अहमदाबाद: गुजरात भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में संगठन के स्तर पर एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने के करीब दो महीने बाद, जगदीश विश्वकर्मा ने अपनी नई टीम की घोषणा कर दी है। दो दिन पहले जारी की गई 35 पदाधिकारियों की इस सूची में कई चौंकाने वाले नाम शामिल हैं।
नई कार्यकारिणी में पार्टी ने जहां कई पुराने और अनुभवी नेताओं पर भरोसा जताया है, वहीं कई चर्चित चेहरे इस बार जगह बनाने में नाकाम रहे हैं। खास बात यह है कि इस नई टीम में आठ महिलाओं को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
दिल्ली की मुहर और विश्वकर्मा की छाप
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की जगह जगदीश विश्वकर्मा को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। भाजपा की ओर से बताया गया है कि नई नियुक्तियों को राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन की मंजूरी के बाद अंतिम रूप दिया गया है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इस नई टीम के गठन में जगदीश विश्वकर्मा की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दोनों का करीबी माना जाता है। संगठन के भीतर उनकी छवि अपने पूर्ववर्ती की तुलना में ज्यादा मिलनसार नेता की है। पार्टी के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “वे बिल्कुल भी अहंकारी नहीं हैं और कोई भी बात बोलने से पहले उस पर गहरा विचार करते हैं।”
पाटिल और आनंदीबेन गुट को झटका?
हालांकि, इन नियुक्तियों ने पार्टी के भीतर कई लोगों को हैरान भी कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सी.आर. पाटिल और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल के करीबियों को नई कार्यकारिणी में शायद ही जगह मिली है।
नई टीम में शामिल किए गए प्रमुख नामों में पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भरत पंड्या का नाम सबसे ऊपर है। उन्हें 10 नए उपाध्यक्षों की सूची में शामिल किया गया है, जिसमें दो महिलाएं भी हैं। इसके अलावा, हलोल से विधायक जयद्रथसिंह परमार और पुराने अनुभवी नेता रमेशभाई धड़ुक को भी उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
‘एक व्यक्ति, एक पद’ के नियम में ढील
आमतौर पर भाजपा ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत पर जोर देती है, लेकिन इस बार के विस्तार में कुछ अपवाद भी देखने को मिले हैं। वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी इसका प्रमुख उदाहरण हैं, जिन्हें युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि सी.आर. पाटिल के कार्यकाल में भी इस नियम का पूरी तरह पालन नहीं हुआ था।
जल शक्ति मंत्री बनने के बावजूद, पाटिल अक्टूबर की शुरुआत तक, यानी विश्वकर्मा की नियुक्ति तक, प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बने रहे थे।
आदिवासी क्षेत्र और पुराने विवाद
सूरत जिले से आने वाले पूर्व विधायक गणपत वसावा को पार्टी के अनुसूचित जनजाति (ST) मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वसावा का नाम अतीत में कुछ विवादों से भी जुड़ा रहा है; ऐसी अफवाहें थीं कि पहले बांटे गए कुछ पाटिल-विरोधी पर्चों के पीछे उनका हाथ था।
किन दिग्गजों का कटा पत्ता?
नई सूची में जिन बड़े नामों को जगह नहीं मिली है, उनमें अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (AUDA) के पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र पटेल (जिन्हें लोग प्यार से सुरेंद्रकाका कहते हैं) और पूर्व गृह राज्य मंत्री गोवर्धन झड़फिया शामिल हैं। संगठन ने डॉ. अनिल पटेल के रूप में एक नया प्रवक्ता भी नियुक्त किया है। जब पुराने नेताओं को फिर से जिम्मेदारी देने के बारे में पूछा गया, तो पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि संगठन लगातार नए प्रयोग करता रहता है।
2026 के चुनावों पर नजर
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा फेरबदल आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। राज्य में नगर निगमों, जिला और तालुका पंचायतों के चुनाव 2026 की पहली छमाही में होने हैं, और पार्टी इसके लिए अभी से कमर कस रही है।
वडोदरा को लगा झटका
वैसे तो सूची में पूरे राज्य को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है, लेकिन वडोदरा शहर इस बार थोड़ा पीछे छूट गया है। डॉ. हेमांग जोशी को छोड़कर वडोदरा से किसी बड़े नाम को संगठन में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, वडोदरा के बालकृष्ण शुक्ला राज्य विधानसभा में पार्टी के व्हिप हैं।
जानकारों का कहना है कि सर सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय के समय से अपनी बेहतरीन शहरी योजना के लिए मशहूर वडोदरा में पार्टी की आंतरिक कलह ने उसे नुकसान पहुंचाया है। अहमदाबाद या सूरत के मुकाबले वडोदरा का विकास उस गति से नहीं हो पाया है, जिसकी उम्मीद थी। खुद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने एक बार वडोदरा के एक कार्यक्रम में टिप्पणी की थी कि विकास के मामले में वडोदरा, अहमदाबाद और सूरत से पीछे क्यों रह जाता है।
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