मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से भारत लाए गए पहले जत्थे के अहम सदस्य ‘गौरव’ नाम के चीते ने सोमवार को दम तोड़ दिया। करीब 10 साल का यह नर चीता पिछले कुछ समय से बीमार चल रहा था।
गौरव (जिसका मूल नाम एल्टन था) को सितंबर 2022 में सात अन्य चीतों के साथ भारत लाया गया था। उसके साथ उसका साथी चीता ‘फ्रेडी’ भी आया था, जिसे बाद में ‘शौर्य’ नाम दिया गया था। कूनो के जंगलों में इन दोनों नर चीतों की जोड़ी इतनी मशहूर हुई कि इन्हें कूनो के ‘रॉकस्टार्स’ के नाम से जाना जाने लगा।
गौरव और शौर्य को 22 मार्च, 2023 को कूनो के खुले जंगलों में आजाद किया गया था। इसके महज 48 घंटे के भीतर ही इस जोड़ी ने अपना पहला शिकार कर एक नया इतिहास रच दिया था। चीता कंजर्वेशन फंड के अनुसार, 70 से अधिक वर्षों में भारत की धरती पर यह किसी चीते द्वारा किया गया पहला दर्ज शिकार था।
इसके बाद दोनों ने कूनो में अपना क्षेत्र स्थापित किया और एक मजबूत जोड़ी के रूप में उभरे। हालांकि, उनके लिए जंगल का यह सफर आसान नहीं था। अपने इलाके पर वर्चस्व को लेकर उनका सामना ‘अग्नि’ और ‘वायु’ नाम के दो अन्य नर चीतों से भी हुआ, लेकिन गौरव ने इन सभी संघर्षों का डटकर सामना किया और खुद को साबित किया।
जनवरी 2024 में गौरव को तब बड़ा झटका लगा जब उसका साथी शौर्य गंभीर रूप से बीमार हो गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अपने पुराने साथी को खोने के बाद गौरव अकेला पड़ गया था। उस वक्त वन विभाग ने कहा था कि गौरव की सेहत और उसकी हर गतिविधि पर अब पैनी नजर रखी जाएगी।
प्रोजेक्ट चीता में गौरव का योगदान केवल उसके जंगल में जीवित रहने तक सीमित नहीं था। अप्रैल 2025 में उसने दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘निर्वा’ के साथ मिलकर पांच शावकों को जन्म दिया। कूनो में यह पहला मौका था जब नामीबियाई पिता और दक्षिण अफ्रीकी मां की वंशावली के मिलाप से भारत में चीतों की एक बिल्कुल नई पीढ़ी ने जन्म लिया।
अफसोस की बात यह रही कि गौरव के अंतिम दिन काफी कष्टदायक बीते। 12 सितंबर को उसे जंगल से रेस्क्यू किया गया था, क्योंकि वह बेहद कमजोर और सुस्त नजर आ रहा था। पशु चिकित्सकों की जांच में उसकी मांसपेशियों के सिकुड़ने और गंभीर डिहाइड्रेशन की पुष्टि हुई थी।
एक वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारी के मुताबिक, उसे तुरंत कूनो के पालपुर में एक क्वारंटीन बाड़े में रखा गया और लगातार जरूरी इलाज दिया गया। शुरुआती जांच में किसी पुरानी बीमारी के पनपने के संकेत मिले थे। तमाम कोशिशों के बावजूद गौरव की हालत बिगड़ती गई और सोमवार शाम करीब 4 बजे उसने अंतिम सांस ली। उसकी मौत की सटीक वजह पोस्टमार्टम और सैंपल्स की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी।
प्रोजेक्ट चीता अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर रहा है और गौरव की मौत अधिकारियों के लिए एक गहरी चिंता का विषय है। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कूनो में अब 51 चीते बचे हैं, जिनमें से 36 भारत में जन्मे हैं और 16 फिलहाल खुले जंगल में घूम रहे हैं। इसके अलावा चार अन्य चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में रखा गया है, जिससे भारत में चीतों की कुल आबादी अब 55 हो गई है।
यह भी पढ़ें-
2000 करोड़ का ‘SD Pay’ महाघोटाला: 15 लाख से ज्यादा लोग बने ठगी का शिकार, 6 राज्यों तक फैले तार











