वाशिंगटन/बुडापेस्ट: अमेरिकी विदेश विभाग ने विदेशी आगंतुकों (विजीटर्स) के लिए अपने सख्त रुख को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। विभाग ने साफ शब्दों में दोहराया है कि अमेरिकी वीजा प्राप्त करना कोई “गारंटीकृत अधिकार” नहीं है। यदि कोई विदेशी नागरिक अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ कार्य करता है, तो उसका वीजा तत्काल प्रभाव से वापस लिया जा सकता है।
यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री (Secretary of State) मार्को रुबियो द्वारा हंगरी की यात्रा के दौरान की गई टिप्पणियों के बाद सामने आया है।
रुबियो का स्पष्टीकरण: ‘वीजा सिर्फ एक अनुमति है’
विभाग द्वारा साझा किए गए एक वीडियो संदेश में, मार्को रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने यह मुद्दा बार-बार उठाया है और वे इसे फिर से स्पष्ट करना चाहते हैं।
अपनी हताशा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने यह बात कई बार कही है। मुझे समझ नहीं आता कि कुछ लोगों के लिए इसे समझना इतना मुश्किल क्यों है।” उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “किसी को भी वीजा पाने का जन्मसिद्ध अधिकार नहीं है।”
ट्रंप प्रशासन के शीर्ष सहयोगी रुबियो ने सोमवार को बुडापेस्ट में यह टिप्पणी की। वह हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन (Viktor Orbán) के साथ एक संयुक्त प्रेस कार्यक्रम सहित द्विपक्षीय यात्रा पर वहां मौजूद थे।
पर्यटक हो या पत्रकार, नियम सबके लिए एक
वीजा की अवधारणा को समझाते हुए रुबियो ने कहा कि यह अनिवार्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश करने की एक ‘अनुमति’ (Permission) भर है। उन्होंने विस्तार से बताया, “वीजा हमारे देश में एक आगंतुक के रूप में प्रवेश करने की अनुमति है।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति एक आगंतुक के रूप में अमेरिका में प्रवेश करता है—चाहे वह छात्र हो, पर्यटक हो, पत्रकार हो या किसी अन्य क्षमता में आया हो—और फिर ऐसी गतिविधियों में शामिल होता है जो “संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय हित या राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ हैं, तो हम आपका वीजा वापस ले लेंगे।”
रुबियो ने यह भी जोड़ा कि यदि अधिकारियों को पहले से ऐसी किसी गतिविधि की जानकारी होती, तो शायद उस व्यक्ति को वीजा जारी ही नहीं किया जाता।
कड़ी शर्तों के साथ अमेरिकी वीजा नीति
विदेश विभाग की यह चेतावनी अमेरिकी सरकार द्वारा वीजा को एक ‘शर्त’ के रूप में मानने और मौजूदा कानूनों के तहत इसे रद्द करने के अधिकार पर जोर देने की व्यापक योजना का हिस्सा है। विभाग ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि दुनिया भर में कांसुलर अधिकारी नियमित रूप से कई कारणों से वीजा अस्वीकार करते हैं, जिसमें वीजा की अवधि से अधिक समय तक रुकने की चिंताएं या आपराधिक व्यवहार शामिल हैं।
मार्को रुबियो अतीत में भी इसी तरह के तर्क देते रहे हैं। सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने पहले भी कहा है कि वीजा एक ‘विशेषाधिकार’ (Privilege) है, न कि कोई अधिकार। अपने कड़े आव्रजन-विरोधी रुख के साथ, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वीजा प्राप्त करने के लिए कोई संवैधानिक पात्रता नहीं होती है।
यह भी पढ़ें-
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’: पीएम मोदी के विजन और ‘डिजिटल इंडिया’ की जमीनी हकीकत का टकराव.











