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कनाडाई पुलिस का दावा: जेल से सिंडिकेट चला रहा है लॉरेंस बिश्नोई, रिपोर्ट में भारत सरकार से कनेक्शन का आरोप

| Updated: January 14, 2026 15:20

साबरमती जेल से ऑपरेट हो रहा इंटरनेशनल 'मर्डर-फॉर-हायर' नेटवर्क? कनाडाई खुफिया रिपोर्ट में भारत सरकार और बिश्नोई गैंग के कथित 'गठजोड़' का सनसनीखेज दावा।

नई दिल्ली/ओटावा: रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की एक वर्गीकृत (classified) खुफिया रिपोर्ट में लॉरेंस बिश्नोई को लेकर बेहद गंभीर खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत स्थित कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई सलाखों के पीछे से ही जबरन वसूली, ड्रग तस्करी और सुपारी किलिंग (murder-for-hire) जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों को अंजाम दे रहा है।

‘ग्लोबल न्यूज’ द्वारा प्राप्त और रिपोर्ट किए गए दस्तावेजों के अनुसार, बिश्नोई गैंग न केवल कनाडा में अपनी हिंसक जड़ों को फैला रहा है, बल्कि वह कथित तौर पर “भारत सरकार की ओर से” काम कर रहा है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इस गठजोड़ का उद्देश्य सिख अलगाववादियों और भारत के लिए खतरा माने जाने वाले अन्य व्यक्तियों को निशाना बनाना है।

व्यापार वार्ता के बीच आई रिपोर्ट

यह संवेदनशील रिपोर्ट ऐसे समय में कनाडाई मीडिया के हाथ लगी है, जब भारत और कनाडा अपने कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देश जल्द ही व्यापार वार्ता (trade talks) शुरू करने वाले हैं, ऐसे में इस रिपोर्ट का सामने आना नए सवाल खड़े करता है।

गौरतलब है कि लॉरेंस बिश्नोई इस समय गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। बुधवार को ‘ग्लोबल न्यूज’ द्वारा सार्वजनिक किए गए इन दावों पर अब तक भारत सरकार, गुजरात जेल विभाग या भारतीय उच्च आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

अक्टूबर 2024 में शुरू हुआ था विवाद

कनाडा ने सबसे पहले 15 अक्टूबर, 2024 को सार्वजनिक रूप से भारतीय एजेंटों पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथ मिलीभगत का आरोप मढ़ा था। उस समय RCMP ने दावा किया था कि उनके पास “पुख्ता जानकारी” है कि भारत सरकार के एजेंट बिश्नोई नेटवर्क के साथ समन्वय करके कनाडा में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

भारत ने उस समय इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी थी। नई दिल्ली ने इन दावों को “बेतुका और राजनीति से प्रेरित” करार दिया था। इसके जवाब में कूटनीतिक तनाव इतना बढ़ गया कि भारत ने छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया और ओटावा से अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया था।

700 सदस्यों का नेटवर्क और गोल्डी बराड़

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बिश्नोई 2015 से भारत में कैद है, लेकिन जेल की दीवारें उसके ऑपरेशन को रोकने में नाकाम रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह जेल के अंदर से ही अपने संगठन को चला रहा है। वह अपने सहयोगी गोल्डी बराड़ (जिसका असली नाम सतिंदरजीत सिंह है) के साथ मिलकर लगभग 700 सदस्यों के एक विशाल नेटवर्क की निगरानी करता है। यह नेटवर्क भारत, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों में फैला हुआ है।

RCMP ने नोट किया है कि कनाडा में इस गैंग की मौजूदगी कई रंगदारी और गोलीबारी की घटनाओं से जुड़ी है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह मनी-लॉन्ड्रिंग और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग जैसे अपने आपराधिक उपक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा का सहारा ले रहा है।

खालिस्तान समर्थकों को निशाना बनाने का आरोप

रिपोर्ट में लगाए गए आरोप केवल आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें सीधे तौर पर भारतीय एजेंटों के साथ सहयोग की बात कही गई है। दावे के अनुसार, भारतीय सरकारी अधिकारियों ने खालिस्तान समर्थक नेताओं पर हमले करवाने के लिए बिश्नोई सिंडिकेट का इस्तेमाल किया है।

इसमें विशेष रूप से 2023 में सरे (Surrey), बीसी में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और विन्निपेग में सुखदूल सिंह की हत्या का उल्लेख किया गया है। बता दें कि भारत ने इन दोनों व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया था। रिपोर्ट का दावा है कि इंटरसेप्ट किए गए संचार (intercepted communications) निज्जर की हत्या को वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से जोड़ते हैं, जिसने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में खटास पैदा कर दी है।

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