म के कुछ दिनों के भीतर ही शिफ्ट कर दिया जाता था।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यूनुस और उसके साथी उत्तर गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में हुई तस्करी की अन्य घटनाओं में भी शामिल थे।
इसके साथ ही, 29 जनवरी को बचाए गए नवजात के जैविक माता-पिता (Biological Parents) का पता लगाने के प्रयास जारी हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसमें कोई जबरदस्ती या प्रलोभन शामिल था या नहीं।
अधिकारियों का कहना है कि यूनुस की गिरफ्तारी से इस रैकेट के पैमाने, बच्चों की संख्या और खरीदारों के नेटवर्क के बारे में और भी कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। सभी आरोपियों के खिलाफ बाल संरक्षण कानूनों और आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और इसमें और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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