comScore गुजरात: मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण पूरा, 17 फरवरी को जारी होगी अंतिम सूची; 73 लाख से ज्यादा नाम हटे - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

गुजरात: मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण पूरा, 17 फरवरी को जारी होगी अंतिम सूची; 73 लाख से ज्यादा नाम हटे

| Updated: February 16, 2026 13:17

90 लाख नोटिस, 14 लाख आपत्तियां और बड़े पैमाने पर पलायन—जानिए गुजरात की नई मतदाता सूची में क्या बदला है और आयोग ने क्यों हटाए लाखों नाम।

गांधीनगर/अहमदाबाद: गुजरात में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब राज्य चुनाव आयोग 17 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने के लिए तैयार है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 19 दिसंबर को जारी की गई ड्राफ्ट (प्रारूप) सूची की तुलना में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में मामूली बढ़ोतरी होने की संभावना है।

गौरतलब है कि दिसंबर में जारी ड्राफ्ट लिस्ट में 4,34,70,109 मतदाता थे। यह संख्या पिछली मतदाता सूची के 5,08,43,436 मतदाताओं के मुकाबले करीब 73.73 लाख कम थी। इन हटाए गए 73.73 लाख नामों में से 54 प्रतिशत से अधिक ऐसे मतदाता थे जो ‘स्थायी रूप से पलायन’ (Permanently Migrated) कर चुके हैं।

90 लाख नोटिस, लेकिन सुनवाई में दिलचस्पी कम

इस पूरी कवायद के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने करीब 90 लाख ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी किए थे, जिनके विवरण में ‘तार्किक विसंगतियां’ (Logical Discrepancies) थीं या जो ‘अनमैप्ड’ (Unmapped) श्रेणी में थे। इन मामलों की सुनवाई 10 फरवरी को आयोजित की गई थी।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, “हैरानी की बात है कि जिन 90 लाख लोगों को सत्यापन के लिए नोटिस भेजा गया था, उनमें से 30 प्रतिशत लोग भी आखिरी सुनवाई के लिए नहीं पहुंचे।”

इस भारी-भरकम काम को निपटाने के लिए चुनाव आयोग को अपने कर्मचारियों की संख्या तीन गुना तक बढ़ानी पड़ी। सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (AEROs) और निर्वाचक निबंधन अधिकारियों (EROs) की संख्या 800 से बढ़ाकर 3,000 करनी पड़ी।

नाम और उम्र में गड़बड़ियाँ: पिता और पुत्र की उम्र में अंतर न के बराबर

बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने बताया कि तार्किक विसंगतियों में मुख्य रूप से नाम, पता और उम्र के बेमेल होने के मामले शामिल थे।

एक बीएलओ ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “कई मामलों में जमा किए गए दस्तावेजों या गणना फॉर्म और 2002 की मतदाता सूची के बीच नाम, पिता के नाम, उपनाम या पते में अंतर पाया गया। हमने ऐसे दस्तावेज अपलोड किए हैं जिनमें मतदाता के नाम के साथ पिता का नाम शामिल हो। इसके अलावा, उम्र को लेकर भी अजीब मामले सामने आए, जैसे मतदाता की दर्ज उम्र उसकी वर्तमान उम्र से मेल नहीं खा रही थी, या पिता और मतदाता (पुत्र/पुत्री) की उम्र के बीच का अंतर बहुत कम था।”

फॉर्म-7: 14 लाख आपत्तियां, लेकिन सिर्फ 1.8 लाख वैध

सूत्रों के अनुसार, SIR अभियान के दौरान राज्य भर से सीईओ कार्यालय को फॉर्म-7 के करीब 14 लाख आवेदन प्राप्त हुए। हालांकि, निर्वाचक निबंधन अधिकारियों द्वारा की गई जांच के बाद इनमें से मुश्किल से 1.8 लाख आवेदन ही ‘वैध’ पाए गए। बता दें कि फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है।

फॉर्म-7 दाखिल करने के मामले में सबसे ज्यादा सक्रियता आनंद जिले में देखी गई, जहाँ 40,600 से अधिक आवेदन मिले। वहीं, डांग जिले में सबसे कम, महज 55 आवेदन प्राप्त हुए। नियमों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति असीमित संख्या में फॉर्म-7 भर सकता है, लेकिन बूथ लेवल एजेंट (BLA) अपने क्षेत्र में एक दिन में अधिकतम 10 फॉर्म ही जमा कर सकते हैं।

नागरिकों के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा पहले 18 जनवरी तय की गई थी, जिसे बाद में चुनाव आयोग ने बढ़ाकर 30 जनवरी कर दिया था। इन सभी आपत्तियों का निस्तारण 10 फरवरी तक कर दिया गया।

विपक्ष का आरोप: “लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने की सुनियोजित साजिश”

फॉर्म-7 को लेकर मचे घमासान पर विपक्ष ने कड़ा रुख अपनाया है। गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. हिरेन बैंकर ने वाइब्स ऑफ इंडिया से बातचीत में इसे लोकतंत्र को कमजोर करने की सत्ताधारी भाजपा की एक “सुनियोजित साजिश” करार दिया।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जमा किए गए फॉर्मों का बड़ा हिस्सा भाजपा के लोगों द्वारा ही भरा गया था। डॉ. बैंकर ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या आयोग उन लोगों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाएगा जिन्होंने जानबूझकर गलत आपत्तियां दर्ज करवाईं?

“दबाव में है चुनाव आयोग”: मुजाहिद नफीस

दूसरी तरफ, गुजरात माइनॉरिटी को-ऑर्डिनेशन कमेटी (Minority Coordination Committee) के संयोजक मुजाहिद नफीस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्ताधारी भाजपा के दबाव में काम कर रहा है।

नफीस ने वाइब्स ऑफ इंडिया को बताया कि फॉर्म-7 के आवेदनों में जो भारी विसंगतियां (वैध और अवैध आवेदनों का बड़ा अंतर) सामने आई हैं, उसका खुलासा जागरूक नागरिक समूहों की सतर्कता के कारण हो सका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसमें चुनाव आयोग का कोई योगदान नहीं है, बल्कि यह सब नागरिक संगठनों की सक्रियता से उजागर हुआ है।

हजारों गलत आपत्तियां, फिर भी कोई FIR नहीं?

नफीस ने आगे इस बात पर गहरी चिंता जताई कि इतनी बड़ी संख्या में गलत आपत्तियां उठाने वालों के खिलाफ आयोग ने अब तक एक भी एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की है।

नवसारी जिले का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां एक भाजपा नेता ने हजारों की संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई थीं। सिस्टम पर सवाल उठाते हुए नफीस ने कहा, “अगर कोई अकेला व्यक्ति फॉर्म-7 लेकर जाता है, तो उससे तमाम सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन यहाँ हजारों आपत्तियां बिना किसी पूछताछ के स्वीकार कर ली गईं।”

हटाए गए नामों का लेखा-जोखा

ड्राफ्ट सूची से हटाए गए कुल 73,73,327 मतदाताओं का विवरण इस प्रकार है:

  • स्थायी रूप से पलायन (Permanently Migrated): 40,25,553 (सबसे अधिक)
  • मृतक मतदाता: 18,07,278
  • अनुपस्थित मतदाता: 9,69,662
  • दो जगहों पर पंजीकृत: 3,81,470
  • अन्य: 1,89,364

कुल प्राप्त वैध आवेदनों की स्थिति

सत्यापन अवधि के दौरान राज्य भर से नागरिकों के कुल 14,70,125 ‘वैध’ आवेदन प्राप्त हुए:

  • फॉर्म 6 (नए मतदाता पंजीकरण): 7,25,920
  • फॉर्म 7 (नाम हटाने/आपत्ति): 1,83,235
  • फॉर्म 8 (सुधार के लिए): 5,60,970

इस विशाल SIR प्रक्रिया और 5.08 करोड़ गणना फॉर्मों को संभालने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक तंत्र तैनात किया गया था। इसमें 33 जिला निर्वाचन अधिकारी, 182 मतदाता पंजीकरण अधिकारी, 855 सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी, 50,963 बीएलओ, 54,443 बीएलए और 30,833 स्वयंसेवक शामिल थे।

इसके अतिरिक्त, शहरी क्षेत्रों में नगर पालिकाओं और नगर निगमों के कर्मचारियों को भी इस कार्य में लगाया गया था।

यह भी पढ़ें-

हाई बीपी के मरीजों के लिए बड़ी राहत: अब रोज़ गोलियों का झंझट होगा खत्म, साल में सिर्फ 2 इंजेक्शन रखेंगे ब्लड प्रेशर कंट्रोल

80 साल के रिटायर्ड टीचर का अनोखा शौक: घर को बना दिया ‘रेडियो म्यूजियम

Your email address will not be published. Required fields are marked *