मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर से एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है। यहाँ रोविल (Rowville) स्थित ‘ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी सेंटर’ में लगी महात्मा गांधी की आदमकद कांस्य प्रतिमा (bronze statue) को चोरों ने क्षतिग्रस्त कर चुरा लिया है। 426 किलोग्राम वजनी इस प्रतिमा की चोरी 12 जनवरी की सुबह हुई।
भारत सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के समक्ष इसे गंभीरता से उठाया है।
एंगल ग्राइंडर से काटकर ले गए प्रतिमा
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना 12 जनवरी के शुरुआती घंटों में घटी। चोरों ने पूरी योजना के साथ इस वारदात को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि प्रतिमा को उसके आधार (base) से अलग करने के लिए ‘एंगल ग्राइंडर’ (angle grinder) का इस्तेमाल किया गया। चोर प्रतिमा का मुख्य हिस्सा काटकर ले गए, जबकि बापू के पैर वहीं आधार पर रह गए।
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि वजन अधिक होने के कारण चोरों ने कांस्य की इस मूर्ति को ले जाने से पहले कई टुकड़ों में काट दिया होगा।
भारत ने मांगा कड़ा जवाब
इस घटना पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने घटना की निंदा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा, “हम मेलबर्न के रोविल स्थित ऑस्ट्रेलियन इंडियन कम्युनिटी सेंटर में अज्ञात लोगों द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने और हटाने की कड़ी निंदा करते हैं।”
श्री जायसवाल ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के साथ इस मामले को मजबूती से उठाया है और उनसे आग्रह किया है कि वे लापता प्रतिमा को बरामद करने और दोषियों को पकड़कर उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
पहले भी निशाना बन चुकी है यह प्रतिमा
यह पहली बार नहीं है जब इस प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया गया है। यह प्रतिमा ‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR), नई दिल्ली द्वारा उपहार स्वरूप दी गई थी। इसका अनावरण 2021 में ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने किया था, जिसे भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा गया था।
हालाँकि, इसके उद्घाटन के एक दिन बाद ही, नवंबर 2021 में भी इसे निशाना बनाया गया था और क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। उस समय भी भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ने इस कृत्य की आलोचना की थी, लेकिन तब किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई थी।
पुरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, वह हमला ऐसे समय में हुआ था जब खालिस्तान से जुड़ी चरमपंथी गतिविधियाँ बढ़ रही थीं और कई पश्चिमी देशों में भारतीय राजनयिक मिशनों और सामुदायिक स्थानों को निशाना बनाया जा रहा था।
पुलिस जांच और कबाड़ व्यापारियों को चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘विक्टोरिया पुलिस नॉक्स क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट’ ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा जारी बयान के मुताबिक, 12 जनवरी को लगभग 12:50 बजे (रात) तीन अज्ञात व्यक्तियों ने किंग्सले क्लोज़, रोविल स्थित चैरिटी परिसर से प्रतिमा चुराई।
पुलिस ने क्षेत्र के ‘स्क्रैप मेटल डीलरों’ (कबाड़ व्यापारियों) को भी चेतावनी जारी की है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति टूटी हुई कांस्य प्रतिमा या उसके हिस्से बेचने की कोशिश करता है, तो वे तुरंत सतर्क हो जाएं और पुलिस को सूचित करें।
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