महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बुधवार की सुबह एक बेहद दुखद खबर लेकर आई। राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार का विमान दुर्घटना में निधन हो गया है। यह हादसा बारामती में लैंडिंग की कोशिश के दौरान हुआ। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमान एयरपोर्ट से महज 50 मीटर की दूरी पर क्रैश हो गया।
इस दुखद घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत तमाम बड़े नेताओं ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
हादसे की आंखों देखी: धमाका और धुएं का गुबार
चश्मदीदों के मुताबिक, यह मंजर बेहद डरावना था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “पहली बार हमारे घर के ऊपर से कोई विमान इतनी नीचे से गुजरा। सुबह के करीब 8:45 बज रहे थे। अचानक विमान क्रैश हो गया और एक जोरदार धमाका हुआ। विमान रनवे तक भी नहीं पहुंच पाया था। धमाका इतना तेज था कि हम डर गए और पानी की बाल्टियां लेकर दौड़े। वहां शव बिखरे पड़े थे, जिन्हें हमने कंबलों से ढका।”
सीसीटीवी फुटेज में भी देखा गया कि विमान तेजी से नीचे आया और जमीन से टकराते ही आग के गोले में तब्दील हो गया। अधिकारियों के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि शवों की पहचान करना मुश्किल हो गया था। मृतकों की पहचान उनके कपड़ों और निजी सामान से करनी पड़ी।
कौन-कौन था विमान में सवार?
इस हादसे में अजित पवार के साथ विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में उनके सुरक्षा अधिकारी, एक अटेंडेंट पिंकी माली और दो क्रू सदस्य शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा अधिकारी विदित जाधव और पीएसओ सुमित कपूर का नाम भी मृतकों की सूची में सामने आया है। इसके अलावा, फर्स्ट ऑफिसर शांभवी पाठक की भी इस हादसे में जान चली गई।
यह चार्टर्ड विमान (लियरजेट 45) वीएसआर वेंचर्स द्वारा संचालित था, जिसने सुबह करीब 8:10 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। अजित पवार जिला परिषद चुनाव की बैठकों के लिए बारामती जा रहे थे।
हादसे की वजह: खराब मौसम और कम दृश्यता
प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण खराब मौसम और कम दृश्यता (Low Visibility) माना जा रहा है। बारामती एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग और खराब मौसम से निपटने के लिए जरूरी नेविगेशन सिस्टम की कमी है। बताया जा रहा है कि जब विमान लैंड करने की कोशिश कर रहा था, तब दृश्यता घटकर मात्र 800 मीटर रह गई थी।
विमान आपूर्तिकर्ता वीएसआर एविएशन के मालिक वी.के. सिंह ने कहा, “विमान 100% सुरक्षित था और क्रू काफी अनुभवी था। मुझे लगता है कि यह खराब दृश्यता या रनवे के बारे में पायलट के गलत अनुमान के कारण हुआ होगा। डीजीसीए इसकी विस्तृत जांच करेगा।”
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की टीम ने जांच शुरू कर दी है और वीएसआर एविएशन के कार्यालय से दस्तावेज व सुरक्षा रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
वह मुख्यमंत्री जो कभी ‘मुख्यमंत्री’ नहीं बन सका
अजित पवार का राजनीतिक सफर उपलब्धियों से भरा रहा, लेकिन नियति ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचने से रोक दिया, जिसके वे सबसे बड़े दावेदार माने जाते थे। वे अपने पूरे करियर में ‘मुख्यमंत्री-इन-वेटिंग’ ही बने रहे। 2004 में जब एनसीपी ने कांग्रेस से ज्यादा (71) सीटें जीती थीं, तब यह माना जा रहा था कि अजित पवार मुख्यमंत्री बन सकते थे। लेकिन पार्टी ने मुख्यमंत्री पद का दावा न करने का फैसला किया।
बाद में, अजित पवार ने खुद स्वीकार किया था कि 2004 में ही उन्हें विद्रोह कर देना चाहिए था। उनका मानना था कि अगर उस समय एनसीपी का मुख्यमंत्री बनता, तो पार्टी आज कहीं अधिक बड़ी ताकत होती। आज, अजित पवार की छवि एक ऐसे नेता की है, जिसके पास प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक कौशल तो पूरा था, लेकिन वे कभी शिखर तक नहीं पहुंच सके।
बारामती और ‘दादा’ का अटूट रिश्ता
अजित पवार की पहचान बारामती से अलग करके नहीं देखी जा सकती। 1991 में अपनी चुनावी यात्रा शुरू करने के बाद से, उन्होंने लगातार आठ बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। बारामती को एक ‘मॉडल निर्वाचन क्षेत्र’ बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है।
उन्होंने वहां शिक्षा, सिंचाई और सहकारिता के क्षेत्र में जो काम किया, वह एक मिसाल है। यह एक विडंबना ही है कि जिस बारामती को उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया, उसी धरती पर लैंडिंग के दौरान उनका सफर हमेशा के लिए थम गया।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं: एक शून्य जो कभी नहीं भरेगा
देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “आज महाराष्ट्र के लिए बहुत कठिन दिन है। मैंने एक मजबूत और उदार दोस्त खो दिया है। अजित दादा का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।”
अमित शाह ने कहा, “अजित पवार जी ने पिछले साढ़े तीन दशकों में जिस समर्पण भाव से सेवा की, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उनका जाना पूरे एनडीए परिवार के लिए एक बड़ी क्षति है।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, “अजित पवार के निधन की सही जांच होनी चाहिए। वे सत्ताधारी दल से जुड़े थे, और दूसरी पार्टियों के लोग भी दावा कर रहे थे कि वे पाला बदल सकते हैं।”
रितेश देशमुख ने लिखा, “अजित दादा के निधन की खबर से गहरा धक्का लगा है। वे एक ऐसे नेता थे जो काम में कोताही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे। उनका जाना एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है जिसे भरा नहीं जा सकता।”
पवार परिवार और एनसीपी का भविष्य
अजित पवार के निधन के बाद अब सबकी निगाहें पवार परिवार और एनसीपी के भविष्य पर टिकी हैं। शरद पवार, जिनकी उम्र 85 वर्ष है, अब क्या भूमिका निभाएंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अजित पवार को एनसीपी के दोनों धड़ों में शरद पवार का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था।
अब सवाल यह है कि क्या पवार परिवार फिर से एक होगा? पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के हालिया चुनावों में दोनों गुटों का साथ आना इस बात का संकेत देता है कि भविष्य में कुछ भी संभव है।
अजित पवार की राजनीतिक विरासत एक विरोधाभास के रूप में याद की जाएगी: एक ऐसा नेता जिसके पास राजा बनने का हर गुण था, लेकिन जो हमेशा ताज के करीब पहुंचकर भी उससे दूर रह गया।
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