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फर्जी डॉक्टर मामला: गुजरात HC से आरोपी को मिली कनाडा जाने की छूट, वजह बनी ‘गृह प्रवेश’ और भतीजे की जिम्मेदारी

| Updated: February 4, 2026 13:27

पाटन के 'फर्जी एमडी' पर गैर-इरादतन हत्या और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप, फिर भी 2026 तक मिली विदेश यात्रा की छूट; जानिए कोर्ट का तर्क।

अहमदाबाद: गुजरात उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए फर्जी मेडिकल प्रैक्टिस करने के आरोपी योगेश पटेल की जमानत शर्तों में ढील दी है। पाटन में दूसरे की डिग्री का इस्तेमाल कर क्रिटिकल केयर अस्पताल चलाने वाले पटेल को कोर्ट ने कनाडा जाने की अनुमति दे दी है। इस यात्रा के पीछे का मुख्य कारण एक पारिवारिक ‘गृह प्रवेश’ समारोह में शामिल होना और अपने नाबालिग भतीजे को उसके माता-पिता के पास सुरक्षित छोड़ना बताया गया है।

क्या है पूरा मामला और कोर्ट का आदेश?

गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस एस.जे. दवे ने 30 जनवरी को एक इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। आरोपी योगेश पटेल ने अपने वकील प्रतीक बारोट के माध्यम से याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने 11 नवंबर, 2022 को मिली नियमित जमानत की शर्तों में बदलाव की मांग की थी।

पुरानी शर्तों के मुताबिक, पटेल को अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करना था और मुकदमा खत्म होने तक अहमदाबाद शहर की सीमा से बाहर जाने पर रोक थी। पटेल ने इन दोनों शर्तों में बदलाव की गुहार लगाते हुए कनाडा जाने की इजाजत मांगी थी।

कनाडा जाने के पीछे दी गई दलीलें

अदालत में पक्ष रखते हुए पटेल ने बताया कि उन्हें मई 2026 में कनाडा में अपने साले (brother-in-law) के घर होने वाले ‘गृह प्रवेश’ समारोह में शामिल होना है। इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण मानवीय कारण यह दिया गया कि उनका 8 वर्षीय भतीजा (साले का बेटा) पिछले दो वर्षों से उन्हीं के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा है। पटेल ने कोर्ट से कहा कि वह बच्चे को कनाडा ले जाकर उसके माता-पिता से मिलवाना चाहते हैं।

अभियोजन पक्ष का विरोध और कोर्ट का निर्णय

सहायक लोक अभियोजक (APP) हार्दिक मेहता ने इस आवेदन का विरोध किया, लेकिन अदालत ने आरोपी की दलीलों पर विचार करते हुए आवेदन को “आंशिक रूप से स्वीकार” (partly allowed) कर लिया।

हाईकोर्ट ने अपने मौखिक आदेश में पासपोर्ट जमा करने और अहमदाबाद न छोड़ने की शर्तों को 31 दिसंबर, 2026 तक स्थगित (abeyance) कर दिया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया:

“ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया जाता है कि आवेदक को विदेश जाने की स्वतंत्रता देते हुए तत्काल उसका पासपोर्ट सौंप दिया जाए। यात्रा से लौटने पर, आवेदक को तुरंत ट्रायल कोर्ट में अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा। साथ ही, आवेदक को कनाडा में अपने प्रवास का पूरा पता, टेलीफोन नंबर और यात्रा कार्यक्रम (itinerary) ट्रायल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।”

फर्जी डिग्री और अस्पताल: क्या हैं आरोप?

इस मामले की पृष्ठभूमि काफी गंभीर है। जुलाई 2022 में गुजरात मेडिकल काउंसिल और स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई एक निरीक्षण कार्रवाई के बाद योगेश पटेल को गिरफ्तार किया गया था। जांच में पाया गया था कि पाटन स्थित ‘प्रसिद्ध अस्पताल’ (Prasiddh Hospital) में पटेल इंटेंसिव केयर यूनिट चला रहे थे।

हैरान करने वाली बात यह थी कि वह कथित तौर पर खुद को एमडी फिजिशियन (MD Physician) बता रहे थे, जबकि वह किसी अन्य व्यक्ति के एमबीबीएस (MBBS) रजिस्ट्रेशन नंबर का दुरुपयोग कर रहे थे। जांच में उनका मेडिकल काउंसिल सर्टिफिकेट रजिस्ट्रेशन नंबर भी जाली पाया गया था।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी और तालुका स्वास्थ्य अधिकारी की विस्तृत जांच के बाद पाटन ए-डिविजन पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।

इन धाराओं के तहत दर्ज है मुकदमा

योगेश पटेल पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और गुजरात मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला चल रहा है. इसमें धारा 304: गैर-इरादतन हत्या (Culpable homicide not amounting to murder), धारा 465, 467, 468, 471: जालसाजी, मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी और जाली दस्तावेज का असली के रूप में उपयोग, धारा 336: दूसरों के जीवन और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना, धारा 201: सबूत मिटाना, गुजरात मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट की धारा 30 और 33: अपंजीकृत व्यक्तियों द्वारा मेडिकल प्रैक्टिस पर रोक शामिल है।

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