1 अप्रैल को गुजरात के बनासकांठा ज़िले के दीसा में हुए भीषण अग्निकांड के पीड़ितों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस हादसे में 21 लोगों की जान गई थी, जिनमें सात बच्चे शामिल थे, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। पीड़ित परिवारों ने प्रत्येक मृतक के लिए ₹2 करोड़ और घायलों के लिए ₹50 लाख के मुआवजे की मांग की है। साथ ही, मामले की जांच गुजरात से बाहर के पुलिस अधिकारियों को सौंपे जाने की भी मांग की गई है।
यह याचिका मध्य प्रदेश के देवास गांव निवासी चंदर सिंह नायक ने दाखिल की है, जो अहमदाबाद में मज़दूरी करते हैं। इस हादसे में उन्होंने अपने परिवार के छह सदस्यों को खो दिया — जिनमें उनकी बेटी, दामाद, दामाद के भाई-बहन और मृत बेटी की सास शामिल हैं।
अवैध पटाखा फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी
याचिका में कहा गया है कि जिस पटाखा गोदाम में विस्फोट और आग लगी, वह अवैध रूप से संचालित हो रहा था। वहां न तो वैध लाइसेंस था, न ही अग्निशमन उपकरण और न ही सुरक्षा के अन्य आवश्यक इंतज़ाम। अधिकांश मज़दूर मध्य प्रदेश से लाए गए प्रवासी थे, जो बिना किसी औपचारिक अनुबंध के काम कर रहे थे।
याचिका सुप्रीम कोर्ट में वकील उत्कर्ष दवे के माध्यम से दाखिल की गई है। इसमें अनुच्छेद 21 के उल्लंघन का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्य सरकार की लापरवाही के चलते नागरिकों के जीवन का अधिकार प्रभावित हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को भेजा नोटिस
31 जुलाई को न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति नोंगमैखापम कोटेश्वर सिंह की पीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए गुजरात के मुख्य सचिव, गृह सचिव, गांधीनगर के क्षेत्रीय अग्निशमन अधिकारी, बनासकांठा के ज़िला कलेक्टर और दीसा के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 26 सितंबर को तय की गई है।
याचिका में गुजरात की हालिया घटनाओं का भी ज़िक्र
याचिका में वर्ष 2023 से अब तक गुजरात में घटित अन्य समान घटनाओं का हवाला भी दिया गया है:
- 20 अप्रैल 2023: अरावली में पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से 4 मज़दूरों की मौत
- 10 मई 2023: अहमदाबाद के बापूनगर में अवैध पटाखा गोदाम में आग से कई घायल
- 21 अप्रैल 2024: अहमदाबाद के वंच इलाके में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 2 की मौत
- 25 मई 2024: राजकोट के TRP गेमिंग ज़ोन में आगजनी की घटना
याचिका में कहा गया है कि इन घटनाओं से स्पष्ट है कि राज्य सरकार अवैध पटाखा इकाइयों पर नियंत्रण रखने में असफल रही है और इस लापरवाही के लिए वह ज़िम्मेदार है।
“न्याय और गरिमा के लिए मुआवज़ा जरूरी”
याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार और गुजरात-मध्य प्रदेश सरकारों द्वारा घोषित मुआवज़ा (₹2 लाख से ₹4 लाख) “अत्यंत कम” है। पीड़ितों में से अधिकांश परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, इसलिए उनके परिजनों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त सहायता मिलनी चाहिए।
याचिका में मांग की गई है कि:
- प्रत्येक मृतक के परिजन को ₹2 करोड़ का मुआवज़ा दिया जाए
- प्रत्येक घायल को ₹50 लाख का मुआवज़ा मिले
- गुजरात में सभी पटाखा निर्माण इकाइयों का तत्काल निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच हो
निष्पक्ष जांच की मांग
वकील उत्कर्ष दवे ने कहा कि याचिका का उद्देश्य केवल मुआवज़ा नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करना भी है। “हमने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले की जांच गुजरात के बाहर के अधिकारियों से कराई जाए ताकि राज्य के दोषी अधिकारियों को बच निकलने का मौका न मिले।”
उन्होंने कहा, “गुजरात में पहले भी ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनमें प्रशासनिक लापरवाही के चलते लोगों की जान गई है। अगर राज्य सरकार समय रहते कार्रवाई करती, तो ये हादसे रोके जा सकते थे।”
उल्लेखनीय है कि दीसा रूरल पुलिस स्टेशन में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गोदाम में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था।
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