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रूसी तेल पर ट्रंप की धमकी का भारत ने दिया करारा जवाब — अमेरिका-यूरोप की दोहरी नीति पर उठाए तीखे सवाल

| Updated: August 5, 2025 11:59

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी के बाद, भारत ने अमेरिका और यूरोपीय देशों की रूस से व्यापारिक गतिविधियों को उजागर करते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया।

नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देने के कुछ ही घंटों बाद भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ पर पलटवार किया है। भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसके ऊर्जा संबंधी फैसले को लेकर की जा रही आलोचना “अनुचित और तर्कहीन” है, खासकर तब जब पश्चिमी देश खुद रूस के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने बयान में कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती दर पर रूसी तेल खरीदने का निर्णय उस समय लिया था जब पारंपरिक तेल आपूर्तिकर्ता यूरोप की ओर अपना निर्यात मोड़ चुके थे। उस समय अमेरिका ने खुद भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाई जा सके।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताएं घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सस्ती और स्थिर कीमतों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जाती हैं।

मंत्रालय ने कहा, “भारत का तेल आयात वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के कारण उत्पन्न आवश्यकता है। इसका मकसद आम भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा की लागत को स्थिर और किफायती बनाए रखना है। लेकिन यह हैरान करने वाली बात है कि जो देश भारत की आलोचना कर रहे हैं, वे खुद रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं — जबकि उनके लिए यह व्यापार किसी राष्ट्रीय मजबूरी का हिस्सा नहीं है।”

मंत्रालय ने यह भी बताया कि साल 2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच का द्विपक्षीय व्यापार भारत-रूस व्यापार से कहीं अधिक था। इसके साथ ही, अमेरिका द्वारा रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड (नाभिकीय उद्योग के लिए), पैलेडियम (ईवी उद्योग के लिए), उर्वरक और रसायनों का आयात अभी भी जारी है।

डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा था,

“भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है और उन्हें इस बात की परवाह नहीं कि यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं। इस कारण मैं भारत द्वारा अमेरिका को दिए जाने वाले टैरिफ को काफी बढ़ाने जा रहा हूं।”

भारत ने इस बयान को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के आधार पर ही निर्णय लेता है और उसे अलग-थलग करके देखना वैश्विक व्यापार की जमीनी हकीकतों को नजरअंदाज करना है।

भारत लगातार यह स्पष्ट करता आया है कि उसकी विदेश नीति और ऊर्जा साझेदारियों के निर्णय स्वतंत्र और व्यावहारिक सोच पर आधारित होते हैं, विशेषकर तब जब वैश्विक बाजार में भारी अस्थिरता हो।

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