नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण’ (democratising technology) के विजन को आधार बनाकर आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ (India AI Impact Summit) का आगाज हो चुका है। भव्य ‘भारत मंडपम’ में 16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस महाकुंभ में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स का जमावड़ा लगा है।
यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर के देश अपना एआई एजेंडा तय करने की होड़ में हैं।
लेकिन पहले ही दिन, जब प्रधानमंत्री मोदी खुद डेलिगेट्स से मिल रहे थे, आयोजन स्थल के बाहर की अव्यवस्था ने ‘डिजिटल इंडिया’ के दावों की पोल खोलकर रख दी। आगंतुकों को खराब इंटरनेट, फेल होते क्यूआर कोड (QR codes) और फूड काउंटर्स पर यूपीआई (UPI) न होने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा।

नवाचार का प्रदर्शन और पीएम का दौरा
इस एक्सपो में 600 से अधिक उच्च-क्षमता वाले स्टार्टअप्स हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा, एआई इकोसिस्टम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रदर्शित करने के लिए 13 देशों के पवेलियन भी सजाए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इवेंट का दौरा करते हुए कई स्टॉलों पर समय बिताया, संस्थापकों (founders) से बातचीत की और भाग लेने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की।

तकनीकी खामियां और कतारों का दर्द
इवेंट को भारत के एआई अभियान (AI push) के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा था, लेकिन आयोजन स्थल के बाहर की स्थिति तनावपूर्ण रही। समिट में शामिल होने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “डिजी यात्रा (Digi Yatra) के प्रवेश द्वारों पर भी भारी भीड़ थी।
मुझे घंटों लाइन में इंतजार करना पड़ा। सबसे बड़ी बात, क्यूआर कोड काम नहीं कर रहे थे और भारी ट्रैफिक जाम लगा हुआ था। अंदर बैग या कार की चाबियां ले जाने की भी अनुमति नहीं थी। यहां तक कि मोबाइल इंटरनेट भी बहुत रुक-रुक कर चल रहा था या बिल्कुल काम नहीं कर रहा था।”

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों ने जमकर अपनी भड़ास निकाली। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, “भारत ने साबित कर दिया कि एआई दुनिया की भूख मिटा सकता है… लेकिन दिल्ली के ट्रैफिक और कतार प्रबंधन को नहीं सुधार सकता। पीक 2026 एनर्जी।”
एक अन्य यूजर ने समिट में प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची पर कटाक्ष करते हुए पोस्ट किया: “‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ की प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची- बैग (खाली हाथ आएं), कार की चाबियां (कार पार्क करें और चाबियां फेंक दें), लैपटॉप (टेक इवेंट में लैपटॉप लाना जरूरी नहीं है), ईयरबड्स (सुनना वैकल्पिक है), खाना और पानी (क्या आप यहां पिकनिक मनाने आए हैं?), नुकीली चीजें (पैनल चर्चा के दौरान तीखे सवाल भी शामिल)।”
अव्यवस्था से परेशान एक अन्य उद्यमी ने लिखा, “गेट बंद होने के कारण मैं एआई समिट में अपने ही बूथ तक नहीं पहुंच सका। अगर आप भी बाहर फंसे हैं और @bolna_dev टीम से मिलना चाहते हैं, तो मुझे डीएम (DM) करें। हम कनॉट प्लेस के किसी कैफे में शायद अपना मिनी-बूथ लगा लें।”
वहीं, डिजिटल इंडिया के दावों पर सवाल उठाते हुए एक और यूजर ने लिखा, “इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में फूड काउंटर पर कोई यूपीआई नहीं, केवल कैश। सचमुच #DigitalIndia। लंबी कतार में खड़े होकर परेशान मेरे दोस्त ने मुझे यह मैसेज किया।”
सरकारी रिपोर्ट: यूपीआई बना पसंदीदा विकल्प
दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान, 13-14 फरवरी को आयोजित ‘चिंतन शिविर’ में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट का शीर्षक था- “रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले भीम-यूपीआई (Person-to-Merchant) लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव विश्लेषण”।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूपीआई अब नकद लेनदेन को पछाड़कर भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बन गया है। यह विश्लेषण एक व्यापक प्राथमिक सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसमें 15 राज्यों के 10,378 उत्तरदाता शामिल थे।
इनमें 6,167 उपयोगकर्ता, 2,199 व्यापारी और 2,012 सेवा प्रदाता शामिल हैं। रिपोर्ट में रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड के उपयोग को मजबूत करने के लिए, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, लक्षित हस्तक्षेपों (targeted interventions) की वकालत की गई है।
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