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AI-171 क्रैश जांच में नया विवाद: मृत पायलट के रिश्तेदार को समन भेजने पर FIP ने जांच एजेंसी को भेजा कानूनी नोटिस

| Updated: January 15, 2026 13:09

AI-171 क्रैश: 'मृत पायलटों पर दोष मढ़ने की कोशिश', रिश्तेदार को समन भेजने पर भड़का फेडरेशन, जांच एजेंसी को भेजा कानूनी नोटिस

एअर इंडिया की फ्लाइट 171 (AI-171) दुर्घटना की जांच के मामले में एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को कानूनी नोटिस भेजा है। यह कदम तब उठाया गया जब जांच एजेंसी ने हादसे के वक्त विमान उड़ा रहे कैप्टन सुमित सभरवाल के रिश्तेदार, कैप्टन वरुण आनंद को पूछताछ के लिए तलब किया।

एअर इंडिया ने कैप्टन वरुण आनंद को सूचित किया है कि AAIB ने उन्हें समन जारी किया है। हालांकि, फेडरेशन ने इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है।

FIP का सवाल: कैप्टन आनंद को क्यों बुलाया गया?

फेडरेशन का कहना है कि जांच एजेंसी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि आखिर कैप्टन आनंद को किस आधार पर बुलाया गया है। संस्था ने जोर देकर कहा कि कैप्टन आनंद का AI-171 की उड़ान से कोई संबंध नहीं था। न तो वे फ्लाइट प्लानिंग का हिस्सा थे और न ही दुर्घटनास्थल पर मौजूद थे।

फेडरेशन के मुताबिक, कैप्टन आनंद इस हादसे के न तो तथ्यात्मक गवाह (factual witness) हैं, न ही तकनीकी गवाह और न ही किसी तरह के विशेषज्ञ गवाह। ऐसे में, उन्हें जांच में शामिल करना समझ से परे है।

“मृत क्रू पर दोष मढ़ने की कोशिश”

पायलट्स संस्था का आरोप है कि कैप्टन आनंद को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमित सभरवाल के रिश्तेदार हैं।

FIP ने आशंका जताई है कि जांचकर्ता शायद पहले से तय किसी ‘नैरेटिव’ (preconceived narrative) पर काम कर रहे हैं और हादसे की पूरी जिम्मेदारी मृत फ्लाइट क्रू पर डालने की कोशिश हो रही है।

फेडरेशन ने ‘अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन’ (ICAO) के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जांच के हिस्से के रूप में परिवार के सदस्यों को बुलाना गैर-कानूनी है। इसके बावजूद, कैप्टन आनंद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के लिए तैयार हैं।

वह दर्दनाक हादसा: 260 लोगों की गई थी जान

अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट 171, 12 जून की दोपहर उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। यह विमान अहमदाबाद के एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से जा टकराया था।

इस भीषण त्रासदी में विमान में सवार सभी 12 क्रू मेंबर और 230 में से 229 यात्रियों की मौत हो गई थी। जमीन पर भी 19 लोगों की जान गई थी। कुल 260 लोगों की मौत वाले इस हादसे में केवल एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच पाया था।

कॉकपिट की बातचीत और विवाद

हादसे के एक महीने बाद, AAIB ने दुर्घटना के कारणों पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें कैप्टन सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंडर के बीच हुई बातचीत का जिक्र था।

रिपोर्ट के अनुसार, कॉकपिट ऑडियो में एक पायलट ने पूछा, “तुमने कट ऑफ क्यों किया?” (Why did you cut off?), जिस पर दूसरे ने जवाब दिया, “मैंने नहीं किया।”

इस बातचीत ने उन अटकलों को हवा दी कि शायद पायलट की गलती ही इस त्रासदी की वजह थी।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद, कैप्टन सभरवाल के 88 वर्षीय पिता पुष्कराज सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

उन्होंने रिपोर्ट को “पूरी तरह त्रुटिपूर्ण” (profoundly flawed) बताया। उनका कहना था कि जांच दल मुख्य रूप से उन पायलटों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो अब अपना बचाव करने के लिए जीवित नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह के नैरेटिव को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया था।

इस बीच, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने आश्वासन दिया है कि जांच में कोई हेरफेर नहीं होगा। उन्होंने लोगों से अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करने की अपील की है, जो अभी आना बाकी है।

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