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पायलटों के संगठन ने एयर इंडिया क्रैश रिपोर्टिंग पर WSJ और रॉयटर्स को भेजा लीगल नोटिस, माफ़ी की मांग

| Updated: July 19, 2025 14:58

एयर इंडिया क्रैश रिपोर्टिंग पर WSJ और Reuters को FIP का लीगल नोटिस

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल और रॉयटर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इन अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने 12 जून को हुई एयर इंडिया क्रैश के पीछे पायलट की गलती या कॉकपिट में भ्रम को संभावित कारण बताया था। FIP ने इस रिपोर्टिंग को “चयनात्मक, अपुष्ट और गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया है।

FIP द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में मीडिया संस्थानों से औपचारिक माफ़ी की मांग की गई है और कहा गया है कि जांच पूरी होने से पहले इस तरह की रिपोर्टिंग से मृत पायलटों की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

नोटिस में कहा गया, “ऐसी अटकलों पर आधारित रिपोर्टिंग न केवल मृत पायलटों की प्रतिष्ठा को धूमिल करती है, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक आघात देती है। इससे उस पायलट समुदाय के मनोबल को भी ठेस पहुंची है, जो अत्यधिक दबाव और जिम्मेदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभाता है।”

FIP ने यह भी कहा कि किसी भी दुर्घटना की जांच के बीच ग़लत जानकारी फैलाना न केवल जनता को भ्रमित करता है, बल्कि इससे भारतीय विमानन उद्योग की सुरक्षा पर अनावश्यक चिंता खड़ी होती है।

प्रारंभिक रिपोर्ट और मीडिया की आलोचना

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि उड़ान के दौरान दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच “रन” से “कटऑफ” स्थिति में आ गए थे, जिससे इंजन में ईंधन की आपूर्ति रुक गई। रिपोर्ट में पायलटों के बीच हुई बातचीत का भी ज़िक्र है, जिसमें एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि क्या उसने स्विच की स्थिति बदली है, और जवाब में इनकार मिला।

हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उड़ान के बीच में यह स्विच कैसे बदल गए। भले ही बाद में स्विच “रन” पर वापस लाए गए, लेकिन तब तक विमान इतनी ऊंचाई खो चुका था कि उसे फिर से नियंत्रित करना संभव नहीं रहा।

FIP ने मीडिया से अनुरोध किया है कि जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, किसी को दोषी ठहराने से बचें, खासकर उन मृत पायलटों को, जो अब अपनी सफाई में कुछ नहीं कह सकते।

NTSB और AAIB ने भी दी चेतावनी

यूएस नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) की प्रमुख जेनिफर होमेंडी ने भी मीडिया को संयम बरतने की सलाह दी है।

उन्होंने अपने बयान में कहा, “एयर इंडिया 171 क्रैश पर हालिया मीडिया रिपोर्ट्स जल्दबाज़ी में और अटकलों पर आधारित हैं। AAIB की केवल प्रारंभिक रिपोर्ट आई है, और ऐसी बड़ी घटनाओं की जांच में समय लगता है।”

AAIB ने भी मीडिया रिपोर्ट्स को “चयनात्मक और अपुष्ट” बताते हुए खारिज किया और कहा कि ऐसे समय में भ्रामक सूचना फैलाना अनुचित है।

12 जून को हुए हादसे में लगभग 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से 19 लोग ज़मीन पर मौजूद थे। जांच में सामने आया कि टेकऑफ के 30 सेकंड के भीतर ही दुर्घटना हो गई थी, जब विमान अधिकतम गति पर था और दोनों इंजन के फ्यूल कटऑफ स्विच एक ही सेकंड के भीतर बंद हो गए।

अंतिम अपील

FIP ने यह भी चेताया कि मीडिया की जल्दबाज़ी में की गई रिपोर्टिंग न केवल जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, बल्कि मृत पायलटों की गरिमा और परिवारों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती है। संगठन ने दोहराया कि अगर इस तरह की अटकलें जारी रहीं, तो वह आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।

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