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गुजरात: ब्रिटेन जाने के लिए रचा ‘फर्जी शादी’ का ड्रामा, पैसों के विवाद ने खोली पोल; वकील समेत 4 पर केस दर्ज

| Updated: January 8, 2026 12:35

यूके में बसने के लिए पहले फर्जी निकाह, फिर फर्जी तलाक... 3.5 लाख के लालच और आपसी विवाद ने पहुंचाया जेल के दरवाजे पर; वकील समेत 4 नामजद।

भरूच: विदेश जाने की चाहत में लोग किस हद तक जा सकते हैं, इसका एक हैरान करने वाला मामला गुजरात के भरूच जिले से सामने आया है। यहाँ अवैध रूप से यूके (UK) में बसने के लिए एक परिवार ने न केवल फर्जी शादी करवाई, बल्कि जब विवाद बढ़ा तो फर्जी तलाक के कागजात भी बनवा लिए।

पुलिस ने इस कबूतरबाजी और धोखाधड़ी का भंडाफोड़ करते हुए ‘फर्जी पति’, ‘पत्नी’, उसके भाई और एक वकील के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला तब सामने आया जब 3.5 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया और खुद ‘फर्जी पति’ ने पुलिस में शिकायत कर दी।

क्या है पूरा मामला?

पालेज पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर आनंद चौधरी ने इस साजिश का पर्दाफाश करते हुए बताया कि वलन गांव के रहने वाले और वर्तमान में यूके निवासी रिजवान मेडा ने जंबूसर की रहने वाली तस्लीमाबानू करभरी को यूके ले जाने के लिए यह प्लान बनाया था।

फरवरी 2024 में एक साजिश रची गई। रिजवान मेडा ने तस्लीमाबानू को अपनी पत्नी दिखाने के लिए एक ‘फर्जी निकाहनामा’ (मैरिज सर्टिफिकेट) बनवाया। इस दस्तावेज के आधार पर एजेंट शोएब दाऊद इखखारिया के जरिए तस्लीमाबानू के लिए ‘डिपेंडेंट वीजा’ (Dependent Visa) का आवेदन किया गया। सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ और तस्लीमाबानू यूके पहुंच गई।

पैसों के लिए बिगड़ी बात और खुली पोल

इस पूरी प्रक्रिया के बदले तस्लीमाबानू के परिवार ने रिजवान मेडा को 3.5 लाख रुपये देने का वादा किया था। पुलिस इंस्पेक्टर चौधरी ने बताया कि तस्लीमाबानू के यूके पहुंचने के बाद पैसों के भुगतान को लेकर विवाद शुरू हो गया।

इसी बीच, रिजवान मेडा अपनी असली शादी करना चाहता था और अपनी असली पत्नी को यूके ले जाना चाहता था। लेकिन, कागजों में तस्लीमाबानू उसकी पत्नी थी, जो उसके लिए मुसीबत बन गई थी। जब बात नहीं बनी, तो रिजवान ने अपने दोस्त मिन्हाज याकूब उघरदार के जरिए पावर ऑफ अटॉर्नी देकर पिछले साल अक्टूबर में भरूच पुलिस से संपर्क किया।

फर्जी शादी के बाद ‘फर्जी तलाक’ का खेल

पुलिस जांच में पता चला कि जब रिजवान मेडा तस्लीमाबानू की ‘डिपेंडेंट वीजा’ वाली जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहता था, तो तस्लीमाबानू के भाई फैजल (जो खुद भी यूके निवासी है) ने एक और फर्जीवाड़ा किया। उसने कंथारिया के एक वकील साजिद कोठिया से संपर्क किया।

वकील साजिद ने भरूच कोर्ट की एक ‘फर्जी तलाक की डिक्री’ (Fake Divorce Decree) तैयार कर दी। इस जाली दस्तावेज का इस्तेमाल रिजवान और तस्लीमाबानू ने यूके में अपने अलगाव (Separation) को सही साबित करने के लिए किया।

आरोपियों पर कानूनी शिकंजा और डिपोर्टेशन की तैयारी

पुलिस ने इस मामले की गहन जांच के बाद रिजवान मेडा, तस्लीमाबानू, उसके भाई फैजल और वकील साजिद कोठिया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 467, 468, 471 (जालसाजी और फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 120B (आपराधिक साजिश), 177 (गलत जानकारी देना) और 114 के तहत मामला दर्ज किया है।

इंस्पेक्टर आनंद चौधरी ने जानकारी दी कि पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही वकील साजिद कोठिया कनाडा फरार हो गया है। वहीं, पुलिस अब ब्रिटिश उच्चायोग (British High Commission) और दूतावास को पत्र लिख रही है।

पुलिस का कहना है कि यूके में बैठे इन तीन आरोपियों (रिजवान, तस्लीमाबानू और फैजल) को वापस भारत लाने (Deport) के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। जैसे ही वे भारत की धरती पर कदम रखेंगे, उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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